ओडिशा की अदालत में महिला ने मजिस्ट्रेट, अभियोजक और गार्ड पर लोहे की रॉड से किया हमला
यह हिंसक घटना नवरंगपुर जिले की झारीगाम कोर्ट में चल रहे एक वैवाहिक विवाद के मामले के दौरान हुई।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
8 नवंबर 2026, सुबह 1:40 · 3 मिनट का पाठ
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ओडिशा के नवरंगपुर जिले में शनिवार को झारीगाम JMFC कोर्ट परिसर में एक महिला द्वारा न्यायिक मजिस्ट्रेट, सहायक सरकारी अभियोजक (APP) और कोर्ट के सुरक्षाकर्मी पर लोहे की रॉड से हमला किया गया। इस हिंसक हमले में तीनों व्यक्ति घायल हो गए हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी महिला की पहचान संमति माझी के रूप में हुई है, जिसने अपने बैग में छिपाई हुई लोहे की रॉड निकालकर अचानक हमला कर दिया, जिससे कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
घटना के विवरण के अनुसार, संमति माझी शनिवार दोपहर को कोर्ट आई थी और उसने न्यायिक मजिस्ट्रेट स्मिता लकरा से मिलने का आग्रह किया था। हालांकि, कोर्ट के कर्मचारियों ने उसे पहले APP प्रदीप पटनायक के पास जाने का सुझाव दिया। इस सुझाव से महिला नाराज हो गई और उसने अचानक अपने बैग से लोहे की रॉड निकालकर पटनायक पर हमला कर दिया। यह हमला इतना अचानक था कि वहां मौजूद लोगों को प्रतिक्रिया देने का समय भी नहीं मिला।
जब मजिस्ट्रेट स्मिता लकरा ने APP को बचाने के लिए बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो महिला ने उन पर भी हमला कर दिया। इसके बाद कोर्ट के सुरक्षाकर्मी मिंकेतन गंतायत आरोपी को रोकने के लिए दौड़े, लेकिन महिला ने रॉड से उन पर भी हमला कर उन्हें घायल कर दिया। इस हमले में प्रदीप पटनायक गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया। मजिस्ट्रेट और सुरक्षाकर्मी भी चोटिल हुए हैं।
इस घटना के बारे में बात करते हुए अभियोजक पटनायक ने बताया कि वे अपना काम पूरा कर अपने चैंबर में बैठे थे, तभी माझी उनके पास आई और पास में ही बैठ गई। वह कुछ बात करने की कोशिश कर रही थी, उसी दौरान पटनायक को एक फोन आया और वे बातचीत में व्यस्त हो गए। पटनायक ने आरोप लगाया कि महिला अचानक गुस्से में आ गई, उसने लोहे की रॉड उठाई और उनके सिर पर प्रहार किया और फिर भागने की कोशिश की। सुरक्षाकर्मी ने उसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन इस प्रक्रिया में वे भी घायल हो गए।
पटनायक ने आगे बताया कि यह महिला एक घरेलू विवाद में शामिल थी और वैवाहिक प्रताड़ना से संबंधित मामला उसी अदालत में लंबित था। पटनायक के अनुसार, महिला 10 से 15 दिन पहले उनके पास आई थी और कहा था कि उसके छोटे बच्चे हैं और उसे आर्थिक सहायता की आवश्यकता है। उन्होंने उसे आश्वासन दिया था कि स्थिति के अनुसार वे यथासंभव मदद करेंगे। पटनायक ने यह दावा भी किया कि माझी के पति ने आर्थिक सहायता देने में अनिच्छा जताई थी और कहा था कि आर्थिक मांग पूरी करने के बजाय वे जेल जाना पसंद करेंगे।
प्राथमिक जानकारी संकेत देती है कि संमति माझी झारीगाम कोर्ट में दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से संबंधित मामले में कार्यवाही का सामना कर रही थी। हमले के कुछ दिन पहले ही इस मामले में उसकी गवाही पूरी हुई थी।
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