वांसदा के भिनार गांव में तेंदुए ने तीन साल के बच्चे को उठाकर मारा
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी दहशत फैली, वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए पांच टीमें बनाई हैं
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 4:09 · अपडेट दोपहर 1:16 · 5 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
नवसारी जिले के वांसदा के पास स्थित भिनार गांव में एक हृदयविदारक घटना घटी है, जिसमें एक तेंदुए ने तीन साल के बच्चे को उठा लिया। इस घटना में बच्चे की मृत्यु हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी भय और चिंता का माहौल है।
बीबीसी गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, यह दुर्घटना दशरथभाई पटेल के परिवार के साथ हुई। उनकी बेटी अपने तीन साल के बेटे आरव को लेकर पिता के घर आई थी। एक शाम करीब साढ़े सात बजे, जब अंधेरा हो गया था, तब बच्चा शौच के लिए बैठा था। उसी समय माता का ध्यान कुछ क्षणों के लिए भटका और पलक झपकते ही जंगल से आए तेंदुए ने बच्चे को उठा लिया।
घटना के समय आरव के भाई-बहनों ने शोर मचाया और गांव वालों ने भी चिल्लाकर तेंदुए को भगाने का प्रयास किया। सूचना मिलते ही वन विभाग के कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचे और बच्चे की तलाश शुरू की। कुछ समय बाद घर से थोड़ी दूर एक खेत से बच्चा गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
दशरथभाई पटेल खेती और पशुपालन करते हैं और छप्पर वाले मकान में रहते हैं। उनके घर की दीवारें पक्की हैं लेकिन दरवाजों की जगह पर्दे बंधे हैं। उन्होंने बताया कि रात में लाइट चालू होने के बावजूद आंगन में अंधेरा होने के कारण डर रहता है कि तेंदुआ कभी भी आ सकता है। इस घटना के बाद वे अत्यंत भयभीत हैं और कहते हैं कि शाम को कोई चीज लेने बाहर निकलना हो तो भी दो बार सोचना पड़ता है। इतना ही नहीं, शाम के समय मदद मांगने पर कोई आने को तैयार नहीं होता और उन्हें यह चिंता भी सताती है कि तेंदुआ उनके मवेशियों को उठा ले जाएगा।
भिनार गांव हरियाली से घिरा हुआ है और इसके चारों ओर जंगल तथा गन्ने के खेत हैं। दशरथभाई ने आगे बताया कि पास के एक गांव में भी तेंदुए ने एक युवक पर हमला किया था, हालांकि वह भाग्यवश बच गया था। इस घटना के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में पिंजरे लगाए थे, जिसमें एक तेंदुआ पकड़ा गया है। हालांकि, ग्रामीणों में अब भी डर है क्योंकि उनकी मान्यता है कि पास में ही बच्चों के साथ एक मादा तेंदुआ अब भी रह रही है जो पकड़ी नहीं गई है।
वन विभाग के सहायक संरक्षक भगीरथसिंह झाला ने मीडिया को बताया कि हमले की सूचना मिलते ही रेंज वन अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा कार्रवाई शुरू की गई थी। तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग द्वारा कुल पांच टीमें बनाई गई थीं।
दूसरी ओर, वांसदा के पास गन्ने के खेत में काम करने वाले राकेश कुलछा ने बताया कि तेंदुए अक्सर उनके घर के पास आ जाते हैं और रात में खेत में उनका सामना हुआ है। राकेश के अनुसार, तेंदुआ बहुत खूंखार होता है और उसे देखते ही डर लगता है। इस कारण वे शाम को काम पर अकेले जाने के बजाय किसी को साथ रखकर ही जाते हैं। उन्होंने जोड़ा कि तेंदुए मोर और खरगोशों का भी शिकार करते हैं।
हालांकि, कुछ किसान इस स्थिति को अलग नजरिए से देखते हैं। ऊनाई गांव के किसान मनीष भावसारे ने बताया कि वे चाहते हैं कि तेंदुए क्षेत्र में रहें, क्योंकि वे फसल को नुकसान पहुंचाने वाले जानवरों को नियंत्रित करते हैं। उनके अनुसार, क्षेत्र में जंगली सूअरों का आतंक है और तेंदुए के कारण सूअरों की संख्या नियंत्रण में रहती है, जिससे फसल चोरी होने का डर नहीं रहता। मनीष के अनुसार, यहां के लोग तेंदुए के साथ सह-जीवन जीने के आदी हो गए हैं और इंसानों पर हमले की घटनाएं बहुत कम होती हैं। गन्ने के खेतों में काम करने वाले मजदूर भी तेंदुए की मौजूदगी से वाकिफ होते हैं और सावधानी बरतते हैं। वे शाम 7 से 9 बजे के बीच जोखिम भरी जगहों पर जाने से बचते हैं। वांसदा के पास गन्ने की फसल में नियमित रूप से पानी दिया जाता है, इसलिए कई दिनों तक इंसानों को खेत में जाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे तेंदुए को एकांत और शिकार मिल जाता है।
बीबीसी ने इस मामले में डांग (दक्षिण) के डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
वांसदा में स्थित वन्यजीव शोधकर्ता और प्राणीशास्त्री डॉ. मोहम्मद नवाज पिछले 10 वर्षों से तेंदुए पर शोध कर रहे हैं। उनके अनुसार, तेंदुए को केवल एक खूंखार और आक्रामक जानवर समझ लेना वास्तविकता नहीं है।
नवसारी जिले का वांसदा क्षेत्र तेंदुओं के निवास के लिए बहुत अनुकूल है। यहां गन्ने के खेत उन्हें छिपने के लिए सुरक्षित जगह प्रदान करते हैं, जबकि भोजन के लिए मुर्गियां, बकरियां, कुत्ते और विशेष रूप से जंगली सूअर आसानी से मिल जाते हैं। सामान्य तौर पर तेंदुओं द्वारा इंसानों को मारने की घटनाएं कम होती हैं, लेकिन शाम के समय हमला कर चोट पहुंचाने की घटनाएं दर्ज की जाती रहती हैं।
ડીસા પોલીસે લૂંટાયેલા ૨૭.૪૪ લાખના ચાંદીના દાગીના શોધી માલિકને પરત કર્યા
બનાસકાંઠા LCBએ ચાર આરોપીઓની ધરપકડ કરી લૂંટમાં વપરાયેલી અલ્ટ્રોઝ કાર જપ્ત કરી
અમદાવાદમાં રામાયણ ફિલ્મની ટિકિટના ભાવ ₹૨,૬૦૦ સુધી પહોંચ્યા
પીવીઆર પેલેડિયમ મોલના પ્રીમિયમ આઈમેક્સ ૩ડી શોમાં ટિકિટોના ભાવમાં મોટો ઉછાળો આવ્યો છે
पंडोली गांव के तालाब में मछलियों को चारा डालने गए दो व्यक्ति डूबे
पेटलाद तालुका के इस क्षेत्र में फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीम द्वारा खोजबीन शुरू