कानपुर में बंद सरकारी अस्पताल के गेट पर डॉक्टर ने शुरू की निःशुल्क ओपीडी
दो साल से बंद पड़े 100 बेड के अस्पताल की ओर प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए डॉक्टर ने उठाया अनोखा कदम
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, रात 8:53 · 5 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
उत्तर प्रदेश के कानपुर में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ अपना अनोखा विरोध जताने के लिए एक डॉक्टर ने बंद पड़े अस्पताल के दरवाजे के बाहर ही मरीजों का इलाज शुरू कर दिया है। भाजपा मुख्यालय के पास स्थित 100 बेड के इस आलीशान अस्पताल की इमारत पिछले 2 साल से तैयार होने के बावजूद बंद पड़ी है। अस्पताल के दरवाजों पर ताले लटके हैं और वहां डॉक्टरों तथा अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति न होने के कारण आम मरीज इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। इस स्थिति से नाराज होकर कानपुर मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस डॉक्टर शशिकांत मिश्रा ने अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर ही अपनी निःशुल्क ओपीडी शुरू कर दी है।
आज तक न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टर शशिकांत मिश्रा अपने कंपाउंडर और मेडिकल ऑपरेटर के साथ मिलकर सड़क पर ही मरीजों की जांच कर रहे हैं। उन्होंने वहां दवाओं का स्टॉक भी रखा है और आने वाले मरीजों को मुफ्त दवाएं दे रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया के लिए वे किसी भी प्रकार की फीस या शुल्क नहीं ले रहे हैं। डॉक्टर ने स्पष्ट किया है कि जब तक यह सरकारी अस्पताल चालू नहीं होगा और इसके दरवाजे मरीजों के लिए नहीं खुलेंगे, तब तक वे इसी तरह सड़क पर बैठकर मरीजों की सेवा करना जारी रखेंगे।
डॉक्टर ने अस्पताल के गेट पर एक बैनर भी लगाया है। वे 'नर सेवा नारायण सेवा' नामक सामाजिक संस्था से जुड़े हैं। उनका मुख्य उद्देश्य इस कदम के जरिए प्रशासनिक तंत्र और सरकार का ध्यान इस बंद पड़े अस्पताल की ओर खींचना है। गुरुवार से शुरू हुई यह ओपीडी शुक्रवार को भी जारी रही, लेकिन इस दौरान स्थानीय पुलिस वहां पहुंच गई और डॉक्टर को वहां से हटाने की कोशिश की।
इस अस्पताल के इतिहास की बात करें तो, कानपुर के दक्षिणी क्षेत्र में भाजपा मुख्यालय के पास की जमीन को सरकार ने खाली कराकर वहां 100 बेड का अस्पताल बनाने की मंजूरी दी थी। इस अस्पताल की भव्य इमारत लगभग 2 साल पहले पूरी तरह तैयार हो गई थी। लेकिन दुर्भाग्यवश, इमारत तैयार होने के बाद भी वहां डॉक्टरों और अन्य जरूरी स्टाफ की पोस्टिंग नहीं की गई। जिसके कारण पूरी इमारत तैयार होने के बावजूद अस्पताल में इलाज शुरू नहीं हो सका।
यदि यह अस्पताल शुरू हो गया होता, तो दक्षिण कानपुर के लाखों लोगों को बड़ा फायदा होता। वर्तमान में इस क्षेत्र के मरीजों को इलाज के लिए कई किलोमीटर दूर स्थित मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। स्थानीय निवासियों और अन्य डॉक्टरों ने इस अस्पताल को शुरू कराने के लिए प्रशासन को कई बार पत्र लिखे हैं। भाजपा मुख्यालय के पास होने के कारण यहां आने वाले कई नेताओं से भी लोगों ने अस्पताल शुरू करने की अपील की थी। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर कई बार प्रदर्शन किए, फिर भी अस्पताल शुरू नहीं हो सका। इसी समस्या के कारण डॉक्टर शशिकांत मिश्रा ने प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए बंद गेट पर ओपीडी शुरू करने का निर्णय लिया।
एमबीबीएस डॉक्टर शशिकांत मिश्रा ने बताया कि यह कोई सामान्य विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि प्रशासन का ध्यान खींचने का एक तरीका है। उन्होंने आगे कहा कि वे इससे पहले भी कई अधिकारियों से मिल चुके हैं और कई बार लिखित में शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अस्पताल बंद होने के कारण लाखों लोग मुश्किल महसूस कर रहे हैं, इसलिए उन्होंने सड़क किनारे मुफ्त ओपीडी लगाने का फैसला किया। उन्हें उम्मीद है कि इस कदम से उनकी बात प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक पहुंचेगी और अस्पताल जल्द शुरू होगा।
शुक्रवार सुबह जब डॉक्टर ने फिर से ओपीडी शुरू की, तो स्थानीय पुलिस के दरोगा और सिपाही घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने डॉक्टर को वहां से हटने को कहा और गेट पर लगाया उनका बैनर भी हटा दिया। पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहां से ओपीडी चलाने की सख्त हिदायत दी। इस बीच, घटना की जानकारी मिलते ही कांग्रेस के विधानसभा प्रभारी विकास अवस्थी भी वहां पहुंचे। उन्होंने डॉक्टर शशिकांत मिश्रा के समर्थन में आवाज उठाई और पुलिस की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया।
डॉक्टर शशिकांत मिश्रा कानपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर के रूप में सेवा दी। इसके बाद वे सेवानिवृत्त हुए और वर्तमान में उनका अपना प्राइवेट क्लिनिक भी चलता है।
લેફ્ટનન્ટ જનરલ સુશીલ ચંદ્ર મહંતે ઇન્ટિગ્રેટેડ ટ્રેનિંગના ડાયરેક્ટર જનરલ તરીકે and ચાર્જ સંભાળ્યો
હિમાચલ પ્રદેશના સૈનિક સ્કૂલ સુજનપુર તિરાના પ્રથમ લેફ્ટનન્ટ જનરલ ભૂતપૂર્વ વિદ્યાર્થીએ નવી દિલ્હીમાં પદભાર સંભાળ્યો
સોનાના વધતા ભાવને કારણે ધનતેરસના બજારમાં માંગમાં ફેરફાર જોવા મળ્યો
સોનાના ઊંચા ભાવને લીધે લોકો હવે ચાંદી અને ગોલ્ડ કોઈન તરફ વળ્યા છે
APPSC परीक्षा घोटाले में ED ने हैदराबाद में सात स्थानों पर छापेमारी की
एक निजी कंपनी को ₹1,14,32,312 के भुगतान के घोटाले की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय ने तलाशी अभियान चलाया