CAA के तहत पात्र आवेदकों को 31 दिसंबर तक मिलेगी नागरिकता: सुवेंदु अधिकारी
नादिया और उत्तर 24 परगना जिलों में लगभग 2.5 लाख आवेदन लंबित होने का दावा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 10:27 · अपडेट दोपहर 3:29 · 3 मिनट का पाठ
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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने वादा किया है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत सभी पात्र आवेदकों को नागरिकता देने की प्रक्रिया 31 दिसंबर तक पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने शुक्रवार को नादिया जिले के अरंघाटा में काली पूजा पंडाल का उद्घाटन करते समय यह घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नादिया और उसके बगल के उत्तर 24 परगना जिले में लगभग 2.5 लाख आवेदन लंबित हैं। ये दोनों सीमावर्ती जिले हैं जहाँ बांग्लादेश से पलायन कर आए लोगों की महत्वपूर्ण आबादी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार इस कानून के कार्यान्वयन में विफल रही थी, जिसके कारण हजारों आवेदन लंबित रह गए थे।
सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि, "CAA के तहत सभी पात्र आवेदनों का निपटारा 31 दिसंबर तक किया जाएगा। कोई भी पात्र आवेदक शेष नहीं रहेगा और निर्धारित समय सीमा के भीतर नागरिकता प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।" उन्होंने आगे कहा कि उनकी सरकार ने इस प्रक्रिया को तेज करने की जिम्मेदारी ली है और लंबित आवेदनों को क्लियर करने के लिए प्रशासनिक कदम शुरू किए हैं।
इस प्रक्रिया के कार्यान्वयन की व्यवस्था के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेटों ने गृह विभाग से प्रशिक्षण लिया है। जबकि उप-मंडल अधिकारी (SDOs) आवेदनों के सत्यापन की निगरानी करेंगे और समय पर निपटान सुनिश्चित करने के लिए सुनवाई करेंगे।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नादिया और उत्तर 24 परगना में इस मुद्दे का बड़ा राजनीतिक महत्व है, विशेष रूप से मतुआ समुदाय में, जिनके सदस्य बांग्लादेश से पलायन करने के बाद लंबे समय से कानूनी नागरिकता की मांग कर रहे हैं।
इस अवसर पर अधिकारी ने पिछली सरकार पर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में बाधा डालने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने विशेष रूप से दुर्गा पूजा उत्सव और विसर्जन जुलूसों की अनुमति पर प्रतिबंध लगाकर मुश्किलें पैदा की थीं।
इसके अलावा, उन्होंने एक नई घोषणा की कि राज्य सरकार अगले 2 वर्षों में 'तीर्थक्षेत्र सर्किट' नामक प्रस्तावित पहल के तहत पुराने मठों और मंदिरों के नवीनीकरण और जीर्णोद्धार के लिए ₹1,000 करोड़ खर्च करेगी। इस परियोजना में ट्रस्टों, 'देबोत्तर' संस्थानों और सार्वजनिक संस्थानों द्वारा संचालित धार्मिक संस्थानों को शामिल किया जाएगा, जबकि निजी स्वामित्व वाले संस्थानों को इस योजना से बाहर रखा जाएगा।
संसद द्वारा दिसंबर 2019 में पारित नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का मार्ग प्रदान करता है, जो धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने के बाद 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए थे। केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में इस कानून के तहत नियम अधिसूचित किए थे, जिससे इसके पारित होने के चार साल बाद कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त हुआ।
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