लेबलिंग विवाद के बाद ओल्ड मंक ने कोर्ट से याचिका वापस ली
FSSAI की आपत्तियों के बाद कंपनी ने उत्पाद के लेबल सुधारने की सहमति दी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, शाम 7:11 · 3 मिनट का पाठ
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ओल्ड मंक ब्रांड के रम निर्माता मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर ब्रुअरीज प्राइवेट लिमिटेड ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका वापस ले ली है। कंपनी ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा लागू बिक्री प्रतिबंध को चुनौती देने के लिए यह कानूनी लड़ाई लड़ी थी, लेकिन अब कंपनी ने लेबल सुधारने के लिए सहमति जताई है। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद उत्पाद की लेबलिंग और विवरण से जुड़ा था।
FSSAI ने विशेष रूप से उन उत्पादों पर आपत्ति जताई थी जिनमें अतिरिक्त फ्लेवरिंग एजेंट मिलाए गए थे। नियामक संस्था ने निर्देश दिया था कि ऐसे उत्पादों को 'रम' के रूप में पहचानने के बजाय 'रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट' के रूप में लेबल किया जाना चाहिए और उनका विपणन भी उसी तरह किया जाना चाहिए। इसके अलावा, FSSAI ने उत्पाद की पैकेजिंग पर लिखे "7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड" (7 वर्ष पुराना ब्लेंडेड) और "वेरी ओल्ड वेटेड" (बहुत पुराना वेटेड) जैसे विवरणों पर भी गंभीर सवाल उठाए थे।
इस विवाद के परिणामस्वरूप, नियामक संस्था ने कंपनी के खोपोली प्लांट में उत्पादित होने वाले ओल्ड मंक के कई उत्पादों की बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया था। कंपनी ने पहले अदालत में तर्क दिया था कि इस बिक्री प्रतिबंध के कारण महाराष्ट्र सरकार को उत्पाद शुल्क राजस्व में ₹ 350 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश महेशचंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठानी की पीठ को कंपनी द्वारा सूचित किया गया कि वे उत्पाद के लेबल में सुधार करेंगे। कंपनी ने आश्वासन दिया कि संशोधित लेबल के नमूने मंजूरी के लिए FSSAI को सौंपे जाएंगे। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने नियामक संस्था के आदेश के खिलाफ अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया, तो कंपनी ने मामले को मेरिट पर आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया और अपनी याचिका वापस ले ली। इसके बाद अदालत ने इस मामले का निपटारा कर दिया।
इस पूरे विवाद का मुख्य मुद्दा ओल्ड मंक के कुछ वेरिएंट्स के वर्गीकरण और लेबलिंग का था। FSSAI का स्पष्ट मत था कि जिन उत्पादों में फ्लेवरिंग एजेंट हों उन्हें 'रम' कहना गलत है और उन्हें केवल 'रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट' के रूप में ही पहचाना जाना चाहिए। इसके साथ ही, उम्र से संबंधित दावों जैसे कि "7 वर्ष पुराना" होने के विवरण पर भी संस्था ने आपत्ति जताई थी।
कंपनी ने अब स्वीकार किया है कि वह नियमों का पालन करेगी और FSSAI के निर्देशों के अनुसार पैकेजिंग में बदलाव करेगी। खोपोली फैसिलिटी में बनने वाले उत्पादों पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए अब कंपनी ने लेबलिंग की प्रक्रिया को सुधारने की दिशा में कदम उठाए हैं। अदालत से अंतरिम राहत न मिलने पर कंपनी ने कानूनी रास्ता छोड़कर प्रशासनिक सुधार का मार्ग चुना है।
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