BCI ने लॉ कोर्स के लिए आयु सीमा हटाई, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया
3 वर्ष और 5 वर्ष के LLB कोर्स में अब उम्र का कोई बंधन नहीं रहेगा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, शाम 5:28 · अपडेट शाम 5:37 · 2 मिनट का पाठ
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने कानून के पाठ्यक्रमों के लिए निर्धारित आयु सीमा को वापस ले लिया है। इस निर्णय के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आयु सीमा के प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा कर दिया है। इस महत्वपूर्ण निर्णय से अब 3 वर्ष और 5 वर्ष के LLB कोर्स में प्रवेश पाने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं रहेगी।
द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहनन की पीठ ने BCI के इस निर्णय का संज्ञान लिया और उसके बाद संबंधित याचिका का निपटारा किया। यह मामला ऋषभ दुग्गल द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा था। दुग्गल ने BCI के 2016 के एक परिपत्र को चुनौती दी थी, जिसमें 'रूल्स ऑफ लीगल एजुकेशन, 2008' की अनुसूची III की धारा 28 को बहाल किया गया था।
उल्लेखनीय है कि BCI ने पहले 5 वर्ष के LLB कोर्स के लिए 22 वर्ष और 3 वर्ष के कोर्स के लिए 45 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा तय की थी। इस नियम के खिलाफ कानूनी लड़ाई लंबे समय से चल रही थी। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2017 में ही BCI के इस निर्णय पर रोक लगा दी थी, जिससे आयु सीमा के कार्यान्वयन पर रोक लग गई थी।
अब BCI द्वारा आधिकारिक तौर पर इस आयु सीमा को हटा दिए जाने से कानूनी शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक सभी व्यक्तियों के लिए द्वार खुल गए हैं। कोर्ट ने BCI के इस सुधारात्मक कदम को स्वीकार करते हुए केस बंद कर दिया है, जिससे अब कोई भी व्यक्ति अपनी उम्र की परवाह किए बिना कानून की पढ़ाई कर सकेगा। इस निर्णय से विशेष रूप से उन उम्मीदवारों को राहत मिली है जो अधिक उम्र में कानून के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते थे।
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