लोधिका संघ के ₹300 करोड़ के फंड के लिए भाजपा के दो गुटों में खींचतान
दो महीने से चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का चुनाव अधर में
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 11:08 · 3 मिनट का पाठ
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राजकोट लोधिका खरीद-बिक्री संघ में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनाव की प्रक्रिया पिछले दो महीनों से रुकी हुई है। एबीपी अस्मिता की रिपोर्ट के अनुसार, संघ के पास मौजूद लगभग ₹300 करोड़ के भारी-भरकम फंड और उसके प्रशासन पर कब्जा जमाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के दो प्रभावशाली गुटों के बीच आर-पार की लड़ाई देखने को मिल रही है। इस आंतरिक गुटबाजी के कारण चुनाव के दो महीने बीत जाने के बावजूद पदों का चयन नहीं हो सका है।
संघ के निदेशकों का चुनाव पूरा हो जाने के बावजूद, अब मुख्य पदों की नियुक्ति के लिए भाजपा के आंतरिक गुटों के बीच खींचतान चल रही है। इस विवाद में मुख्य रूप से जयेश राडिया का गुट और भाजपा का संगठन गुट आपस में भिड़े हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सहकारी नेता जयेश राडिया के गुट के पास 10 से 11 निदेशकों की मजबूत संख्या है। इस संख्या बल के आधार पर वे चेयरमैन पद के लिए नितिन ढांकेचा और संजय अमरेलिया के नाम आगे कर रहे हैं।
दूसरी ओर, भाजपा का संगठन गुट भी इस मामले में झुकने को तैयार नहीं है। संगठन गुट अपनी पकड़ मजबूत करने और संघ के प्रशासन पर वर्चस्व जमाने के लिए बाबूभाई नसीत का नाम चर्चा में ला रहा है। इन दोनों गुटों के बीच मतभेद और सत्ता के संघर्ष के कारण चयन प्रक्रिया लंबी खिंच रही है। विशेष रूप से जब सांसद परसोत्तम रूपाला ने इस फंड को लेकर टिप्पणी की, तो इस पूरे विवाद ने और जोर पकड़ लिया है।
संगठन गुट और राडिया गुट के बीच यह खींचतान इतनी तीव्र है कि दिवाली के बाद भी चुनाव होने की संभावना नगण्य दिख रही है। सहकारी क्षेत्र में इस घटनाक्रम के कारण राजनीति अत्यधिक गरमा गई है। संघ के प्रशासन और ₹300 करोड़ के फंड पर किसका नियंत्रण रहेगा, इस विवाद ने पार्टी के आंतरिक समीकरणों को प्रभावित किया है।
इस आंतरिक विवाद और गुटबाजी के कारण सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल खड़े हो गए हैं। एबीपी अस्मिता के अनुसार, इस प्रकार की खींचतान का भारतीय जनता पार्टी की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। आने वाले समय में यह विवाद स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि सहकारी संस्थाओं में पार्टी के गुटों के बीच का संघर्ष खुलेआम सामने आ गया है।
राजकोट लोधिका संघ में निदेशकों का चुनाव हो जाने के बावजूद, चेयरमैन और वाइस चेयरमैन जैसे महत्वपूर्ण पद खाली होने के कारण प्रशासन में अनिश्चितता का माहौल है। ₹300 करोड़ के फंड का प्रबंधन किसके हाथ में रहेगा, इस विवाद ने भाजपा के स्थानीय नेताओं को दो भागों में बांट दिया है। एक ओर संख्या बल वाला राडिया गुट है, तो दूसरी ओर संगठन का समर्थन प्राप्त गुट है, जो दोनों अपनी जिद पर अड़े हैं।
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