मोहम्मद शमी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास पर रवि शास्त्री ने चयनकर्ताओं की आलोचना की
शास्त्री ने कहा कि अनुभवी तेज गेंदबाज को एक और मौका मिलना चाहिए था
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 11:56 · 4 मिनट का पाठ
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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री ने तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी द्वारा टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा के बाद चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शास्त्री ने व्यक्त किया कि शमी जैसे अनुभवी खिलाड़ी को टेस्ट टीम में एक बार फिर मौका मिलना चाहिए था। रवि शास्त्री ने कहा कि शमी में अभी भी 30-40 विकेट लेने की क्षमता थी, लेकिन उन्हें मैदान पर अपना कौशल साबित करने का अवसर नहीं दिया गया।
न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे मैच से पहले 'एक्स्ट्रा इनिंग्स' कार्यक्रम के दौरान रवि शास्त्री ने अपनी निराशा व्यक्त की। आजतक के अनुसार, शास्त्री ने कहा, "देश के लिए इतना अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी की इस तरह विदाई होना दुखद है। मुझे लगता था कि उनमें अभी 30-40 विकेट लेने की क्षमता थी। उन्हें पिछले 12 महीनों में खेलना चाहिए था और शायद टेस्ट टीम में भी उन्हें जगह मिलनी चाहिए थी।"
मोहम्मद शमी की फिटनेस और चयन को लेकर मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के बयान से पहले चर्चा हुई थी। 2025 में इंग्लैंड दौरे के लिए शमी के चयन न होने पर अगरकर ने बताया था कि पांच टेस्ट की चुनौतीपूर्ण श्रृंखला के हिसाब से शमी का वर्कलोड पर्याप्त नहीं था। इसके अलावा, मेडिकल टीम ने भी उन्हें चयन न करने की सलाह दी थी।
अजीत अगरकर के इस तर्क का जवाब देते हुए रवि शास्त्री ने फिटनेस के मानदंडों पर सवाल उठाए। शास्त्री ने कहा कि यदि कोई खिलाड़ी जिम में फिट है लेकिन मैच के दौरान 10 या 12 ओवर नहीं फेंक सकता, तो ऐसी फिटनेस का कोई फायदा नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब आपके पास ऐसा गेंदबाज हो जो लगातार ओवर फेंक रहा हो, तो उसे मौका न देना निराशाजनक है। शास्त्री ने सवाल किया, "शमी को और क्या साबित करना था?"
मोहम्मद शमी की फिटनेस के प्रमाण के रूप में रवि शास्त्री ने उनके घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन का उल्लेख किया। भारतीय टीम से बाहर रहने के दौरान शमी ने बंगाल के लिए घरेलू क्रिकेट में लगातार भाग लिया। दलीप ट्रॉफी 2026-27 में ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए शमी ने तीन मैचों में 7 विकेट झटके और अपनी टीम को खिताब जिताने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इसके अलावा, 2026-27 रणजी ट्रॉफी सीजन के शुरुआती तीन मैचों में शमी ने शानदार प्रदर्शन किया। इन तीन मैचों में उन्होंने 14 विकेट झटके और उनका औसत 14 रहा। उन्होंने दिल्ली के खिलाफ 59 रन देकर 5 विकेट और महाराष्ट्र के खिलाफ 37 रन देकर 4 विकेट लिए। रवि शास्त्री ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि शमी बंगाल के लिए हर मैच खेल रहे थे और 15-20 ओवर गेंदबाजी कर रहे थे। शास्त्री के अनुसार, किसी खिलाड़ी की मैच फिटनेस जांचने के लिए इससे बेहतर मानदंड और क्या हो सकता है?
यदि शमी की चोटों की बात करें, तो 2023 क्रिकेट वर्ल्ड कप के बाद उन्हें लगातार चोटों का सामना करना पड़ा। फरवरी 2024 में उनकी टखने की सर्जरी की गई थी और उसके बाद घुटने की समस्या ने भी उन्हें परेशान किया। इन कारणों से वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला से बाहर रहे।
हालांकि, टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी मोहम्मद शमी का क्रिकेट करियर समाप्त नहीं हुआ है। वह वनडे और टी20 क्रिकेट खेलना जारी रखना चाहते हैं। शमी का लक्ष्य 2027 क्रिकेट वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में अपना स्थान पक्का करना है।
भारत के लिए मोहम्मद शमी का आखिरी मैच चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का फाइनल था। इस टूर्नामेंट में उन्होंने पांच मैचों में कुल 9 विकेट झटके। वह वरुण चक्रवर्ती के साथ इस टूर्नामेंट में भारत के सबसे सफल गेंदबाज रहे।
रवि शास्त्री इससे पहले भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के रूप में कार्यरत थे, जिनके कार्यकाल के दौरान भारत ने टेस्ट क्रिकेट में उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी।
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