चीनी चिपमेकर Iluvatar CoreX की नई चुनौती: क्या Tiangai 300 वास्तव में Nvidia H200 को मात देगा?
चीन की सेमीकंडक्टर कंपनी Iluvatar CoreX ने अपने नए Tiangai 300 GPU की घोषणा की है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में Nvidia के वर्चस्व को चुनौती देने की क्षमता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक दौड़ में यदि इस समय कोई सबसे महत्वपूर्ण हथियार है, तो वह ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट या GPU है। अब तक इस क्षेत्र में अमेरिकी कंपनी Nvidia का एकाधिकार रहा है, लेकिन अब चीन की ओर से एक बड़ी चुनौती खड़ी हुई है। चीनी चिपमेकर Iluvatar CoreX ने हाल ही में अपने नए Tiangai 300 GPU की घोषणा की है। कंपनी का दावा है कि यह नई चिप वास्तविक दुनिया के AI कार्यों में Nvidia के सबसे शक्तिशाली प्रोसेसरों में से एक H200 की बराबरी कर सकती है और कुछ मामलों में उसे पीछे भी छोड़ सकती है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब चीन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है।
Iluvatar CoreX, जिसका चीनी नाम तियानशु झिज़िन (Tianshu Zhixin) है, शंघाई स्थित एक अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनी है। यह कंपनी विशेष रूप से AI के क्षेत्र में उपयोग किए जाने वाले जनरल-पर्पज कंप्यूटिंग ऑन ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPGPUs) विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करती है। GPGPU एक ऐसी तकनीक है जो पारंपरिक रूप से केवल ग्राफिक्स के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रोसेसर का उपयोग वैज्ञानिक गणनाओं और AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए करती है। Iluvatar CoreX की तुलना अक्सर Nvidia के साथ की जाती है क्योंकि दोनों कंपनियों का लक्ष्य समान है: दुनिया के सबसे तेज़ और कुशल AI प्रोसेसर बनाना।
Iluvatar CoreX: चीन का उभरता टेक सितारा
Iluvatar CoreX की स्थापना 2015 के अंत में ली युनपेंग (Li Yunpeng) द्वारा की गई थी। ली युनपेंग के पास प्रौद्योगिकी क्षेत्र का व्यापक अनुभव है, उन्होंने पहले ओरेकल कॉर्पोरेशन (Oracle Corporation) में 10 वर्षों तक सेवा दी थी। कंपनी की प्रगति में चीनी सरकार और बड़े निवेशकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सेंचुरियम कैपिटल और होंगशान जैसे बड़े निवेशकों ने इस कंपनी में पूंजी निवेश किया है। इसके अलावा, शंघाई सुपर कंप्यूटर सेंटर जैसी सरकारी संस्थाओं के साथ इसकी साझेदारी इसे अन्य निजी कंपनियों से अलग बनाती है। 2024 में, Iluvatar CoreX ने 1 अरब डॉलर से अधिक का मूल्य प्राप्त करके 'यूनिकॉर्न' (unicorn) स्टेटस हासिल किया था। इसकी सफलता का शिखर तब आया जब 8 जनवरी, 2026 को कंपनी ने हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज पर अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) पेश किया और यह एक लिस्टेड कंपनी बन गई।
| उत्पाद श्रेणी | लॉन्च तारीख | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| TianGai-100 | जनवरी 2021 | AI ट्रेनिंग (Training) |
| Zhikai-100 | मई 2022 | AI इन्फरेंस (Inference) |
TB/s
कंपनी का उत्पादन इतिहास भी प्रभावशाली रहा है। जनवरी 2021 में, उन्होंने TianGai-100 श्रृंखला पेश की थी, जिसे 'बिग आइलैंड' के रूप में भी जाना जाता है। यह 7nm (नैनोमीटर) प्रक्रिया पर आधारित चीन का पहला घरेलू GPGPU था। उस समय इसकी तुलना Nvidia A100 और AMD Instinct MI100 के साथ की गई थी। इस चिप को विकसित करने में कंपनी को चार साल का समय लगा था और इसका उपयोग मुख्य रूप से क्लाउड कंप्यूटिंग में किया गया था। इसके बाद मई 2022 में, कंपनी ने Zhikai-100 श्रृंखला की डिज़ाइन पूरी की, जिसे विशेष रूप से AI इन्फरेंस (inference) यानी सीखे गए AI मॉडल का उपयोग करके निर्णय लेने की प्रक्रिया के लिए बनाया गया था।
Tiangai 300 और Nvidia H200 के बीच प्रतिस्पर्धा
Tiangai 300 की सबसे बड़ी खासियत इसकी Nvidia H200 के साथ तुलना है। Nvidia का H200 उसके प्रसिद्ध 'Hopper' आर्किटेक्चर पर आधारित है। Hopper आर्किटेक्चर का नाम कंप्यूटर वैज्ञानिक और यूएस नेवी की रियर एडमिरल ग्रेस हॉपर के नाम पर रखा गया है। Nvidia H100 और H200 चिप्स वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े डेटा सेंटरों में AI प्रशिक्षण के लिए उपयोग किए जाते हैं। H100 चिप में 80 अरब ट्रांजिस्टर (transistors) होते हैं, जो विद्युत प्रवाह को नियंत्रित करने वाले अत्यंत छोटे स्विच जैसे उपकरण हैं। ये चिप्स TSMC की N4 प्रक्रिया का उपयोग करके बनाए जाते हैं।
| उत्पाद श्रेणी | वर्ष | टेक्नोलॉजी | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|---|
| TianGai-100 (Big Island) | 2021 | 7nm | AI ट्रेनिंग और क्लाउड |
| Zhikai-100 | 2022 | 7nm | AI इन्फरेंस |
| Tiangai 300 | 2026 | अज्ञात | H200 को टक्कर देने के लिए |
Iluvatar CoreX का दावा है कि Tiangai 300 वास्तविक दुनिया के AI वर्कलोड में H200 की क्षमताओं का मुकाबला कर सकती है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की रिपोर्ट के अनुसार, यह नई चिप चीनी कंपनियों के लिए आशा की एक किरण है, जो अमेरिकी निर्यात प्रतिबंधों के कारण अत्याधुनिक Nvidia चिप्स प्राप्त करने में कठिनाई महसूस कर रही हैं। यदि Tiangai 300 वास्तव में H200 जैसा प्रदर्शन देती है, तो इसे चीन के लिए तकनीकी संप्रभुता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा।
टेक्नोलॉजी की गहराई: कैसे काम करते हैं ये प्रोसेसर?
आधुनिक AI प्रोसेसर की कार्यक्षमता को समझने के लिए इसकी आंतरिक संरचना को समझना आवश्यक है। Nvidia के Hopper आर्किटेक्चर में एक महत्वपूर्ण पहलू 'ट्रांसफॉर्मर इंजन' (transformer engine) है। ट्रांसफॉर्मर इंजन AI गणनाओं को तेज़ बनाने की एक पद्धति है। यह गणना की सटीकता को गतिशील रूप से कम करके (जैसे FP16 से FP8) प्रोसेसिंग की गति बढ़ाता है। जब AI मॉडल को प्रशिक्षित किया जा रहा होता है, तो हर गणना में अत्यंत उच्च सटीकता की आवश्यकता नहीं होती है। ट्रांसफॉर्मर इंजन यह तय करता है कि कब कम सटीकता से काम चलाया जा सकता है, जिससे बिजली की बचत होती है और काम जल्दी पूरा होता है।
- गणना का विश्लेषणAI मॉडल ट्रेनिंग के दौरान ट्रांसफॉर्मर इंजन प्रत्येक गणना की आवश्यकता की जांच करता है।
- सटीकता में बदलावजहां उच्च सटीकता की आवश्यकता नहीं है, वहां यह FP16 से FP8 जैसी कम सटीकता में डेटा को रूपांतरित करता है।
- गति और बचतइस प्रक्रिया से प्रोसेसिंग की गति बढ़ती है और बिजली की महत्वपूर्ण बचत होती है।
- डेटा इनपुटउच्च सटीकता वाले डेटा (जैसे FP16) को प्रोसेसिंग के लिए लिया जाता है।
- गतिशील विश्लेषणइंजन तय करता है कि गणना में कितनी सटीकता की वास्तव में आवश्यकता है।
- सटीकता में कमीआवश्यकतानुसार डेटा को कम सटीकता (FP8) में बदला जाता है ताकि गति बढ़े।
- गणना और आउटपुटतेज गणना करने के बाद परिणाम को फिर से आवश्यक फॉर्मेट में बदला जाता है।
इसके अलावा, Hopper आर्किटेक्चर में टेंसर मेमोरी एक्सीलरेटर (TMA) और डिस्ट्रीब्यूटेड शेयर्ड मेमोरी जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। TMA मेमोरी के विभिन्न स्तरों के बीच डेटा के आदान-प्रदान को अधिक तेज़ और कुशल बनाता है। इससे प्रोसेसर के विभिन्न भाग (स्ट्रीमिंग मल्टीप्रोसेसर) एक-दूसरे के साथ बेहतर तरीके से संवाद कर सकते हैं। Nvidia H100 में HBM3 मेमोरी का उपयोग होता है, जिसकी बैंडविड्थ 3 TB/s (टेराबाइट प्रति सेकंड) तक पहुँचती है। बैंडविड्थ का अर्थ है डेटा ट्रांसफर करने की क्षमता; जितनी अधिक बैंडविड्थ होगी, AI मॉडल उतनी ही तेज़ी से डेटा पर प्रक्रिया कर सकेगा।
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Tiangai 300 जैसी चीनी चिप्स भी इसी प्रकार की उच्च बैंडविड्थ मेमोरी और आर्किटेक्चरल सुधारों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं ताकि वे Nvidia के स्तर तक पहुँच सकें। Iluvatar CoreX ने अपनी चिप के सटीक आर्किटेक्चरल विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन उनके दावों के अनुसार यह H200 के प्रदर्शन को टक्कर देती है।
आँकड़ों और कीमत का खेल
Nvidia की H100 और H200 चिप्स की कीमत और माँग अत्यंत ऊँची है। 2024 के अनुमान के अनुसार, एक H100 GPU की कीमत $25,000 से $30,000 के बीच होती है, जबकि eBay जैसी साइटों पर इसकी कीमत $40,000 से भी अधिक हो जाती है। ओरेकल के लैरी एलिसन और एलन मस्क जैसे दिग्गजों ने भी स्वीकार किया है कि उन्हें Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग के सामने इन चिप्स के लिए 'गिड़गिड़ाना' पड़ा था। ये चिप्स इतनी कीमती हैं कि इन्हें डेटा सेंटरों तक पहुँचाने के लिए बख्तरबंद वाहनों (armored cars) का उपयोग किया जाता है।
दूसरी ओर, Iluvatar CoreX की पिछली चिप TianGai-100 को 230 मिलियन युआन (लगभग 32 मिलियन डॉलर) के ऑर्डर मिले थे। Tiangai 300 की कीमत अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं की गई है, लेकिन इसके Nvidia की तुलना में काफी सस्ती होने की संभावना है, जो इसे चीनी और संभवतः वैश्विक बाजार के लिए आकर्षक बनाएगी।
भू-राजनीति और निर्यात नियंत्रण
अमेरिका और चीन के बीच 'चिप वॉर' (chip war) ने इस पूरे घटनाक्रम को गति दी है। अमेरिका ने चीन को अत्याधुनिक AI चिप्स बेचने पर कड़े नियंत्रण लागू किए हैं। Nvidia ने चीनी बाजार के लिए विशेष रूप से H800 और बाद में H20 जैसी चिप्स बनाई थीं, जिनकी क्षमता मूल H100 से कम रखी गई थी ताकि वे अमेरिकी नियमों का पालन कर सकें। हालाँकि, 2026 की शुरुआत में ऐसी खबरें आईं कि चीनी सीमा शुल्क अधिकारियों ने H200 चिप्स की खेप को रोक दिया था, भले ही अमेरिका ने इसे मंजूरी दे दी थी। चीनी सरकार अपने स्थानीय उद्योगों को विदेशी चिप्स के बजाय घरेलू चिप्स का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
मई 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान भी यह मुद्दा चर्चा में रहा था। अमेरिका ने अलीबाबा, टेंसेंट और बाइटडांस जैसी 10 बड़ी चीनी कंपनियों को सीमित संख्या में H200 चिप्स खरीदने की छूट दी थी। लेकिन इस अनिश्चितता के बीच Iluvatar CoreX जैसी कंपनियों के लिए बड़ा मैदान खुला है। यदि वे स्थानीय स्तर पर H200 जैसी ही शक्तिशाली चिप उपलब्ध करा सकें, तो चीनी टेक कंपनियों को अमेरिकी मंजूरियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
भारत और आम लोगों के लिए इसका क्या अर्थ है?
AI चिप्स की यह प्रतिस्पर्धा केवल दो देशों के बीच की लड़ाई नहीं है, इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। जब अधिक कंपनियां शक्तिशाली GPU बनाती हैं, तो प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और कीमतों में कमी आ सकती है। भारत जैसे देशों के लिए, जहां AI स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ रही है, सस्ती और सुलभ AI हार्डवेयर तकनीक बहुत महत्वपूर्ण है। यदि चीनी चिप्स वैश्विक बाजार में उपलब्ध होती हैं, तो यह AI कंप्यूटिंग की लागत में कमी ला सकती है।
आम लोगों के लिए इसका अर्थ यह है कि भविष्य में AI सेवाएं (जैसे कि चैटबॉट्स, मेडिकल डायग्नोसिस, या सेल्फ-ड्राइविंग कार) अधिक तेज और सस्ती होंगी। हालांकि, इस तकनीक के पीछे इस्तेमाल होने वाली बिजली भी चिंता का एक विषय है। Nvidia H100 का पावर कंजम्पशन 700 वॉट है, जबकि GH200 मॉड्यूल 1000 वॉट तक बिजली खर्च करता है। इतनी बड़ी मात्रा में ऊर्जा का उपयोग पर्यावरण पर भी असर डालता है, इसलिए भविष्य में केवल गति ही नहीं, बल्कि ऊर्जा दक्षता (performance-per-watt) भी महत्वपूर्ण होगी।
Iluvatar CoreX की Tiangai 300 यह साबित करती है कि चीन अब केवल नकल करने वाला नहीं, बल्कि नवाचार लाने वाला देश बन रहा है। क्या यह चिप वास्तव में Nvidia के साम्राज्य को हिला पाएगी? यह तो समय ही बताएगा, लेकिन AI हार्डवेयर की दुनिया में अभी एक नई क्रांति की शुरुआत हो रही है, यह निश्चित है।

