पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सेना का आतंक: ड्रोन हमलों और गोलीबारी में ३ की मौत
रावकोट में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में १८ नागरिक घायल, इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 2:38 · अपडेट रात 9:01 · 3 मिनट का पाठ
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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थिति अत्यंत गंभीर बन गई है। पाकिस्तानी सेना द्वारा स्थानीय नागरिकों के घरों पर ड्रोन हमले किए जा रहे हैं और अंधाधुंध गोलीबारी की जा रही है। 'आज तक' के रिपोर्ट के अनुसार, इस हिंसक कार्रवाई में अभी तक ३ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि १८ लोग गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। यह घटना रावलकोट के उमर फारूक चौक क्षेत्र में हुई है। पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा आज सुबह ५ बजे से इस क्षेत्र में लगातार फायरिंग की जा रही है, जिसके कारण पूरे शहर में भय और अराजकता का माहौल छाया हुआ है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना जानबूझकर निहत्थे प्रदर्शनकारियों और आम नागरिकों के रिहायशी इलाकों को निशाना बना रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और वीडियो में रावलकोट के कई घरों में आग लगने की बात स्पष्ट दिखाई देती है। स्थानीय लोग घटनास्थल से मिले शार्पनेल (गोलियों के टुकड़े) दिखाकर पाकिस्तानी सेना के अत्याचार का प्रमाण दे रहे हैं। लोगों में इतना रोष और डर है कि वे कह रहे हैं कि पाकिस्तानी सेना ने जैसे उनके डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस हिंसा के चलते रावलकोट में सभी सरकारी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं, ताकि जानकारी बाहर न आ सके।
यह कोई छिटपुट घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का एक हिस्सा है। रिपोर्टों के अनुसार, जून २०२६ में विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से अब तक पाकिस्तानी सेना ने कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में १५३ से अधिक लोगों की हत्या की है। पीओके में चल रहा यह आंदोलन अब पाकिस्तान के साथ स्थानीय आबादी के संबंधों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। प्रदर्शनकारी केवल सस्ती बिजली और आटे जैसी बुनियादी जरूरतों की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे विधानसभा में उचित प्रतिनिधित्व, स्थानीय संसाधनों पर अपना अधिकार और प्रशासनिक स्वायत्तता की भी मांग कर रहे हैं। सेना के दमन के बावजूद लोग सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पाकिस्तान के प्रशासन के तहत का क्षेत्र है, जिसे भारत अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। इस क्षेत्र में लंबे समय से पाकिस्तानी शासन और सेना की नीतियों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर असंतोष देखा गया है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में प्रशासनिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर कई बार बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिसमें स्थानीय लोगों ने पाकिस्तानी सरकार की नीतियों की आलोचना की है। यह प्रदेश भौगोलिक और राजनीतिक रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का मुख्य केंद्र रहा है, जहां आए दिन मानवाधिकारों के उल्लंघन की रिपोर्टें सामने आती रहती हैं।
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