सरकारी योजनाओं से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और रोजगार में बड़ी सफलता
पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक सहायता से विद्यार्थियों का शैक्षणिक और व्यावसायिक सपना हुआ साकार
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, शाम 4:24 · 2 मिनट का पाठ
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पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे विद्यार्थियों को सरकारी योजनाओं द्वारा मिलने वाली मदद उनके करियर को नई दिशा दे रही है। ऐसे ही एक मामले में 36 वर्षीय रमेश कुमार (नाम बदला हुआ है) को वर्ष 2017 से 2022 के दौरान लगभग ₹12 लाख की आर्थिक सहायता मिली थी। इस राशि की मदद से उन्होंने एम.ए. और बी.एड. के बाद अपनी पी.एच.डी. पूर्ण की थी। आज वे एक सरकारी शिक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
दूसरी ओर, पीआईबी दिल्ली की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के रानीपेट जिले के 32 वर्षीय पवित्रन एस. (नाम बदला हुआ है) को भी इसी तरह मदद मिली है। अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप (एनएफएससी) योजना के तहत उन्हें ₹5 लाख की सहायता प्राप्त हुई है। मार्च 2023 से शुरू हुई इस सहायता में फैलोशिप की राशि, घर का किराया और आकस्मिक खर्च शामिल हैं। पवित्रन अपनी संस्था के पहले विद्यार्थी थे जिन्होंने इस योजना का लाभ लिया था। शुरुआत में उन्हें मेकर और चेकर आईडी जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में मुश्किल हुई थी, लेकिन अंततः यह सहायता उनके पी.एच.डी. के अध्ययन और परिवार की आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत मददगार साबित हुई है। वर्तमान में वे पूर्णकालिक नौकरी कर रहे हैं और अपनी व्यावसायिक सफलता का श्रेय इस योजना को देते हैं।
ये दोनों मामले दर्शाते हैं कि कैसे समय पर मिलने वाली आर्थिक सहायता विद्यार्थियों को आर्थिक अवरोधों को पार करने और उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाती है। ये योजनाएं केवल शिक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे विद्यार्थियों के आत्मविश्वास में वृद्धि करके उन्हें व्यावसायिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
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