बिहार के सरकारी स्कूलों में 2026-27 से कक्षा 1 और 2 में क्षेत्रीय भाषाएं आएंगी
मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, शाम 5:14 · 3 मिनट का पाठ
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बिहार सरकार ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 और 2 के छात्रों के लिए क्षेत्रीय भाषाओं को एक विषय के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के मार्गदर्शन में मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है।
पीटीआई (PTI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, छात्र अपनी पसंद के अनुसार छह क्षेत्रीय भाषाओं में से किसी भी एक भाषा का अध्ययन कर सकेंगे। इन विकल्पों में मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका, मगही, सुरजापुरी और अंगिका भाषाएं शामिल हैं। इस निर्णय से छोटे बच्चों को अपनी परिचित भाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुसार लिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि शुरुआत में कक्षा 1 और 2 में इन भाषाओं को शामिल किया जाएगा, लेकिन बाद में इस कार्यक्रम का विस्तार कक्षा 3 से 5 तक किया जाएगा। इसके लिए संबंधित क्षेत्रीय भाषाओं में कक्षा 3 से 5 के लिए पाठ्यपुस्तकें भी विकसित की जाएंगी।
इस योजना के कार्यान्वयन के लिए स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) को इन सभी भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। SCERT के निदेशक यतेन्द्र कुमार पाल ने बताया कि काउंसिल वर्तमान में सभी छह भाषाओं में कक्षा 1 और 2 के लिए पुस्तकें तैयार कर रही है। इन पुस्तकों के निर्माण के लिए शिक्षकों और भाषा विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है और उम्मीद है कि इन्हें आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू कर दिया जाएगा।
SCERT के लेक्चरर और पाठ्यपुस्तक विकास कार्यशालाओं के समन्वयक जैनेंद्र कुमार दोस्ते ने जानकारी दी कि काउंसिल द्वारा अब तक एक कार्यशाला का आयोजन किया जा चुका है। सामग्री को अंतिम रूप देने के लिए अभी दो और कार्यशालाएं आयोजित करने की योजना है।
उन्होंने आगे बताया कि राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023 और NEP 2020 की सिफारिशों के अनुसार, बच्चों को ऐसी भाषा में सीखने में मदद करने का उद्देश्य है जिससे वे परिचित हों। क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा प्राप्त करने से छोटे छात्रों के लिए विभिन्न विषयों की अवधारणाओं को समझना, कक्षा की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेना और स्कूल के वातावरण में आसानी से ढलना अधिक सरल हो जाएगा।
इस परियोजना से जुड़े शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस पहल से बच्चे अपनी स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, त्योहारों और दैनिक जीवन से जुड़े रहेंगे। इससे बचपन से ही उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। NEP 2020 की सिफारिश के अनुसार, शिक्षा के प्रारंभिक वर्षों में बच्चे की घरेलू भाषा, मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा के उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है, ताकि शिक्षा के परिणामों में सुधार किया जा सके और भारत की भाषाई विविधता को बनाए रखा जा सके।
NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से राज्य सरकार शिक्षा के स्तर में गुणवत्ता लाने और छात्रों को उनकी मूल भाषा से जोड़कर शिक्षा के प्रति अधिक आकर्षित करने का प्रयास कर रही है।
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