कावेरी नदी के पानी के लिए तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग की
तमिलनाडु सरकार का आरोप कि कर्नाटक ने 23 अक्टूबर से पानी नहीं छोड़ा है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, सुबह 11:54 · अपडेट दोपहर 12:00 · 5 मिनट का पाठ
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तमिलनाडु सरकार ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक तत्काल मौखिक प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति में तमिलनाडु ने कर्नाटक राज्य पर गंभीर आरोप लगाया है कि कर्नाटक ने 23 अक्टूबर से कावेरी नदी का पानी छोड़ना बंद कर दिया है। इस मुद्दे पर तमिलनाडु सरकार ने न्यायपालिका से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष तमिलनाडु के वकील बी. करुणाराकर ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा प्रतिदिन 3,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिए जाने के बावजूद कर्नाटक द्वारा पानी नहीं छोड़ा गया है। इस स्थिति के कारण तमिलनाडु में खेती की जमीनों पर गंभीर असर पड़ रहा है।
वकील करुणाराकर ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "फसलों के लिए चार लाख हेक्टेयर जमीन पूरी तरह नष्ट हो जाएगी... कर्नाटक पानी नहीं छोड़ रहा है। हम कहां जाएंगे?" उन्होंने अदालत को समझाया कि यदि पानी की आपूर्ति बनी नहीं रही तो लाखों हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि और उस पर लगी फसलों का नुकसान होगा, जो राज्य के किसानों के लिए आर्थिक रूप से विनाशकारी साबित हो सकता है।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पटाखों की बिक्री के एक अलग मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाया है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट का संदर्भ देते हुए अदालत ने नोट किया कि दिल्ली के बाजारों में प्रतिबंध के बावजूद पारंपरिक और अनधिकृत पटाखे खुलेआम बेचे जा रहे हैं। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्न बी. वराले की बेंच ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और पुलिस को इन उल्लंघनों को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया है।
अदालत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में तस्वीरें हैं, जो दिखाती हैं कि कल के आदेश के बावजूद दुकानों में सब कुछ उपलब्ध है। अदालत ने आगे कहा कि बाजार में लाइसेंस वाले, बिना लाइसेंस वाले और क्यूआर कोड के बिना सभी प्रकार के पटाखे मिल रहे हैं, जिसकी जांच करना आवश्यक है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 22 अक्टूबर और 2 नवंबर को किए गए सर्वे में पाया गया कि चांदनी चौक, सदर बाजार, शास्त्री नगर, सरोजिनी नगर और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी जैसे मुख्य बाजारों में पटाखे खुलेआम बेचे जा रहे थे। विक्रेता "ग्रीन क्रैकर्स", "पॉल्यूशन-फ्री" और "जीरो पॉल्यूशन" के लेबल लगाकर उत्पाद बेच रहे थे, जबकि पारंपरिक पटाखे मांग पर गुप्त स्टॉक या नजदीकी गोदामों से उपलब्ध कराए जा रहे थे।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई बक्सों पर अदालत द्वारा अनिवार्य क्यूआर कोड नहीं थे, और कुछ कोड ग्राहकों को प्रमाण पत्र के सत्यापन के बजाय ऑनलाइन कैटलॉग पर ले जा रहे थे। चांदनी चौक में एक विक्रेता ने तो ग्राहक को बड़े पटाखों के लिए सदर बाजार जाने को कहा, क्योंकि वहां सब कुछ उपलब्ध है। इसके अलावा, अदालत द्वारा ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद, कुछ विक्रेता होम डिलीवरी के लिए एडवांस ऑर्डर स्वीकार कर रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले 4 से 6 नवंबर के दौरान दिल्ली-एनसीआर में केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति दी थी। इन पटाखों को चलाने के लिए 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 और रात 8 से 10 बजे के समय की अनुमति दी गई थी। 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर से लागू होगा। अदालत ने स्पष्ट किया था कि केवल CSIR-NEERI और PESO द्वारा प्रमाणित पटाखे ही बेचे जा सकेंगे। प्रत्येक बॉक्स पर निर्माता, पंजीकरण और लाइसेंस का विवरण देने वाला क्यूआर कोड होना अनिवार्य है। बेरियम युक्त या श्रृंखला (लड़ी) पटाखों के उत्पादन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने 30 सितंबर को कहा था कि पटाखे चलाने के लिए 24 घंटे की अनुमति नहीं दी जा सकती और मध्यम मार्ग निकालना आवश्यक है। 29 अक्टूबर को अदालत ने सुझाव दिया था कि विराट कोहली जैसी प्रसिद्ध हस्तियों की मदद से लोगों को प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाने के लिए जागरूक किया जाए।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराए में 700% वृद्धि के दावे वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता से कहा कि यदि किराया अधिक है तो हवाई यात्रा न करें और आगे बढ़ें। एक अन्य मामले में अदालत ने कहा कि किसी एक जगह पर अनिश्चितकाल तक धरना नहीं दिया जा सकता, क्योंकि प्रदर्शन करना सबका अधिकार है लेकिन रोजगार और व्यवसाय का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। लॉरेंस गैंग के हैरी बॉक्सर के नाम पर तुषार कपूर से ₹5 करोड़ की मांग की गई थी, लेकिन जांच में वह आवाज नकली पाई गई है। पुणे मेट्रो प्रोजेक्ट्स के ₹21 हजार करोड़ के उद्घाटन के संबंध में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले गरीबी दूर करने के वादे होते थे, लेकिन अब जमीनी स्तर पर काम हो रहा है।
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