केरल के 15वें पंचवर्षीय योजना के लिए अप्रोच पेपर को मंजूरी
राज्य के GSDP को ₹16 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹28 लाख करोड़ करने का लक्ष्य
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 5:41 · 4 मिनट का पाठ
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केरल राज्य योजना बोर्ड ने राज्य की 15वीं पंचवर्षीय योजना के लिए अप्रोच पेपर को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की वार्षिक विकास दर को वर्तमान 5% से बढ़ाकर 7% तक पहुंचाना है। इस योजना के तहत राज्य के कुल सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) को वर्तमान ₹16 लाख करोड़ से बढ़ाकर योजना अवधि के अंत तक ₹28 लाख करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया है।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, 15वीं पंचवर्षीय योजना वर्ष 2027 से 2032 की अवधि को कवर करेगी। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की अध्यक्षता में गुरुवार को राज्य योजना बोर्ड की पुनर्गठित पहली बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस अप्रोच पेपर को मंजूरी दी गई। पिछली योजनाओं से अलग हटते हुए, इस बार 15वीं योजना 'प्रोजेक्ट मोड' में तैयार की जाएगी।
योजना बोर्ड के बयान के अनुसार, इस योजना के लिए SMART फ्रेमवर्क यानी विशिष्ट (Specific), मापने योग्य (Measurable), प्राप्त करने योग्य (Achievable), परिणामोन्मुखी (Result-oriented) और समयबद्ध (Time-bound) दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। विकास की प्रक्रिया में आवश्यक सेवाओं की गारंटी, आजीविका सहायता और सामाजिक सुरक्षा जैसे सामाजिक आधार के साथ-साथ पर्यावरणीय सीमाओं का भी ध्यान रखा जाएगा। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य केरल के पारिस्थितिकी तंत्र और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना और जलवायु एवं आपदा के जोखिमों को कम करना है।
बैठक के दौरान विभिन्न मिशनों की स्थापना करने का निर्णय लिया गया। कुटुंबश्री मिशन के मॉडल पर आधारित 'केरल रोजगार और आर्थिक अवसर मिशन' और 'युवा केरल मिशन' बनाया जाएगा। 'केरल रोजगार और आर्थिक अवसर मिशन' के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। इस मिशन का संचालन योजना बोर्ड द्वारा किया जाएगा और 24 महीने के भीतर इसे राज्य सरकार को सौंप दिया जाएगा।
युवा केरल मिशन का विवरण तैयार करने के लिए स्थानीय स्वशासन संस्थाओं, उच्च शिक्षा, युवा मामले और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के विभागों के साथ-साथ योजना बोर्ड के सदस्यों के बीच चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग द्वारा ट्राइबल सब-प्लान के तहत अन्य विभागों के समन्वय के साथ पांच साल की अवधि में वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए मिशन मोड में एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा।
राज्य योजना बोर्ड के कामकाज को मजबूत करने, क्षमता निर्माण गतिविधियां करने और डेटा विश्लेषण विभाग में सुधार करने के लिए नीति आयोग के स्टेट सपोर्ट मिशन के तहत वार्षिक ₹2.44 करोड़ तक की वित्तीय सहायता प्राप्त करने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया था। उल्लेखनीय है कि अन्य सभी राज्यों ने भी इस योजना के तहत समान सहायता मांगी है।
विकास योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए सभी जिलों को आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया गया है। यह सहायता कासरगोड, वायनाड, इडुक्की और कुट्टनाड के मौजूदा पैकेज के मॉडल पर आधारित होगी। स्थानीय निवेशकों और पर्यटकों को जोड़ने के लिए स्थानीय निवेश और विकास मेलों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें केरल इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल एडमिनिस्ट्रेशन (KILA) नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा और नोर्का (Norka) द्वारा इसे सहयोग दिया जाएगा।
योजना की प्रगति की समीक्षा करने के लिए जिला स्तर पर योजना बोर्ड के सदस्य और जिला कलेक्टर के संयुक्त नेतृत्व में प्लान रिव्यू कमेटी बनाई जाएगी। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों में तेजी लाने, देरी से बचने और संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने पर जोर दिया।
इससे पहले, UDF सरकार ने राज्य योजना बोर्ड को 'थिंक टैंक' में बदलने की योजना की घोषणा की थी, जो प्राथमिकता वाले प्रोजेक्ट्स के कार्यान्वयन की निगरानी करने और नागरिक समाज एवं सरकार के बीच कड़ी के रूप में काम करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
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