SBI के ₹12,668 करोड़ के बकाया के खिलाफ वीडियोकॉन प्रमोटर वेणुगोपाल धूत दिवालिया घोषित
धूत की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया विफल होने के बाद NCLT ने दिया आदेश
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 11:42 · अपडेट दोपहर 2:15 · 4 मिनट का पाठ
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मुंबई की नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने वीडियोकॉन ग्रुप के प्रमोटर वेणुगोपाल नंदलाल धूत को दिवालिया घोषित कर दिया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा किए गए ₹12,668 करोड़ के बकाया के दावे के बाद ट्रिब्यूनल ने गुरुवार को यह आदेश दिया। NCLT मुंबई बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यहाँ व्यक्तिगत गारंटर के रूप में रहे वेणुगोपाल नंदलाल धूत को दिवालिया घोषित किया जा रहा है।
ट्रिब्यूनल ने आशीष नारायण को दिवाला ट्रस्टी नियुक्त किया है और धूत को सात दिनों के भीतर अपनी वित्तीय स्थिति का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। ट्रस्टी को लेनदारों से दावे आमंत्रित करने और 90 दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के अनुसार, धूत की दिवालियापन की संपत्ति ट्रस्टी के पास रहेगी, जो संपत्ति का प्रबंधन करेगा और लेनदारों के बीच वसूली का वितरण करेगा।
यह कार्रवाई धूत द्वारा प्रस्तावित ₹600 करोड़ की भुगतान योजना विफल होने के बाद की गई है। धूत ने अपनी व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया के दौरान एक योजना प्रस्तुत की थी, जिसमें सिलीगुड़ी के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट से प्राप्त धन के माध्यम से 36 महीनों में लेनदारों को भुगतान करना था। हालांकि, लेनदारों ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। लेनदारों ने चिंता व्यक्त की थी कि यह योजना पूरी तरह से प्रोजेक्ट पर निर्भर थी और इसमें नियामक मंजूरियों तथा भविष्य के नकदी प्रवाह को लेकर अनिश्चितता थी। इस योजना में किसी भी प्रकार का अग्रिम भुगतान (अपफ्रंट पेमेंट) भी शामिल नहीं किया गया था।
NCLT ने 17 जुलाई को इस भुगतान योजना को खारिज कर दिया था और धूत की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया को समाप्त कर दिया था, जिससे लेनदारों को दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मिल गई थी। ट्रिब्यूनल ने पहले ही उल्लेख किया था कि प्रस्तावित भुगतान पद्धति भविष्य के विकास, मंजूरियों और नकदी प्रवाह पर आधारित थी जिसका सत्यापन नहीं किया जा सकता था।
यह पूरा विवाद 2010 और 2012 की अवधि के दौरान शुरू हुआ था, जब वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज और वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशन ने SBI और अन्य बैंकों से विभिन्न ऋण और वर्किंग-कैपिटल सुविधाएं ली थीं। प्रमोटर के रूप में, धूत ने गारंटी डीड के माध्यम से इन ऋणों के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी। वीडियोकॉन कंपनियों द्वारा ऋण चुकाने में विफल रहने के बाद, SBI ने फरवरी 2018 में धूत की व्यक्तिगत गारंटी का उपयोग किया था। इसके बाद 6 जून 2018 को वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज को कॉर्पोरेट दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया गया था।
SBI ने 23 जुलाई 2020 को धूत को लगभग ₹6,157.57 करोड़ की मांग के साथ नोटिस दिया था। राशि का भुगतान न होने पर, SBI ने सितंबर 2020 में IBC की धारा 95 के तहत धूत के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने के लिए NCLT मुंबई में आवेदन किया था। SBI का कुल ₹12,668.06 करोड़ का दावा रूपी टर्म लोन (RTL) सुविधा से ₹9,322.10 करोड़, वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड (VTL) सुविधा से ₹1,437.76 करोड़ और ब्याज तथा पेनल्टी सहित वर्किंग-कैपिटल सुविधाओं से ₹1,908.19 करोड़ का है।
धूत ने इस कार्यवाही को चुनौती दी थी और सीमा के आधार पर तथा एक गारंटी SBICAP ट्रस्टी कंपनी के पक्ष में होने के तर्क के साथ दलील दी थी, लेकिन NCLT ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया था। 8 अप्रैल 2026 को, NCLT ने SBI के आवेदन को स्वीकार किया और धूत की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू की, जिसमें आशीष नारायण को रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल के रूप में नियुक्त किया गया था।
वीडियोकॉन ग्रुप भारत के प्रमुख कंज्यूमर-इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांडों में से एक था। ग्रुप ने टेलीकॉम, तेल और गैस, डायरेक्ट-टू-होम टीवी और अन्य व्यवसायों में विस्तार किया था, जिसके लिए ऋण के आधार पर बड़े पैमाने पर धन जुटाया गया था।
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