नितेश तिवारी की फिल्म रामायण का पहला रिव्यू आया, आशीष चंचलानी ने की प्रशंसा
मुंबई में हुई स्क्रीनिंग के बाद कंटेंट क्रिएटर ने फिल्म को ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर बताया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 8:44 · अपडेट दोपहर 2:15 · 7 मिनट का पाठ
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निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ रिलीज से पहले ही भारी चर्चा में है। मुंबई में इस फिल्म की स्क्रीनिंग की गई थी, जिसके बाद प्रसिद्ध कंटेंट क्रिएटर आशीष चंचलानी ने फिल्म देखकर अपनी पहली प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आशीष ने फिल्म के विजुअल्स, एक्शन सीक्वेंस और कलाकारों के अभिनय की बहुत प्रशंसा की है और इसे भारतीय सिनेमा के लिए एक खास फिल्म बताया है।
टीवी9 गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, आशीष चंचलानी ने अपने एक्स (X) अकाउंट पर रिव्यू साझा करते हुए इस फिल्म को एक भव्य और शानदार सिनेमैटिक अनुभव बताया। उन्होंने लिखा कि ‘रामायण’ में भारतीय सिनेमा के अब तक के कुछ सर्वश्रेष्ठ एक्शन सीक्वेंस देखने को मिलेंगे। आशीष के अनुसार, फिल्म की सबसे बड़ी ताकत केवल इसके विजुअल्स या एक्शन नहीं हैं, बल्कि निर्देशक नितेश तिवारी का कुशल निर्देशन है। उन्होंने बताया कि पूरी फिल्म नितेश तिवारी की पकड़ और समझ को दर्शाती है और उन्होंने पूर्ण नियंत्रण के साथ इस फिल्म का निर्माण किया है।
फिल्म की स्टारकास्ट के बारे में बात करते हुए आशीष ने रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश के प्रदर्शन को ‘परफेक्शन’ बताया। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका में हैं। इसके अलावा, आशीष ने रवि दुबे की विशेष प्रशंसा की, जिन्होंने लक्ष्मण के किरदार में शानदार काम किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि फिल्म में रवि दुबे के कुछ हल्के-फुल्के और मजाकिया दृश्य भी हैं, जो कहानी की गंभीरता के बीच दर्शकों को हंसने का मौका देते हैं।
हालांकि, आशीष ने कुछ छोटी तकनीकी खामियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि रात के दृश्यों में कलाकारों की उम्र कम दिखाने के लिए इस्तेमाल किए गए ‘डी-एजिंग’ इफेक्ट्स थोड़े अजीब लगते हैं। इसके बावजूद, उन्होंने कहा कि फिल्म की एडिटिंग इतनी चुस्त है कि ये खामियां दर्शकों का ध्यान नहीं खींचतीं। उन्होंने विजुअल इफेक्ट्स के लिए जिम्मेदार कंपनी डीएनईजी (DNEG) और निर्माता नमित मल्होत्रा के प्रयासों की सराहना की और कहा कि लिए गए सभी तकनीकी जोखिम सफल रहे हैं। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आशीष जटायु वाले दृश्य के बाद बहुत भावुक हो गए और रोने लगे।
आशिष ने लोगों से अपील की है कि इस फिल्म को संभव हो तो सबसे बड़ी स्क्रीन पर ही देखना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि सस्ते लीक्स या पाइरेसी के आधार पर फिल्म का मूल्यांकन न करें, क्योंकि यह फिल्म विशेष रूप से बड़े पर्दे के लिए ही बनाई गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस फिल्म को ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर बनने से कोई नहीं रोक पाएगा।
आज तक और अमर उजाला की रिपोर्टों के अनुसार, इस फिल्म का बजट ₹4000 करोड़ है, जो इसे भारत की सबसे महंगी फिल्म बनाता है। फिल्म की कहानी की शुरुआत रावण से की गई है। रावण का कुल क्या है और उसने कैसे ब्रह्मा देव और भगवान शिव को अपनी तपस्या से प्रसन्न किया, यह दिखाया गया है। रावण लंका का राजा बनकर अन्य राज्यों पर विजय प्राप्त करता है और उसके अधर्म की सीमा बढ़ती है, जिसके कारण देवराज इंद्र भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हैं और भगवान विष्णु राम के रूप में अवतार लेते हैं।
फिल्म में राजा दशरथ (अरुण गोविल) और उनके चारों पुत्रों का प्रेम दिखाया गया है। राम और लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र से शिक्षा प्राप्त करते हैं। कहानी ताड़का-सुबाहु के वध से शुरू होकर सीता के स्वयंवर तक पहुँचती है। इसके बाद राम का राज्याभिषेक होना होता है, लेकिन माता कैकेयी के दो वचनों के कारण राम, सीता और लक्ष्मण को वनवास जाना पड़ता है। वन में शूर्पणखा का प्रवेश होता है, जो राम से विवाह करने की जिद करती है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम उसे नकार देते हैं, जिसके बाद लक्ष्मण उसकी नाक काट देते हैं। इस घटना के बाद शूर्पणखा अपने भाइयों खर-दूषण और रावण के पास जाती है। फिल्म में राम, सीता और लक्ष्मण का खर-दूषण और उसकी 14 हजार राक्षसों की सेना के साथ सामना दिखाया गया है। फिल्म का पहला भाग सीता के हरण और रावण-जटायु के भीषण युद्ध तक की कहानी प्रस्तुत करता है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म की शुरुआत अनुपम खेर की आवाज से होती है, जिन्होंने पक्षीराज जटायु को आवाज दी है। वे बताते हैं कि यह कहानी सदियों पुरानी है जब देवों और असुरों के बीच युद्ध था। देवराज इंद्र (कुणाल कपूर) ने असुरों को हराकर लंका का राज्य कुबेर को सौंप दिया था। इसके बाद लंका के राक्षस कुल का जीवन दरिद्र हो गया था, तब महारानी कैकसी (शोभना) ने अपने पुत्र दशानन (यश) को राज्य वापस पाने के लिए प्रेरित किया था। दशानन ने ऐसी कठोर तपस्या की कि ब्रह्माजी प्रकट हुए और उसे अमरता का वरदान दिया, लेकिन अहंकार में वह यह मांगना भूल गया कि कोई मनुष्य उसे मार न सके।
आज तक के अनुसार, नितेश तिवारी ने विजुअल्स से ज्यादा भावनाओं (इमोशन्स) पर जोर दिया है। भगवान राम ने अपने जीवन में अनुभव किए दर्द, जैसे राज्य छोड़कर वन में रहना, पिता के अंतिम क्षणों में साथ न होना और सीता का हरण होना, उसे निर्देशक ने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। जटायु की मृत्यु का दृश्य भी दर्शकों को बहुत दुखी करता है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी इतनी शानदार है कि कई बार यह भारतीय फिल्म नहीं लगती।
हालांकि, अमर उजाला के रिव्यू में एक अलग मत देखने को मिला है। उसमें बताया गया है कि यह फिल्म इमोशन्स से ज्यादा VFX वाली फिल्म लगती है। रिव्यू में कहा गया है कि रावण के किरदार में यश छा गए हैं, लेकिन राम के किरदार में रणबीर कपूर कहीं न कहीं कमजोर पड़े हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म वैश्विक पहचान पाने में सफल होगी लेकिन दर्शकों के दिल में जगह बनाने में उसे मुश्किल हो सकती है। यह फिल्म पिछली ‘आदिपुरुष’ फिल्म से बेहतर प्रतिक्रिया प्राप्त कर रही है, हालांकि रिलीज से पहले इसके गानों और अत्यधिक VFX के उपयोग के लिए कुछ लोगों ने इसे ट्रोल भी किया था।
नमित मल्होत्रा ने 2017 में इस मेगा बजट फिल्म की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य महाकाव्य रामायण और बॉलीवुड की ताकत को दुनिया के सामने लाना था। नितेश तिवारी, जिन्होंने पहले ‘दंगल’ और ‘छिछोरे’ जैसी फिल्में दी हैं, उन्होंने इस बार महाकाव्य को पर्दे पर उतारा है।
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