सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में दिल्ली पुलिस ने 6 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
7 लोगों की जान लेने वाली इस घटना में बिल्डिंग मालिकों, ठेकेदार और पीजी ऑपरेटरों को बनाया आरोपी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 2:56 · 5 मिनट का पाठ
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दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को एक इमारत गिरने की गंभीर दुर्घटना हुई थी, जिसमें 7 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट में कुल 6 आरोपियों के खिलाफ 638 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। इस हादसे में मृतकों में 5 छात्र और 2 मजदूर शामिल हैं, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे। इस घटना के बाद साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी और लंबी जांच के बाद अब पुलिस द्वारा अदालत में सबूत पेश किए गए हैं।
एनडीटीवी (NDTV) की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में कुल 87 गवाहों से पूछताछ की है। चार्जशीट में जिन छह व्यक्तियों को आरोपी के रूप में दर्शाया गया है, उनमें बिल्डिंग के मालिक, लेबर कॉन्ट्रैक्टर और पेइंग गेस्ट (PG) ऑपरेटर शामिल हैं। आरोपियों के नाम हरि राम गुप्ता, उर्मिला गुप्ता, महेश गुप्ता, सनोज कुमार, सुधांशु लवनीश कुमार और शुभम त्यागी हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि इन सभी व्यक्तियों की भूमिका अलग-अलग थी और उनकी लापरवाही के कारण यह बड़ी त्रासदी हुई थी।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि उर्मिला गुप्ता इस संपत्ति की पंजीकृत मालिक हैं और संपत्ति से संबंधित सभी वित्तीय लेनदेन उनके बैंक खाते में स्थानांतरित किए जाते थे। जबकि हरि राम गुप्ता इस बिल्डिंग के केयरटेकर थे और वे इस संपत्ति के माध्यम से सीधे लाभार्थी थे। उनके पुत्र महेश गुप्ता बिल्डिंग के सभी मामलों का प्रबंधन देखते थे और नकद भुगतान एकत्र करने का काम करते थे। ये तीनों व्यक्ति बिल्डिंग के मालिकाना हक और प्रबंधन से जुड़े होने के कारण उन्हें आरोपी बनाया गया है।
इसके अलावा, सनोज कुमार नामक व्यक्ति की पहचान लेबर कॉन्ट्रैक्टर के रूप में हुई है। वह एक राजमिस्त्री था जो बिल्डिंग में काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार, सनोज कुमार ने ही कथित तौर पर संपत्ति की एक दीवार तोड़ी थी, जो हादसे का कारण बनी हो सकती है। वहीं सुधांशु लवनीश कुमार और शुभम त्यागी इस बिल्डिंग में पेइंग गेस्ट (PG) सुविधाएं चला रहे थे। उल्लेखनीय है कि शुभम त्यागी घटना के बाद फरार हो गया था, लेकिन 11 सितंबर को उसने पटियाला हाउस कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था।
आज तक और संदेश की रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने इन सभी आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए हैं। इसमें मुख्य रूप से धारा 105 के तहत 'गैर-इरादतन हत्या' (culpable homicide not amounting to murder) का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, धारा 125(a) के तहत दूसरों के जीवन को खतरे में डालने वाले लापरवाहीपूर्ण कृत्य और धारा 3(5) के तहत समान इरादे से अपराध करने का आरोप है। निर्माण और मरम्मत के दौरान दिखाई गई घोर लापरवाही के लिए धारा 290 के तहत कार्रवाई की गई है।
इसके अतिरिक्त, पुलिस ने स्वेच्छा से चोट पहुँचाने के लिए धारा 115(2), सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के लिए धारा 324(2) और संपत्ति को आर्थिक नुकसान पहुँचाने के लिए धारा 324(4) के तहत आरोप लगाए हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने निर्माण या मरम्मत के दौरान आवश्यक सावधानी नहीं बरती, जिसके कारण इमारत ढह गई और कई निर्दोष लोगों की जान चली गई।
घटना की पृष्ठभूमि की बात करें तो, यह बिल्डिंग दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन इलाके में है। 6 सितंबर को जब बिल्डिंग में मरम्मत का काम चल रहा था और बेसमेंट में रिफिलिंग की प्रक्रिया की जा रही थी, तब अचानक पूरी इमारत ढह गई। एक साथ सात लोगों की मौत से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और इस मामले पर भारी चर्चा हुई। इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने सवाल उठाया था कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां कैसे चल रही हैं।
अब जब दिल्ली पुलिस ने 638 पन्नों की यह विस्तृत चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी है, तो इस मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कोर्ट अब इन सबूतों की जांच करेगा और आरोपियों की जिम्मेदारी तय कर उनकी सजा पर निर्णय लेगा। पुलिस द्वारा की गई जांच में निर्माण और मरम्मत के दौरान की गई लापरवाही को इस दुखद घटना का मुख्य कारण माना गया है।
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