IRDAI ने बीमा कंपनियों की शेयर ट्रांसफर फीस में 80 प्रतिशत की कटौती की
शेयर ट्रांसफर की मंजूरी के लिए अब बीमा कंपनियों को केवल ₹10 लाख प्रोसेसिंग फीस चुकानी होगी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
3 नवंबर 2026, सुबह 7:27 · अपडेट सुबह 7:35 · 1 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा कंपनियों के लिए शेयर ट्रांसफर की मंजूरी प्राप्त करने हेतु प्रोसेसिंग फीस में बड़ी कटौती करने की घोषणा की है। Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार, इस फीस में 80 प्रतिशत की कटौती की गई है, जिसके कारण अब बीमा कंपनियों को शेयर ट्रांसफर की मंजूरी के लिए ₹10 लाख चुकाने होंगे।
इस निर्णय के साथ ही IRDAI ने विभिन्न वित्तीय प्रक्रियाओं के अनुपालन संबंधी नियमों के बारे में भी स्पष्टीकरण दिया है। इस स्पष्टीकरण में प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (IPO), कर्मचारी स्टॉक विकल्प (ESOPs), पूंजी जुटाने की प्रक्रिया और कंपनियों के विलय (amalgamations) जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।
नए नियमों और शुल्क संरचना के माध्यम से बीमा क्षेत्र की कंपनियों के लिए शेयरों के हस्तांतरण की प्रक्रिया अधिक सरल हो जाएगी। पहले इस मंजूरी को प्राप्त करने के लिए कंपनियों को महत्वपूर्ण शुल्क देना पड़ता था, लेकिन अब 80 प्रतिशत की कटौती के बाद इस खर्च में बड़ी कमी आई है।
IRDAI द्वारा दिया गया यह स्पष्टीकरण कंपनियों को IPO लाने, कर्मचारियों को स्टॉक विकल्प देने और पूंजी बढ़ाने जैसी प्रक्रियाओं में किन नियमों का पालन करना आवश्यक है, इसे समझने में मदद करेगा। इसके साथ ही कंपनियों के विलय की प्रक्रिया में भी स्पष्टता प्रदान की गई है ताकि बीमा कंपनियां अपने व्यावसायिक निर्णय बेहतर तरीके से ले सकें।
કરચી નજીક ચર્ના ટાપુ પર લશ્કર-એ-તૈયબા આતંકવાદીઓની ગુપ્ત દરિયાઈ તાલીમ
પર્યટકોના વેશમાં આતંકવાદીઓને સ્કુબા ડાઇવિંગ અને અન્ડરવોટર ઓપરેશનની તાલીમ આપવામાં આવી રહી છે
RBI ने 2025-26 के लिए विदेशी देनदारियों और परिसंपत्तियों के अनंतिम परिणाम घोषित किए
भारतीय संस्थाओं के प्रत्यक्ष निवेश से संबंधित वार्षिक गणना के आंकड़े जारी
बच्चों की सुरक्षा और एल्गोरिद्मिक पारदर्शिता के लिए सोशल मीडिया कंपनियां हों जवाबदेह
केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे जोखिमों के खिलाफ सक्रिय कदम उठाने की मांग की