यूपी सरकार ने सरकारी डॉक्टरों के लिए सुपर स्पेशलिटी अध्ययन की शर्तें तय कीं
उच्च शिक्षा के बाद 10 वर्ष की अनिवार्य सेवा और 1 करोड़ के बॉन्ड का प्रावधान
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 8:10 · 4 मिनट का पाठ
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उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के डॉक्टर अब पीजी (पोस्ट ग्रेजुएशन) पूरा करने के बाद अपनी विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए सुपर स्पेशलिटी और अन्य उच्च चिकित्सा कार्यक्रमों का अध्ययन कर सकेंगे। एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देशों के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के मुख्य सचिव वी. हेकाली ज़िमोमी ने इस संबंध में विस्तृत आदेश जारी किया है, जिसे पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। उम्मीद है कि सरकार के इस कदम से भविष्य में सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों की उपलब्धता में बड़ी वृद्धि होगी।
नए सरकारी आदेश के अनुसार, पीजी डिग्री और डिप्लोमा रखने वाले पीएमएचएस (PMHS) डॉक्टर नीट (NEET) प्रवेश परीक्षा के माध्यम से उच्च चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकेंगे। हालांकि, इसके लिए डॉक्टरों को विभाग की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इस सुविधा को प्राप्त करने के लिए सरकार ने कुछ कड़ी शर्तें और नियम भी तय किए हैं। आवेदन करने वाले डॉक्टर के खिलाफ किसी भी प्रकार की विभागीय कार्रवाई, सतर्कता जांच या किसी भी प्रकार का आपराधिक मामला लंबित नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, डॉक्टरों की परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) पूरी होनी चाहिए और उनका स्थायीकरण आदेश (कन्फर्मेशन ऑर्डर) जारी हो चुका होना चाहिए। साथ ही, उनका सर्विस रिकॉर्ड भी पूरी तरह संतोषजनक होना आवश्यक है।
उच्च चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए डॉक्टरों की अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष तय की गई है। इस आयु की गणना आवेदन वर्ष से पिछले वर्ष की 31 दिसंबर के आधार पर की जाएगी। अध्ययन के लिए जाने वाले डॉक्टरों को अपनी एमबीबीएस (MBBS) और पीजी की मूल डिग्रियां महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के कार्यालय में जमा करनी होंगी।
सरकार ने इस सुविधा के साथ एक बड़ी शर्त जोड़ी है कि उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद डॉक्टरों को 10 वर्षों तक सरकारी अस्पतालों में अनिवार्य रूप से अपनी सेवाएं देनी होंगी। यदि कोई डॉक्टर अध्ययन पूरा करने के बाद इस शर्त का उल्लंघन करता है, तो उसे जुर्माने के रूप में 1 करोड़ रुपये का बॉन्ड भरना होगा। इसके अलावा, यदि कोई डॉक्टर बीच में ही पढ़ाई छोड़ देता है, तो उसे अगले 5 वर्षों तक किसी भी अन्य उच्च चिकित्सा कार्यक्रम में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कोई डॉक्टर परीक्षा में तीन से अधिक बार अनुत्तीर्ण होता है, तो उसे दोबारा परीक्षा देने के लिए सरकार की अनुमति लेनी होगी।
छुट्टी और वेतन संबंधी नियमों में भी स्पष्टता की गई है। नए आदेश के अनुसार, जो डॉक्टर पहली बार अनुमति लेकर उच्च चिकित्सा कार्यक्रम करेंगे, उन्हें 2 वर्ष का विशेष सवेतन अध्ययन अवकाश (पेड स्टडी लीव) और 1 वर्ष का अवैतनिक असाधारण अवकाश (एक्स्ट्राऑर्डिनरी लीव) दिया जाएगा। दूसरी ओर, जो डॉक्टर पहले पीजी कर चुके हैं और दोबारा उच्च शिक्षा लेना चाहते हैं, उन्हें अपनी पिछली पढ़ाई के बाद निर्धारित 10 वर्ष की अनिवार्य सेवा में से कम से कम 5 वर्ष पूरे करने होंगे। इस शर्त को पूरा करने के बाद ही उन्हें दोबारा अध्ययन की अनुमति दी जाएगी। ऐसी स्थिति में, उन डॉक्टरों को कुल 15 वर्षों तक सरकारी अस्पताल में काम करना होगा और अध्ययन के दौरान उन्हें बिना वेतन के असाधारण अवकाश दिया जाएगा।
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