डीजल में 15 प्रतिशत आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की योजना, नितिन गडकरी ने की घोषणा
कच्चे तेल के आयात को कम करने और प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए सरकार कर रही है परीक्षण
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 4:27 · 2 मिनट का पाठ
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भारत सरकार अब डीजल ईंधन में 15 प्रतिशत आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की संभावनाओं की जांच कर रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मिश्रण कितना प्रभावी और उपयोगी साबित हो सकता है, यह जानने के लिए वर्तमान में परीक्षण किए जा रहे हैं। इन परीक्षणों के परिणाम आने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय आगे का निर्णय लेगा।
संदेश (देश) की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का मुख्य उद्देश्य देश में जैव ईंधन के उपयोग को बढ़ाना है। भारत हर साल जीवाश्म ईंधन के आयात पर लगभग ₹22 लाख करोड़ खर्च करता है। सरकार चाहती है कि देश में ही तैयार होने वाले वैकल्पिक ईंधन का उपयोग बढ़े, ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता और उस पर होने वाले भारी खर्च को कम किया जा सके। इसके साथ ही, इस कदम से वाहनों के प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।
इस बीच, नितिन गडकरी ने आगामी भारत स्टेज-7 (BS7) उत्सर्जन मानकों पर भी चर्चा की। सड़क परिवहन मंत्रालय ने इन नए नियमों को 2029 से तीन चरणों में लागू करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, वाहन उद्योग संगठन SIAM की इच्छा है कि ये नियम 2032 से चरणबद्ध तरीके से लागू हों। नए नियमों का मुख्य उद्देश्य वायु प्रदूषण में कमी लाना है, जिसमें वाहनों के धुएं के अलावा टायर और ब्रेक के कारण होने वाले प्रदूषण पर भी कड़े नियंत्रण लगाए जाएंगे।
दूसरी ओर, पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने के E20 कार्यक्रम को लेकर कुछ वाहन चालकों ने माइलेज घटने और इंजन में समस्याओं की शिकायतें की हैं। नितिन गडकरी ने इन दावों को खारिज कर दिया और कहा कि E20 पेट्रोल के कारण किसी वाहन के खराब होने की बात सामने नहीं आई है। उन्होंने आगे कहा कि हुंडई, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स और मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों ने E20 पेट्रोल के अनुकूल वाहनों के मॉडल पहले ही तैयार कर लिए हैं।
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