सूरत की insideFPV कंपनी ने लद्दाख में एंटी-जैमिंग कामिकेज़ ड्रोन का सफल परीक्षण किया
18,000 फीट की ऊंचाई पर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की स्थिति में 'अद्विक' ड्रोन का परीक्षण कर भारतीय सेना को सौंपा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, शाम 7:29 · अपडेट शाम 7:37 · 4 मिनट का पाठ
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सूरत स्थित रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी insideFPV लद्दाख में लगभग 18,000 फीट की ऊंचाई पर सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) स्थितियों में कामिकेज़ फर्स्ट-पर्सन व्यू (FPV) ड्रोन का परीक्षण करने वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई है। देशगुजरात की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के स्वदेशी कामिकेज़ FPV ड्रोन 'अद्विक' का परीक्षण उन्नत ड्रोन डिफेंस सिस्टम सहित इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम चालू होने के बावजूद किया गया था। इन परीक्षणों के दौरान ड्रोन ने अपनी उड़ान और संचार लिंक बनाए रखा, जो इसकी एंटी-जैमिंग क्षमता को दर्शाता है। परीक्षण के बाद इस ड्रोन को भारतीय सेना को सौंप दिया गया है।
आधुनिक युद्धक्षेत्र पर छोटे हमलावर ड्रोन के सामने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एक बड़ी चुनौती है। यूक्रेन में चल रहे युद्ध ने साबित किया है कि संचार जैमिंग किस तरह FPV ड्रोन के संचालन में बाधा डाल सकती है। जब जैमर ड्रोन और उसके ऑपरेटर के बीच संपर्क को प्रभावित करते हैं, तो विमान पर नियंत्रण रखने और मिशन पूरा करने की क्षमता जोखिम में पड़ जाती है।
इस समस्या के समाधान के लिए insideFPV ने व्यावसायिक रूप से उपलब्ध घटकों पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी संचार प्रणाली विकसित की है। कंपनी ने अपने एंटीना रैक सिस्टम का उपयोग करके अद्विक का रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) कम्युनिकेशन स्विचिंग लिंक तैयार किया है, जिसमें विवादित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वातावरण के लिए कस्टमाइज्ड हार्डवेयर के साथ कई RF सिस्टम को एकीकृत किया गया है। यह सिस्टम इस तरह से डिजाइन किया गया है जिससे अतिरिक्त वजन और बिजली की खपत कम रहे और ड्रोन के कैमरे तथा फ्लाइट इलेक्ट्रॉनिक्स में कोई हस्तक्षेप न हो। insideFPV के अनुसार, अब तक किए गए सक्रिय जैमिंग परीक्षणों के दौरान अद्विक ने अपने कंट्रोल लिंक को सफलतापूर्वक बनाए रखा है।
ड्रोन को हल्का और सस्ता रखना डिजाइन का मुख्य उद्देश्य था। insideFPV के CTO देवंत भारद्वाज ने इस दृष्टिकोण को समझाते हुए कहा, “ज्यादातर लोग मानते हैं कि एंटी-जैमिंग का मतलब भारी और महंगा ड्रोन है। हम इसके विपरीत चाहते थे। हम 2020 से टैक्टिकल लो-कॉस्ट ड्रोन विकसित कर रहे हैं जब किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था। ये ड्रोन कॉम्पैक्ट हैं, इतने सस्ते हैं कि इन्हें खोया जा सकता है, और हमने अभी तक किसी जैमर को इन्हें रोकते हुए नहीं देखा है।”
लद्दाख का चयन अद्विक की संचार प्रणाली का इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के खिलाफ और चुनौतीपूर्ण पर्यावरणीय स्थितियों में परीक्षण करने के लिए किया गया था। 18,000 फीट की ऊंचाई पर पतली हवा एरोडायनामिक प्रदर्शन और प्रोपेलर दक्षता को प्रभावित करती है, जबकि जमा देने वाला तापमान बैटरी के प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इस संबंध में भारद्वाज ने बताया, “यदि यह वहां काम करता है, तो यह हमारी सीमाओं पर कहीं भी काम करेगा।”
भारत के लिए उन्नत ड्रोन संचार प्रणाली का स्वदेशी विकास देश के रक्षा प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम को मजबूत करने और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक रक्षा उत्पादन में उत्पादन क्षमता बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि मानवरहित प्रणालियों को बड़ी संख्या में तैनात करना आवश्यक है।
आधुनिक युद्ध में पैमाने के महत्व पर जोर देते हुए मेजर जनरल विकास शर्मा (रिटायर्ड) ने कहा, “आधुनिक संघर्ष तकनीक के साथ-साथ संख्या द्वारा भी तय किया जा रहा है। भारत को सटीक हमलों के लिए लगभग 1 लाख कम लागत वाले कामिकेज़ ड्रोन की आवश्यकता है, जिन्हें ऐसे पैमाने पर बनाया जाए जिससे प्रति ड्रोन लागत कम हो जाए।”
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