अनुंशल कंबोज के शानदार गेंदबाजी प्रदर्शन की सुनील गावस्कर ने की प्रशंसा
न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में अंशुल कंबोज ने 22 रन देकर 2 विकेट लिए।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, सुबह 12:30 · अपडेट सुबह 12:40 · 6 मिनट का पाठ
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ऑकलैंड के ईडन पार्क मैदान पर भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए पहले वनडे मैच में 24 वर्षीय युवा तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज ने अपनी अद्भुत और शानदार गेंदबाजी से सभी को चौंका दिया। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए इस मैच में अंशुल के प्रदर्शन ने क्रिकेट प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया और उनकी गेंदबाजी की चर्चा क्रिकेट जगत में चारों ओर हो रही थी।
अंशुल कंबोज ने इस मैच में 10 ओवर के अपने पूरे स्पेल के दौरान अत्यंत नियंत्रित और सटीक गेंदबाजी की। उन्होंने अपने 10 ओवर के कोटे में 2 मेडन ओवर डाले और केवल 22 रन देकर 2 महत्वपूर्ण विकेट झटके। इस दौरान उन्होंने कुल 46 डॉट बॉल फेंकी, जिसके कारण उनकी इकोनॉमी रेट मात्र 2.20 रही। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि उन्होंने न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को रन बनाने का बिल्कुल मौका नहीं दिया और मैदान पर अपना वर्चस्व बनाए रखा। डॉट बॉल की इस बड़ी संख्या ने बल्लेबाजों पर भारी दबाव बनाया।
अंशुल के इस प्रदर्शन की एक विशेषता यह है कि वर्ष 2016 के बाद वनडे क्रिकेट में 10 ओवर के पूरे स्पेल के दौरान किसी भी भारतीय गेंदबाज द्वारा दिए गए ये सबसे कम रन हैं। इस प्रकार अंशुल एक नया और महत्वपूर्ण रिकॉर्ड स्थापित करने में सफल रहे। इस मैच जिताने वाले शानदार और प्रभावशाली प्रदर्शन के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' के रूप में भी चुना गया था।
भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज कप्तान सुनील गावस्कर अंशुल के इस प्रदर्शन से बहुत प्रभावित हुए हैं और उन्होंने अंशुल की प्रशंसा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। सोनी स्पोर्ट्स पर दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान गावस्कर ने अंशुल की गेंदबाजी के गुणों के बारे में विस्तार से चर्चा की। गावस्कर ने विशेष रूप से अंशुल की गेंदबाजी की गति और उनकी फिटनेस में आए बड़े और महत्वपूर्ण बदलावों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया।
गावस्कर ने नोट किया कि अंशुल की शुरुआत बहुत प्रभावशाली रही थी और उन्होंने पहले ही ओवर से मेडन ओवर डाल दिया था। उनकी गेंदबाजी में स्विंग भी देखने को मिल रहा था और गेंद बहुत तेजी से बल्लेबाज की ओर आ रही थी। अंशुल की गति और फिटनेस के बीच के संबंध के बारे में बात करते हुए गावस्कर ने बताया कि पिछले साल जब उन्होंने अंशुल को इंग्लैंड में देखा था, तब उनकी गेंदबाजी की गति 127 से 130 किमी प्रति घंटा के आसपास थी।
हालांकि, अब अंशुल 135 किमी प्रति घंटा से अधिक की गति से गेंदबाजी कर रहे हैं। गावस्कर के अनुसार यह बात स्पष्ट करती है कि अंशुल की फिटनेस में बहुत बड़ा सुधार हुआ है। फिटनेस में आए इस सुधार के कारण ही उनकी गेंदबाजी में इतना बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जो उनके प्रदर्शन में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। उनकी बढ़ी हुई गति उनके शारीरिक क्षमता में हुए सुधार का परिणाम है।
गावस्कर ने अंशुल के लाइन और लेंथ के अनुशासन की भी बहुत प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जब कोई गेंदबाज लय में होता है और उसके मन में नो-बॉल न फेंकने का आत्मविश्वास होता है, तो उसकी गेंदबाजी की गति अपने आप बढ़ जाती है। अंशुल के पूरे स्पेल के दौरान उन्होंने एक भी गेंद लेग या मिडिल स्टंप पर नहीं फेंकी थी। वह लगातार ऑफ-स्टंप या उसके बाहर ही गेंदबाजी करके बल्लेबाजों पर निरंतर दबाव बनाए रखते रहे। उनकी इस सटीकता ने बल्लेबाजों के लिए रन बनाने में मुश्किलें पैदा कीं।
इससे पहले अंशुल की गेंदबाजी की गति ऐसी थी कि बल्लेबाज उन पर आसानी से 'ऑन द अप' शॉट खेल सकते थे। लेकिन ऑकलैंड के मैदान की बाउंसी और सीमिंग पिच पर अंशुल की सटीक लाइन और लेंथ के कारण न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों के लिए शॉट खेलना लगभग असंभव हो गया था। पिच की स्थिति और अंशुल की सटीकता ने बल्लेबाजों को मुश्किल में डाल दिया था।
गावस्कर ने 2026 के वर्तमान समयकाल के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने बताया कि टी-20 क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव के कारण अब वनडे क्रिकेट में भी बल्लेबाजों का रुख अत्यंत आक्रामक हो गया है। ऐसे समय में, जहां बल्लेबाज लगातार आक्रामक रहने का प्रयास करते हैं, वहां 10 ओवर के स्पेल में केवल 22 रन देकर विकेट झटकना वास्तव में असाधारण और खास बात है।
अंशुल कंबोज ने मैच के दौरान किसी भी प्रकार के अनावश्यक प्रयोग करने के बजाय अपनी सटीक गेंदबाजी पर ही भरोसा रखा। इस रणनीतिक निर्णय के कारण न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों पर निरंतर दबाव बना रहा, जिसके परिणामस्वरूप भारत को इस मैच में शानदार जीत प्राप्त हुई। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने ऑकलैंड में जीत दर्ज कर श्रृंखला में 1-0 की बढ़त बना ली है।
गावस्कर के अनुसार अंशुल का यह प्रदर्शन केवल एक मैच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी मेहनत और अनुशासन का परिणाम है। अंशुल की गेंदबाजी में जो सटीकता देखने को मिली वह किसी भी अनुभवी गेंदबाज के लिए भी एक उदाहरण के समान है। इस प्रकार, अंशुल कंबोज ने ऑकलैंड के मैदान पर अपनी गेंदबाजी से न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को लाचार कर दिया और भारत की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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