मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन और हिरासत
कांचीपुरम में 'रेल रोको' आंदोलन के दौरान पुलिस ने 350 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 2:22 · अपडेट शाम 7:59 · 4 मिनट का पाठ
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हिंदुस्तान टाइम्स और इंडिया टुडे की रिपोर्टों के अनुसार, तमिलनाडु के कांचीपुरम में बुधवार को पुराने रेलवे स्टेशन के पास 'जननायिका मीटपु कुझु' के सदस्यों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर 'रेल रोको' आंदोलन किया गया, जिससे वहां तनाव पैदा हो गया। इस प्रदर्शन में मक्कल मंड्रम, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, विदुथलाई चिरुथैगल कची और स्वतंत्र सामाजिक कार्यकर्ताओं के सदस्यों ने भाग लिया, जिसके कारण क्षेत्र में लगभग एक घंटे तक अशांति रही। प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल के जवानों को तैनात किया गया था।
होटल तमिलनाडु से 350 से अधिक प्रदर्शनकारी पुराने रेलवे स्टेशन की ओर एक रैली में आगे बढ़े, जहां अधिकारियों द्वारा उन्हें रोकने के प्रयास के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर 50 से अधिक प्रदर्शनकारी रेलवे ट्रैक पर बैठ गए और प्रधानमंत्री तथा चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की, साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी की अपनी मांग को दोहराया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने 13 करोड़ मतदाताओं को अयोग्य ठहराकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में काम किया है। बाद में पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को पकड़ लिया और उन्हें एक निजी मैरिज हॉल में रखा।
इससे पहले 17 अक्टूबर को डीएमके (DMK) संसदीय दल ने एक प्रस्ताव पारित कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और उनके आचरण की जांच की मांग की थी। डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में पार्टी मुख्यालय अन्ना अरिवलयम स्थित मुरासोली मारन मीटिंग हॉल में आयोजित बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया था। डीएमके के प्रस्ताव के अनुसार, पार्टी के सांसद स्टालिन के मार्गदर्शन में भारत के राष्ट्रपति को दो बड़े चुनावी सुधारों की मांग करने वाला एक औपचारिक ज्ञापन सौंपेंगे। इन मांगों में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को तत्काल और पूरी तरह से रद्द करने तथा आगामी सभी चुनाव पूर्व-SIR मतदाता सूचियों के साथ कराने की बात है, साथ ही चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास वापस लाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय पारंपरिक पेपर बैलेट सिस्टम को फिर से लागू करने की मांग शामिल है।
दूसरी ओर, इंडिया टुडे और द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित फ्रीडम पार्क में 'इंडिया' गठबंधन और कर्नाटक कांग्रेस के नेताओं द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के मुद्दे के खिलाफ एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सड़कों पर एक नाटक के रूप में 'मॉक अरेस्ट' (नकली गिरफ्तारी) की गई, जिसमें एक प्रदर्शनकारी हथकड़ी पहनकर और ज्ञानेश कुमार का मास्क लगाकर खड़ा था तथा उसके साथ पुलिस की वेशभूषा में एक अभिनेता भी मौजूद था। आरएसएस (RSS) के साथ राजनीतिक गठबंधन होने का आरोप लगाने के लिए प्रदर्शनकारियों ने खाकी शॉर्ट्स पहने उस व्यक्ति को नकली जेल सेटअप में ले जाकर परेड भी कराई। इस स्ट्रीट प्रोटेस्ट में दिनेश गुंडू राव सहित कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। पार्टी प्रतिनिधियों ने बताया कि यह प्रदर्शन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी रैली के हिस्से के रूप में था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR को रद्द करने की मांग की गई थी।
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