पंजाब PCS परीक्षा में अनियमितता के आरोप, भाजपा ने CBI जांच की मांग की
परिणामों में असामान्य पैटर्न दिखने का दावा करते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, शाम 4:58 · अपडेट सुबह 7:31 · 3 मिनट का पाठ
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पंजाब सिविल सेवा (PCS) परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और घोटाले के आरोप लगाए हैं। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने इस पूरे मामले की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी CBI की मांग की है।
भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि चयन प्रक्रिया में अत्यंत असामान्य पैटर्न देखा गया है। पार्टी नेताओं के अनुसार, लगभग 45 प्रतिशत उम्मीदवार केवल एक ही कमरे या विशिष्ट केंद्रों से उत्तीर्ण हुए हैं। ये आंकड़े परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की ओर इशारा करते हैं। भाजपा द्वारा मांग की गई है कि इस गंभीर घोटाले की जिम्मेदारी लेते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस तुरंत इस्तीफा दें।
इस विवाद के बीच एक अज्ञात वक्ता ने आम आदमी पार्टी के नेतृत्व पर हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि जब परीक्षा में ऐसी बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं, तो AAP नेतृत्व जांच के आदेश देने में क्यों हिचकिचा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक खींचतान के साथ-साथ, इस परीक्षा से प्रभावित उम्मीदवारों में भी भारी आक्रोश देखा जा रहा है। कई छात्रों ने राज्य सरकार से तत्काल प्रभाव से पेपरों के पुनर्मूल्यांकन (re-evaluation) की अपील की है। उम्मीदवारों का कहना है कि योग्य और मेहनती उम्मीदवारों को चयन सूची से बाहर रखा गया है, जबकि अनियमितता करने वाले सफल हुए हैं।
छात्रों ने मांग की है कि पारदर्शिता लाने के लिए पूरी प्रक्रिया की फिर से समीक्षा की जाए ताकि न्याय मिल सके। वर्तमान में यह मुद्दा पंजाब की राजनीति में गरमा गया है और सबकी नजरें सरकार के अगले कदमों पर टिकी हैं। परीक्षा की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए भाजपा और छात्रों दोनों द्वारा दबाव बढ़ाया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य मुद्दा यह है कि यदि 45 प्रतिशत उम्मीदवार एक ही केंद्र या कमरे से सफल हुए हैं, तो यह परीक्षा की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। भाजपा के अनुसार, यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि एक सुनियोजित घोटाला है, जिसके कारण योग्य युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है। इसीलिए वे राज्य सरकार के बजाय केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच कराने पर जोर दे रहे हैं।
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