मीडिया ट्रायल के खिलाफ अभिषेक बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली
लोकसभा सांसद की याचिका पर विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का कलकत्ता हाईकोर्ट को निर्देश
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 1:41 · 3 मिनट का पाठ
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सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को मीडिया ट्रायल के खिलाफ अपनी याचिका के संबंध में कलकत्ता हाईकोर्ट में दलील देने की अनुमति दे दी है। मंगलवार, 3 नवंबर, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया था।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि जब कलकत्ता हाईकोर्ट फिर से काम शुरू करेगा, तब बनर्जी इस मामले को सुनवाई के लिए पेश कर सकेंगे। दुर्गा पूजा और दिवाली की छुट्टियों के बाद हाईकोर्ट 16 नवंबर से फिर से खुलेगा, तब आवेदक अंतरिम राहत के लिए इस मामले का उल्लेख कर सकेगा। कोर्ट ने हाईकोर्ट को बनर्जी की याचिका पर विचार करने के लिए कहा है।
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, अभिषेक बनर्जी की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने अदालत में तर्क दिया कि हाईकोर्ट में इस मामले की केवल एक बार सुनवाई की गई थी। उस समय आवेदक को बताया गया था कि हाईकोर्ट में रोस्टर उपलब्ध नहीं है। आलम ने आगे कहा कि उसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट के समक्ष तीन बार इस मामले का उल्लेख किया है, लेकिन याचिका पर सुनवाई नहीं की गई है, जिसके कारण उनके अधिकारों का निरंतर उल्लंघन हो रहा है।
अधिवक्ता आलम ने यह भी तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले कई फैसलों में यह निर्धारित किया है कि मीडिया ट्रायल के माध्यम से निर्दोषता के अनुमान को छीना नहीं जा सकता। लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में मांग की है कि जांच एजेंसियों को उनकी व्यक्तिगत जानकारी मीडिया माध्यमों के साथ साझा करने से रोका जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अधिकारियों द्वारा किए जा रहे चयनात्मक लीक से उनकी छवि धूमिल हो रही है और इससे उनके खिलाफ चल रही जांच पर भी असर पड़ सकता है।
बनर्जी वर्तमान में कई मामलों में जांच के घेरे में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां तलाशी, पूछताछ और अन्य कानूनी कार्यवाही के विवरण मीडिया के एक वर्ग को लीक कर रही हैं, जिसके कारण विभिन्न समाचार पत्रों में कई खबरें प्रकाशित हो रही हैं। उन्होंने तर्क दिया कि पुलिस अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले इस तरह के जानबूझकर किए गए लीक संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके गरिमा, प्रतिष्ठा और निष्पक्ष जांच के अधिकारों का उल्लंघन हैं। इससे उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंच सकता है और जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मीडिया माध्यमों को उनके खिलाफ चल रही जांच से संबंधित समाचार रिपोर्ट करने या प्रकाशित करने पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की है।
अभिषेक बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के नेता और लोकसभा सांसद हैं, जो वर्तमान में विभिन्न कानूनी जांचों का सामना कर रहे हैं।
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