कलंचिरा चेक डैम को मुख्य पर्यटन स्थल बनाने के लिए कनियमबेट्टा पंचायत की नई योजना
'एवर शाइन कनियमबेट्टा-2030' पहल के तहत आगामी पांच वर्षों में कई विकासोन्मुख परियोजनाएं लागू की जाएंगी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, सुबह 6:08 · 3 मिनट का पाठ
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वायनाड जिले की कनियमबेट्टा ग्राम पंचायत ने कलंचिरा चेक डैम को एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण के रूप में विकसित करने की योजना घोषित की है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, इस चेक डैम पर बोटिंग और कयाकिंग जैसी सुविधाएं शुरू की जाएंगी। इसके अलावा, पर्यटकों की सुविधा के लिए वहां वॉकवे, बैठने की व्यवस्था और बच्चों के लिए पार्क बनाने का भी प्रस्ताव है।
यह परियोजना पंचायत को पहाड़ी जिले के एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से प्रस्तावित कई परियोजनाओं का एक हिस्सा है। पंचायत ने 'एवर शाइन कनियमबेट्टा-2030' नामक पहल के तहत आगामी पांच वर्षों में पंचायत के प्रमुख स्थलों का विकास करने का लक्ष्य रखा है। कनियमबेट्टा ग्राम पंचायत की अध्यक्ष वी.पी. यूसुफ ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य पर्यटन, कृषि, विरासत संरक्षण, बुनियादी ढांचे का विकास और हवाई संपर्क को एकीकृत करना है।
इस विकास योजना में मुलापरम्बथ कैनाल क्षेत्र शामिल है, जिसे मनोरंजन और शारीरिक व्यायाम के लिए अनुकूल बनाने हेतु बच्चों के पार्क, ओपन जिम, चलने के रास्ते, आराम के लिए बेंच, बगीचे, छायादार वृक्षों और सौर ऊर्जा से चलने वाली लाइटों के साथ विकसित किया जाएगा। पानमकांडी में सार्वजनिक स्विमिंग पूल का नवीनीकरण और सौंदर्यीकरण किया जाएगा, ताकि बच्चों और युवाओं को तैराकी सीखने के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकें। वहां कैफेटेरिया जैसे संस्थान स्थापित करके स्थानीय रोजगार पैदा करने का भी पंचायत का इरादा है।
कनियमबेट्टा के विकास के लिए अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं में थाजे वरादुर में बच्चों के लिए हैप्पीनेस पार्क, चित्तूर ट्राइब्स म्यूजियम, अंबलकन्नु में बीज भंडारण और प्रसंस्करण केंद्र, वायनाड कॉफी प्रोजेक्ट और प्रस्तावित चिक्कलूर एयरस्ट्रिप प्रोजेक्ट शामिल हैं। थाजे वरादुर में बच्चों का हैप्पीनेस पार्क 'डेस्टिनेशन चैलेंज' योजना के तहत विकसित किया जाएगा, जिसमें आधुनिक खेल उपकरण, सुरक्षित प्ले एरिया, ओपन-एयर स्टेज, बगीचे, वॉकवे, पीने का पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं होंगी।
चित्तूर ट्राइब्स म्यूजियम का विकास जिले की आदिवासी विरासत और स्वदेशी संस्कृति को संरक्षित करने और प्रदर्शित करने के लिए किया जाएगा। इस संग्रहालय का लक्ष्य आगंतुकों को आदिवासी कला रूपों और पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों से परिचित कराना है। किसानों के लिए अंबलकन्नु में बीज भंडारण और प्रसंस्करण केंद्र विकसित किया जाएगा, जो किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज और पौधे प्राप्त करने में मदद करेगा। यह केंद्र पारंपरिक चावल की किस्मों के वैज्ञानिक भंडारण और संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करेगा।
कृषि क्षेत्र में वायनाड कॉफी प्रोजेक्ट के माध्यम से क्षेत्रीय कॉफी के बाजार मूल्य को बढ़ाने और कृषि पर्यटन को बढ़ावा देकर तथा बाजार के नए अवसर खोजकर किसानों की आय में सुधार करने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही कवडम-चिक्कलूर अप्रोच रोड को सुधारने के लिए उसे चौड़ा करने, इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने, फुटपाथ बनाने, सोलर स्ट्रीटलाइट्स लगाने और आराम के लिए बेंच उपलब्ध कराने सहित के कार्यों का प्रस्ताव है। इस मार्ग पर पेड़ और फूलों के पौधे भी लगाए जाएंगे ताकि कनेक्टिविटी में सुधार हो सके।
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