त्योहारों में यात्रियों को राहत देने के लिए रेलवे 1,000 से अधिक अतिरिक्त ट्रेनें चलाएगा
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सात मुख्य कॉरिडोर को फोर-लेन बनाकर क्षमता बढ़ाने की योजना घोषित की
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, शाम 4:12 · अपडेट शाम 7:01 · 3 मिनट का पाठ
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त्योहारों के सीजन के दौरान ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़ और वेटिंग लिस्ट की समस्या को दूर करने के लिए भारतीय रेलवे ने एक विशाल योजना तैयार की है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि रेलवे 1,000 से अधिक अतिरिक्त नियमित ट्रेनें चलाने की तैयारी कर रहा है, ताकि यात्रियों को आरक्षण प्राप्त करने में आसानी हो और यात्रा के दौरान राहत मिले।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में रेल भवन में 'वॉर रूम' की तैयारियों और कामकाज की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरे के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि रेलवे प्रणाली में निरंतर सुधार किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 1,000 से अधिक अतिरिक्त नियमित ट्रेनें चलाने से वेटिंग लिस्ट और आरक्षण की उपलब्धता को लेकर दबाव काफी कम हो जाएगा।
ट्रेनों में होने वाली देरी, नेटवर्क पर अत्यधिक दबाव, माल ढुलाई और क्षमता विस्तार की दीर्घकालिक योजनाओं पर चर्चा करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि वर्तमान में रेलवे 'पीक कंजेशन' यानी अत्यधिक दबाव के चरण से गुजर रहा है। विशेष रूप से कोयले और अन्य माल की ढुलाई में बड़ा उछाल आया है, जिससे ट्रैक पर दबाव बढ़ा है। इस समस्या के समाधान के लिए पिछले 10 वर्षों में 36,000 किलोमीटर अतिरिक्त रेल ट्रैक बिछाए गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नए ट्रैक बनाना और क्षमता बढ़ाना ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।
क्षमता बढ़ाने की विशिष्ट योजना के बारे में जानकारी देते हुए वैष्णव ने बताया कि वर्तमान में सात मुख्य रेल कॉरिडोर को 'क्वाड्रुपल' यानी फोर-लेन किया जा रहा है। इन कॉरिडोर में दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई को जोड़ने वाले रूट के साथ-साथ दिल्ली से चेन्नई, मुंबई से कोलकाता और दिल्ली से गुवाहाटी जैसे डायगोनल (तिरछे) कॉरिडोर शामिल हैं। एक बार यह फोर-लेन कार्य पूरा हो जाने के बाद, 1,000 से अधिक अतिरिक्त नियमित ट्रेनें चलाना संभव हो सकेगा।
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी नई रेलवे योजनाओं को निरंतर मंजूरी दी जा रही है, जो लगभग हर दूसरी या तीसरी कैबिनेट बैठक में देखा जाता है। सरकार की कार्यप्रणाली में निरंतर सुधार और अनुभवों से सीखने की प्रवृत्ति शामिल है। ट्रैफिक पैटर्न को समझने के लिए रेलवे ने पिछले 10 वर्षों के 'ओरिजिन-डेस्टिनेशन' (प्रारंभिक और अंतिम स्थल) डेटा का गहन विश्लेषण किया है। इस डेटा के माध्यम से यह पहचाना गया है कि किस रूट पर यात्रियों की संख्या सबसे अधिक रहती है।
यह पूरी प्रक्रिया एक व्यापक और वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित है। रेलवे चेयरमैन और उनकी टीम, जिसमें MOWD और MTRS शामिल हैं, ने इस डेटा के आधार पर एक संपूर्ण योजना तैयार की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पीक ट्रैफिक पैटर्न की पहचान कर यात्रियों की आवश्यकतानुसार ट्रेनों की संख्या बढ़ाना है, ताकि भविष्य में यात्रा अधिक सुगम हो सके।
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