काशी के अन्नपूर्णा मंदिर में दिवाली पर 10 लाख के सिक्कों का होगा वितरण
धनतेरस से अन्नकूट महोत्सव तक भक्तों को प्रसाद रूप में विभिन्न धातुओं के सिक्के मिलेंगे
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 2:42 · अपडेट सुबह 2:56 · 5 मिनट का पाठ
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धर्म और आध्यात्मिकता की नगरी काशी में दिवाली का त्योहार अत्यंत विशेष तरीके से मनाया जाता है। यहाँ दिवाली केवल एक दिन का त्योहार नहीं है, बल्कि पांच दिनों तक चलने वाला एक बड़ा महोत्सव है। इस उत्सव के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप स्थित प्राचीन माँ अन्नपूर्णा मंदिर में भक्तों के बीच लाखों रुपयों का खजाना बांटा जाता है। इस वर्ष मंदिर प्रबंधन द्वारा लगभग 8 से 10 लाख रुपयों के सिक्कों के वितरण की तैयारी की गई है।
अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, धनतेरस से शुरू होकर अन्नकूट महोत्सव तक भक्त माँ अन्नपूर्णा के स्वर्णमय स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे। मंदिर प्रशासन को उम्मीद है कि इस अवधि के दौरान लगभग 8 से 10 लाख श्रद्धालु मंदिर आएंगे। भक्त यहाँ से प्रसाद के साथ माँ का खजाना भी अपने घर ले जाएंगे, जिसमें विभिन्न धातुओं के सिक्कों का समावेश है। ऐसी मान्यता है कि माँ अन्नपूर्णा के दरबार से मिले इस खजाने को घर में रखने से कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती और परिवार में सुख-समृद्धि एवं बरकत बनी रहती है। यही कारण है कि हर साल देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालु इस अनोखी परंपरा का हिस्सा बनने काशी पहुँचते हैं।
इस वर्ष धनतेरस पर विशेष शुभ योग बन रहा है। मान्यता के अनुसार, इस दिन देश में समृद्धि रहेगी और कोष भरे रहेंगे। इस अवसर पर अभिजीत मुहूर्त के भोर के समय माँ अन्नपूर्णा का विधि-विधान से पूजन और आरती की जाएगी। इसके बाद खजाने और 21 किलो के रजत खजाने का पूजन किया जाएगा। मंदिर की खासियत यह है कि वर्ष में केवल पांच दिनों के लिए ही माँ अन्नपूर्णा की स्वर्णमय प्रतिमा के दर्शन होते हैं।
समय-सारणी के अनुसार, 6 नवंबर को धनतेरस के दिन सुबह 5 बजे से रात 11:30 बजे तक स्वर्णमय स्वरूप के दर्शन और खजाने का वितरण किया जाएगा। मंदिर बंद होने तक श्रद्धालु यह खजाना प्राप्त कर सकेंगे। इसके बाद 7 नवंबर से 10 नवंबर तक प्रतिदिन सुबह 4 बजे से रात 11:15 बजे तक भगवती अन्नपूर्णा के दर्शन किए जा सकेंगे। पांचवें दिन यानी 10 नवंबर को अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दिन मंदिर में लड्डुओं की भव्य झांकी सजाई जाएगी और रात 11:30 बजे माँ की महाआरती की जाएगी। इस आरती के बाद एक वर्ष के लिए स्वर्णमय अन्नपूर्णा के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
प्राचीन अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकरपुरी ने बताया कि धनतेरस की सुबह से माँ अन्नपूर्णा के स्वर्ण दर्शन शुरू होंगे और दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं को खजाना बांटा जाएगा। मंदिर की पहली मंजिल पर पहुँचने वाले भक्तों को सबसे पहले माँ के प्रसाद रूप में लावा दिया जाएगा, उसके बाद उन्हें खजाना दिया जाएगा और फिर श्रद्धालु स्वर्णमय माँ अन्नपूर्णा के दर्शन कर सकेंगे। महंत के अनुसार, धनतेरस के दिन सुबह 5 से रात 11:30 बजे तक खजाना बांटा जाएगा और उसके बाद लगातार चार दिनों तक दर्शन का क्रम जारी रहेगा।
पांचवें दिन आयोजित होने वाले अन्नकूट महोत्सव में माँ अन्नपूर्णा को 100 प्रकार के व्यंजन, मिठाइयां और कच्चे भोग अर्पित किए जाएंगे। पूजा संपन्न होने के बाद ये सभी प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किए जाएंगे। महंत शंकरपुरी ने आगे स्पष्ट किया कि खजाने के रूप में आठ प्रकार की धातुओं के सिक्के दिए जाते हैं। इसमें वर्तमान में चलन में मौजूद सिक्कों के साथ-साथ पुराने और चलन से बाहर हो चुके सिक्कों का भी समावेश है। इस वर्ष लगभग 8 से 10 लाख रुपयों के मूल्य के सिक्के बांटने की तैयारी है।
इस परंपरा के पीछे का इतिहास और मान्यता भी महत्वपूर्ण है। महंत शंकरपुरी ने बताया कि माँ अन्नपूर्णा के खजाने का वितरण एक प्राचीन परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ ने माँ अन्नपूर्णा से प्रसाद मांगा था। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हर साल पांच दिवसीय दिवाली महोत्सव का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है कि माँ के दरबार से मिला खजाना और भोग घर ले जाने से परिवार में समृद्धि आती है, इसलिए लोग इन सिक्कों को अत्यंत श्रद्धा के साथ अपने घर में संभालकर रखते हैं।
मंदिर प्रबंधन द्वारा श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन दिया गया है कि उन्हें बांसफाटक होकर गेट नंबर एक, ढुंढिराज की ओर से मंदिर पहुँचना होगा। धनतेरस से अन्नकूट तक के इन दिनों में मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।
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