मध्य प्रदेश के पुलिस अधिकारी की हत्या के बाद गुजरात से जुड़ा शराब नेटवर्क उजागर
मध्य प्रदेश में पुलिस अधिकारी पर ट्रक चढ़ाकर हत्या करने वाले सिंडिकेट में कांग्रेस नेता और गुजरात के ऑपरेटर के खिलाफ जांच।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 7:14 · अपडेट सुबह 7:22 · 4 मिनट का पाठ
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मध्य प्रदेश में रविवार देर रात वाहन जांच के दौरान एक पुलिस अधिकारी की हत्या के मामले की जांच में गुजरात से जुड़ा अंतरराज्यीय शराब तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है। खतेगढ़ पुलिस स्टेशन के प्रभारी दिलीप पुरी की हत्या के मामले की जांच के दौरान अधिकारियों ने बताया कि यह सिंडिकेट मध्य प्रदेश के लाइसेंस प्राप्त आउटलेट्स से शराब प्राप्त कर उसे गुजरात भेजता था। शराब की हेराफेरी के लिए इस नेटवर्क द्वारा विशेष रूप से तैयार वाहनों और गुप्त मार्गों का उपयोग किया जाता था।
यह घटना देवास जिले के संदलपुर फाटा के पास इंदौर-बेतुल हाईवे पर हुई। पुलिस को हरदा जिले के तिमरनी से गुजरात की ओर जा रही शराब की बड़ी खेप के बारे में सूचना मिली थी, जिसके कारण जब दिलीप पुरी एक ढाबे के पास खड़े ट्रक का निरीक्षण करने गए, तब यह घटना घटी। पुलिस के अनुसार, जांच से बचने के लिए ड्राइवर ने अचानक ट्रक की गति बढ़ाई और जानबूझकर पुरी के ऊपर चढ़ा दिया। इस हमले में कांस्टेबल सोहन जाट भी घायल हो गए थे। बाद में संदलपुर के पास एक लावारिस ट्रक मिला, जिसके अंदर गुप्त खानों में छिपाकर रखी गई 1,800 लीटर से अधिक शराब बरामद हुई और पुलिस ने उस ट्रक को जब्त कर लिया।
जांच में पता चला है कि ये तस्कर मध्य प्रदेश के लाइसेंस प्राप्त स्टोर का उपयोग करते थे। स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस उपेंद्र जैन ने बताया कि तिमरनी में पतेन्द्र जैसवाल से जुड़े लाइसेंस प्राप्त स्टोर से शराब ली जाती थी और फिर उसे सप्लायर्स, ट्रांसपोर्टर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के एक व्यवस्थित नेटवर्क के माध्यम से भेजा जाता था। ये तस्कर ट्रक में विशेष प्रकार के चैंबर बनाते थे ताकि शराब के कार्टन को कानूनी माल के नीचे छिपाया जा सके। इसके अलावा, पुलिस की आवाजाही पर नजर रखने और माल को सुरक्षित पहुंचाने के लिए एस्कॉर्ट वाहनों का भी उपयोग किया जाता था। यह शराब पश्चिम मध्य प्रदेश के जिलों से होते हुए गुजरात की ओर भेजी जाती थी।
देवास के पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने बताया कि खतेगढ़ विधानसभा के प्रभारी और कांग्रेस नेता राहुल जैसवाल इस तस्करी नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार है। वह शराब की हेराफेरी का संचालन और वित्तीय लेनदेन संभालता था। इस नेटवर्क में राहुल जैसवाल, इंदौर के मनीष जैसवाल और गुजरात के मोहिन जैसवाल की 30-30 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जबकि लिकर कॉन्ट्रैक्टर पतेन्द्र जैसवाल के पास केवल 10 प्रतिशत हिस्सा था। राहुल जैसवाल पूरे व्यवसाय का पैसा इकट्ठा कर सदस्यों के बीच बांटता था। इंदौर निवासी विजय राव नामक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है, जिसने स्वीकार किया है कि वह राहुल जैसवाल के लिए इस नेटवर्क में काम करता था। अब तक इस जांच में गुजरात के ऑपरेटर सहित कुल सात लोगों की भूमिका सामने आई है और कांग्रेस नेता सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस संबंध में एक विशेष बैठक की और राज्य के पुलिसकर्मियों को शराब माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शराब की हेराफेरी, भंडारण और बिक्री को रोकने के लिए पूरे राज्य में सघन अभियान चलाया जाए और इन गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।
गुजरात में 1960 से शराबबंदी कानून लागू है।
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