विमल इलायची विज्ञापन मामले में अजय देवगन ने मुंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
FDA द्वारा दी गई कारण बताओ नोटिस को अजय देवगन ने मनमाना बताते हुए दी चुनौती
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
31 अक्टूबर 2026, शाम 6:23 · 3 मिनट का पाठ
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बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने 'विमल इलायची' के विज्ञापनों में दिखने के लिए महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) द्वारा दी गई कारण बताओ नोटिस को चुनौती देते हुए मुंबई हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। अजय देवगन ने एजेंसी की इस कार्रवाई को मनमाना बताया है। The Hindu के रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठ की संयुक्त बेंच द्वारा अजय देवगन की इस याचिका पर 4 नवंबर के दिन सुनवाई होने की संभावना है।
FDA द्वारा अजय देवगन को दी गई नोटिस में यह आरोप लगाया गया है कि 'विमल इलायची' के विज्ञापन 'विमल पान मसाला' का सरोगेट प्रमोशन हैं। महाराष्ट्र में विमल पान मसाला एक चबाने योग्य उत्पाद है जो राज्य में प्रतिबंधित है। The Times of India के रिपोर्ट के अनुसार, इन अभिनेताओं को अपने विज्ञापन वापस लेने होंगे और अपने एंडोर्समेंट अनुबंधों के बारे में खुलासा करना होगा, क्योंकि विमल पान मसाला को इस क्षेत्र में प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद माना जाता है।
अजय देवगन की याचिका में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि यह नोटिस उत्पादक कंपनी के बजाय एक अभिनेता के रूप में उन्हें मनमाने ढंग से दी गई है। इस मामले में केवल अजय देवगन ही नहीं, बल्कि शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ को भी समान नोटिस दी गई है, क्योंकि वे भी इन विज्ञापनों में दिखाई दिए थे। FDA ने पहले दावा किया था कि 'विमल इलायची' अभियान प्रतिबंधित पान मसाला उत्पादों के लिए सरोगेट विज्ञापन के समान है। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि यह ब्रांड गुटखा और पान मसाला की बिक्री से जुड़ा हुआ है, जो महाराष्ट्र में प्रतिबंधित है।
FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने 30 अक्टूबर, 2026, शुक्रवार के दिन बताया कि राज्य के नियमों के उल्लंघन करने के आरोप के तहत खान, देवगन और श्रॉफ के खिलाफ कार्रवाई पूरी हो गई है। NDTV के रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अभिनेताओं द्वारा नियमों का उल्लंघन होना पाया गया है। मुंढे ने आगे जोड़ा कि इस मामले को अगले हफ्ते न्यायिक निर्णय के लिए भेजा जाएगा। हालांकि अजय देवगन ने हाईकोर्ट से संपर्क किया है, फिर भी विभाग ज्वाइंट कमिश्नर के समक्ष अपनी कार्रवाई जारी रखेगा, ऐसा मुंढे ने बताया।
इस पूरे विवाद में यह मुद्दा मुख्य है कि विमल इलायची के विज्ञापनों द्वारा ऐसे उत्पादों को प्रोत्साहन दिया गया है जो महाराष्ट्र में कानूनी रूप से प्रतिबंधित हैं। FDA के अनुसार, इन विज्ञापनों द्वारा प्रतिबंधित पान मसाला का परोक्ष रूप से प्रमोशन किया गया है। अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि अभिनेताओं को इस प्रकार के विज्ञापनों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जा सकता है या नहीं।
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