फर्जी पीएम वाई-फाई योजना के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी, कोलकाता से 6 गिरफ्तार
पुलिस ने डलहौजी इलाके के कॉल सेंटर पर छापेमारी कर 5 महिलाओं सहित कई लोगों को दबोचा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, शाम 4:58 · 4 मिनट का पाठ
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कोलकाता पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी प्रधानमंत्री वाई-फाई योजना के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पकड़े गए 6 लोगों में 5 महिलाएं शामिल हैं। पुलिस को एक गुप्त सूत्र से सटीक जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर बुधवार को कोलकाता के डलहौजी इलाके में गवर्नमेंट प्लेस (ईस्ट) स्थित एक कॉल सेंटर पर छापेमारी की गई। इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने इस पूरे घोटाले में संलिप्त छह व्यक्तियों को गिरफ्तार किया।
दूसरी ओर, वडोदरा में भी प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के नाम पर धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। संदेश की रिपोर्ट के अनुसार, सुभानपुरा इलाके में सरकारी आवास योजना की कमर्शियल दुकान सस्ते दाम पर दिलाने का लालच देकर एक नागरिक से ₹9.05 लाख ठग लिए गए। इस घोटाले में भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ता के पुत्र कश्यप जोशी और उसके गिरोह पर आरोप हैं। आरोपी कश्यप जोशी ने अपनी पहचान 'गुजरात हाउसिंग बोर्ड' के एक प्रभावशाली अधिकारी के रूप में बताई थी और सुभानपुरा आवास योजना में दुकान खाली होने की बात कहकर शिकायतकर्ता का विश्वास जीता था। इस गिरोह ने वडोदरा नगर निगम (VMC) और सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के फर्जी रबर स्टैम्प और बोगस हस्ताक्षरों का उपयोग करके फर्जी अलॉटमेंट और रजिस्ट्री के दस्तावेज तैयार किए थे। फॉर्म फीस, अलॉटमेंट डिपॉजिट और सरकारी शुल्क के बहाने अलग-अलग चरणों में कुल ₹9.05 लाख हड़प लिए गए। जब लंबे समय तक दुकान का कब्जा नहीं मिला, तो पीड़ित व्यक्ति ने कार्यालय में जांच की, तब यह घोटाला उजागर हुआ। इस मामले में गोरवा पुलिस स्टेशन में चार व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
इसी बीच, मुंबई पुलिस के साउथ रीजन साइबर पुलिस ने नागपुर से तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जो शेयर ट्रेडिंग इन्वेस्टमेंट फ्रॉड रैकेट चला रहे थे। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, 2 नवंबर 2026 को अमित दिलीपराव काले, रितिक शैलेश धर्गवे और अनिरुद्ध सतीश उके को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला है कि इन तीनों ने मिलकर 'ग्रेन गार्डन डिलाइट प्राइवेट लिमिटेड' नाम की एक बोगस कंपनी बनाई थी और इसके बैंक खाते का उपयोग साइबर धोखाधड़ी के माध्यम से प्राप्त धन के हस्तांतरण के लिए करते थे। इस गिरफ्तारी के बाद भारत भर के 73 साइबर क्राइम मामलों के तार जुड़े हैं, जिनमें मुंबई के 6 मामले शामिल हैं।
मुंबई पुलिस की जांच तब शुरू हुई जब शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड के एक मामले में ₹24.75 लाख की राशि नागपुर की सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की जारीपटका शाखा में खोले गए एक करंट अकाउंट में ट्रेस हुई। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) की जानकारी और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस टीम ने जारीपटका इलाके में छापेमारी कर कंपनी के डायरेक्टर रितिक धर्गवे को दबोच लिया। जांच में सामने आया कि मुख्य सूत्रधार अमित काले और अनिरुद्ध उके ने फर्जी किराया समझौतों और अन्य दस्तावेजों के जरिए यह शेल कंपनी बनाई थी। काले, धर्गवे के नाम पर पंजीकृत सिम कार्ड का उपयोग अपने मोबाइल में कर धोखाधड़ी के लेनदेन और नेटवर्क के साथ समन्वय स्थापित करता था। पुलिस ने 11 चेकबुक, 25 सिम कार्ड, 11 रबर स्टैम्प, डेबिट-एटीएम कार्ड, क्यूआर कोड और पैन कार्ड जब्त किए हैं। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2), 338, 61(2), 340 और आईटी एक्ट की धारा 66सी और 66डी के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह पूरा ऑपरेशन सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर नंदकुमार गोपाल, इंस्पेक्टर भगवान और एएसपी रामदास गोपाल के नेतृत्व में चलाया गया था।
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