नकली दवाओं के नेटवर्क के खिलाफ ED की कार्रवाई, पांच स्थानों पर तलाशी अभियान
एजेंसी ने आरोपी के ₹9 लाख के बैंक खाते फ्रीज किए और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
3 नवंबर 2026, सुबह 7:58 · अपडेट सुबह 8:05 · 3 मिनट का पाठ
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कर्नाटक में नकली दवाओं के बड़े नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने इस मामले में बेंगलुरु में पांच अलग-अलग स्थानों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की है। इस जांच के दौरान, एक आरोपी के लगभग ₹9 लाख वाले बैंक खाते को भी फ्रीज किया गया है।
यह पूरी कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत की गई है। यह मामला तावारेकेरे पुलिस स्टेशन में 18 अगस्त, 2026 को दर्ज की गई एफआईआर (FIR) से उत्पन्न मनी लॉन्ड्रिंग की निरंतर चल रही जांच के हिस्से के रूप में किया गया है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318(4) और कॉपीराइट एक्ट, 1957 की धारा 63 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। चूंकि ये अपराध PMLA के तहत शेड्यूल्ड अपराध हैं, इसलिए ED ने एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
इस मामले की शुरुआत 18 अगस्त को सी.के. तांड्या गांव में स्थित एक आवासीय संपत्ति पर ड्रग कंट्रोलिंग अथॉरिटी और पुलिस कर्मियों द्वारा की गई संयुक्त छापेमारी से हुई थी। उस समय आरोपियों के पास वैध लाइसेंस, परमिट या प्राधिकरण के बिना दवाओं और फार्मास्युटिकल ड्रग्स का स्टॉक पाया गया था और वे संग्रहीत दवाओं के लेबल बदल रहे थे। वर्तमान में बेंगलुरु के जॉइंट कमिश्नर (वेस्ट) वामसी कृष्णा के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) इस मामले की जांच कर रही है।
ED की जांच के अनुसार, आर. प्रशांत नामक व्यक्ति ने बिदाड़ी के पास एक फार्महाउस का इंतजाम किया था, जहां आवश्यक ड्रग लाइसेंस या परमिट के बिना दवाओं का उत्पादन, रिपैकेजिंग और रीलेबलिंग किया जा रहा था। विभिन्न राज्यों के उत्पादन केंद्रों से सस्ती बल्क फार्मास्युटिकल फॉर्मुलेशन प्राप्त कर उन्हें नई शीशियों में रिपैक किया जाता था। इसके बाद, इन शीशियों पर धोखाधड़ी से महंगी फाइजर एंटीबायोटिक्स के लेबल लगाए जाते थे, जिनमें जाविसेफ्टा (Zavicefta) और एम्ब्लेवियो (Emblaveo) शामिल हैं। वास्तव में इन शीशियों में केवल जेनेरिक दवाएं थीं, लेकिन उन पर फाइजर ब्रांड का नाम वाले लेबल लगाए गए थे।
इन नकली दवाओं का वितरण M/s DM फार्मास्युटिकल्स द्वारा किया जाता था और उन्हें M/s कृपा हेल्थकेयर को सप्लाई किया जाता था। इसके बाद कृपा हेल्थकेयर इन दवाओं को अन्य फार्मास्युटिकल संस्थाओं और अस्पतालों को उपलब्ध कराती थी। जांच में सामने आया है कि पकड़े न जाने के लिए इन नकली दवाओं को असली दवाओं के साथ मिला दिया जाता था, जैसा कि ED ने बताया है।
तलाशी अभियान के दौरान, एजेंसी ने वीरेश कुमार के बैंक खाते फ्रीज किए हैं जिसमें लगभग ₹9 लाख थे। इसके अलावा, विभिन्न व्यक्तियों के डिजिटल उपकरण, रिकॉर्ड और अन्य आपराधिक दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। एजेंसी अब इस कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के विस्तार को पहचानने और अपराध से अर्जित आय का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है।
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