मल्लिकार्जुन खड़गे के विवादास्पद बयान से राजनीतिक घेराव, भाजपा ने बेंगलुरु में किया विरोध प्रदर्शन
पटना में प्रधानमंत्री मोदी के बारे में की गई टिप्पणी के बाद भाजपा ने देशव्यापी विरोध और माफी की मांग की
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
30 अक्टूबर 2026, दोपहर 1:27 · अपडेट रात 10:27 · 7 मिनट का पाठ
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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंध में की गई टिप्पणी को लेकर देशभर में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित कर खड़गे से बिना शर्त माफी की मांग की है। इस विवाद की शुरुआत बिहार के पटना में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय कृष्णा सिंह की 139वीं जयंती के समारोह के दौरान हुई थी।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पटना के इस कार्यक्रम के दौरान जब खड़गे भाषण दे रहे थे, तब जनता में से एक व्यक्ति ने टिप्पणी की कि 'मोदी कहीं नहीं जाएंगे'। इसके जवाब में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि, "मोदी का बाप भी जाएगा"। इस बयान का वीडियो एएनआई (ANI) द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया था, जिससे विवाद बढ़ गया।
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स (X) पर लिखा कि, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पटना में मोदी जी के पिता के बारे में असभ्य टिप्पणी करके सभी मर्यादाएं तोड़ दी हैं। शाह ने आगे जोड़ा कि, कांग्रेस पार्टी बार-बार मोदी जी या उनके परिवार के विरुद्ध अपशब्दों का उपयोग करती है। उन्होंने याद दिलाया कि कभी मोदी जी की माता का अपमान किया गया है, कभी उन्हें 'मौत का सौदागर' कहा गया है, तो कभी उनकी गरीबी का मजाक उड़ाने के लिए 'चायवाला' कहा गया है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस हर दिन असभ्यता की सीमा पार करती रही है।
बेंगलुरु में इस बयान के विरुद्ध भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। द न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को बेंगलुरु में फ्रीडम पार्क के पास भाजपा कार्यकर्ताओं की मार्च को रोके जाने पर पुलिस द्वारा कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। इस विरोध प्रदर्शन में विधानसभा के विपक्ष के नेता आर. अशोक, विधान परिषद के विपक्ष के नेता चलावड़ी नारायणस्वामी, राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया और पूर्व डिप्टी सीएम सी.एन. अश्वथ नारायण सहित अन्य नेता शामिल थे। जब प्रदर्शनकारी निर्धारित क्षेत्र के बाहर मुख्य सड़क पर जाना चाहते थे, तब पुलिस द्वारा बैरिकेड्स लगाकर उनका रास्ता रोका गया और तनाव की स्थिति पैदा हो गई। बाद में सभी नेताओं को छोड़ दिया गया।
विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए आर. अशोक ने खड़गे और गृहमंत्री प्रियांक खड़गे की जोड़ी का मजाक उड़ाते हुए कहा कि, वे राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कांग्रेस की हार के लिए जिम्मेदार हैं। अशोक ने कहा कि खड़गे को इस स्तर तक नीचे नहीं गिरना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि, खड़गे चलने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और वैसे ही कांग्रेस भी चलने में असमर्थ है, जो 'कॉकरोच जनता पार्टी' के साथ जा रही है। अशोक ने आगे कहा कि खड़गे का बयान कांग्रेस की निचली संस्कृति दर्शाता है और वे मोदी के प्रति ईर्ष्या और गुस्से के कारण इस तरह बोले हैं। उन्होंने कहा कि खड़गे ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है और यदि उनके पास आत्मसम्मान है तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने प्रेस से बात करते हुए कहा कि, खड़गे ने प्रधानमंत्री के बारे में हल्के शब्दों में बात की है, जो कांग्रेस और उसके नेताओं की हताशा दर्शाता है। कांग्रेस तीसरी बार मोदी जी के पुनः निर्वाचित होने को स्वीकार नहीं कर पा रही है।
केंद्रीय उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने भी खड़गे के बयान को राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन और अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा कि खड़गे के शब्द उनकी छिपी हुई क्रूर मानसिकता दर्शाते हैं और मोदी जी के पिता को निशाना बनाने वाला बयान असहनीय है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे सार्वजनिक जीवन के बाद भी इस प्रकार की क्षुद्रता माफ करने योग्य नहीं है।
दूसरी तरफ, कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा ने इस बयान का बचाव करते हुए कहा कि, 'मोदी का बाप' का अर्थ जैविक पिता नहीं, बल्कि वैचारिक पिता यानी पार्टी संस्था आरएसएस है, जो भी जाएंगे। उन्होंने जोड़ा कि भाजपा को पहले उत्तराखंड के 'शुद्धिकरण' मुद्दे पर माफी मांगनी चाहिए। टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने भी एक्स पर लिखा कि, अगर मोदी आएंगे तो उनके पिता भी जाएंगे।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके कहा कि, "दुख के साथ बताना पड़ता है सभी भारत विरोधी शक्तियों को, पर... मोदी कहीं नहीं जाएगा"।
इस विवाद के बीच बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक विशेषज्ञ विवादित बयानों के पीछे के कारणों पर चर्चा कर रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी ने बताया कि नेता अक्सर लाइमलाइट में आने और अपनी ताकत दिखाने के लिए व्यक्तिगत हमले करते हैं। रशीद किदवई ने बताया कि ऐसे बयान लोगों का ध्यान खींचने और राजनीतिक चर्चा की दिशा बदलने के लिए किए जाते हैं। उन्होंने नोट किया कि खड़गे के बयान के कारण विपक्षी दल जिस मुद्दे पर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा था, वह मुद्दा पीछे रह गया है।
कानूनी पहलुओं पर बात करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जितेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि, यदि किसी बयान से भावनाएं आहत हों या शांति भंग हो, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, संसद और विधानसभा में नेताओं को संविधान के अनुच्छेद 105(2) और 194(2) के तहत विशेष संरक्षण मिलता है।
इस दौरान, कांग्रेस और इंडिया (INDIA) ब्लॉक द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध भी आंदोलन किया जा रहा है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस द्वारा दिल्ली के रामलीला मैदान में 'मॉक संसद' का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार करेंगी, जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव पेश करेंगे और राहुल गांधी समापन भाषण देंगे। यह कार्यक्रम 1 नवंबर को आयोजित होने वाली 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली से पहले किया जा रहा है, जिसमें विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यपद्धति और मतदाताओं के नाम काटने के मुद्दे पर विरोध कर रहा है।
राहुल गांधी ने भी विरोध प्रदर्शन के संबंध में अपील करते हुए कहा कि, यह किसी एक पार्टी का मार्च नहीं बल्कि भारत की आत्मा को बचाने के लिए मार्च है। उन्होंने जोड़ा कि टॉप लेवल से वोट की चोरी हो रही है और यह आंदोलन जारी रहेगा।
इस समाचार का स्रोत
- The Times of India
- The Hindu
- Hindustan Times
- BBC हिंदी
- दैनिक भास्कर
- Hindustan Times
- The Times of India
- Business Standard
- The Hindu
- The Hindu
- The Hindu
- The Hindu
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