पीएनबी में ₹35 करोड़ की धोखाधड़ी के घोटाले की जांच शुरू
झारखंड के बैंक खातों में धनराशि ट्रांसफर होने का विवरण सामने आने के बाद पूर्व शाखा प्रबंधक की भूमिका पर सवाल
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, सुबह 10:39 · 3 मिनट का पाठ
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पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की सेक्टर पाई-1 एएचसीआर शाखा में लगभग ₹35 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के मामले में अब पूर्व शाखा प्रबंधक सहित अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस घोटाले में झारखंड के बैंक खातों में धनराशि ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद खाताधारकों और किसान संगठनों ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुलिस जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि पूर्व शाखा प्रबंधक मूल रूप से झारखंड के हजारीबाग के निवासी हैं। यह विवरण सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। खाताधारकों का आरोप है कि बैंक प्रशासन केवल निलंबित कर्मचारी दीपांशी पर पूरी जिम्मेदारी डालकर अन्य अधिकारियों की भूमिका की अनदेखी कर रहा है। खाताधारकों का कहना है कि पूर्व शाखा प्रबंधक सहित इस मामले से जुड़े सभी बैंक कर्मचारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए ताकि धन के लेनदेन और कथित धोखाधड़ी की पूरी कड़ी सामने आ सके।
किसान नेता ब्रजेश भाटी ने आरोप लगाया है कि इस मामले में केवल दीपांशी के विरुद्ध कार्रवाई करके अन्य बैंक कर्मचारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। बैंक प्रशासन की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पूर्व शाखा प्रबंधक और अन्य अधिकारियों के स्तर पर क्या जांच की गई है। किसान नेता के अनुसार, अधिकांश राशि आशुतोष पाठक के कहने से ट्रांसफर की गई थी। आशुतोष पाठक भी झारखंड का निवासी बताया जा रहा है, इसलिए उसके संपर्कों, बैंक खातों और लेनदेन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करना आवश्यक है।
बैंक द्वारा की गई शिकायत के अनुसार, इस पूरे मामले की जानकारी 16 सितंबर 2026 को हुई थी। एक महिला खाताधारक अपने पति और बेटी के साथ पासबुक अपडेट कराने के लिए शाखा में पहुंची थी। जब पासबुक अपडेट की गई तो उसमें ऐसे तीन लेनदेन दर्ज थे जिनकी जानकारी उस परिवार को नहीं थी। इन तीन संदिग्ध लेनदेन के डेबिट वाउचर का रिकॉर्ड बैंक को नहीं मिल सका है।
जब महिला ने इस संबंध में शाखा प्रमुख से मिलने की मांग की, तो उस समय वे उपस्थित नहीं थे। आरोप है कि इस दौरान दीपांशी ने उस परिवार को ये लेनदेन सही होने का विश्वास दिलाने का प्रयास किया था। हालांकि, बाद में महिला के पति ने इस संबंध में शाखा प्रमुख से शिकायत की थी। इस घटना के बाद ही इस बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है और अब जांच के केंद्र में बैंक के अन्य उच्च अधिकारी भी आ गए हैं।
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