केरल संस्कृत यूनिवर्सिटी के छात्रों ने परीक्षा पर प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए 16 निलंबित छात्रों ने तत्काल सुनवाई की मांग की
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 9:08 · 3 मिनट का पाठ
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केरल की कलाडी संस्कृत यूनिवर्सिटी के 16 निलंबित छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन छात्रों ने केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा दिए गए उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें परीक्षाओं में बैठने पर प्रतिबंध लगाया गया था। परीक्षाओं के शुरू होने में अब केवल कुछ ही घंटे शेष हैं, इसलिए छात्रों ने अदालत से तत्काल सुनवाई की मांग की है। उनकी यह याचिका आज भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, इन छात्रों की ओर से एडवोकेट के. आर. सुभाष चंद्रन पैरवी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय इन छात्रों के शैक्षणिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यदि याचिका स्वीकार नहीं की गई तो वे अपनी परीक्षाएं देने का अवसर खो सकते हैं।
इस पूरे विवाद की शुरुआत 13 अगस्त को कैंपस में हुए एक विरोध प्रदर्शन से हुई थी। आरोप है कि इस प्रदर्शन के दौरान यूनिवर्सिटी की वाइस-चांसलर डॉ. सिसा थॉमस पर शारीरिक हमला किया गया था। इस घटना के बाद यूनिवर्सिटी द्वारा 16 छात्रों को निलंबित कर दिया गया था। इन निलंबित छात्रों में 10 पीएचडी शोधकर्ता हैं, जबकि अन्य 6 छात्र परीक्षाओं में बैठने के पात्र थे।
कानूनी प्रक्रिया की बात करें तो, इससे पहले केरल हाईकोर्ट के सिंगल जज द्वारा एक आदेश दिया गया था, जिसमें निलंबित छात्रों को परीक्षाओं में बैठने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने इस सिंगल-जज ऑर्डर को चुनौती दी थी। यूनिवर्सिटी ने अदालत में तर्क दिया था कि निलंबित छात्र परीक्षा में बैठने के लिए आवश्यक अनिवार्य उपस्थिति की शर्त पूरी नहीं करते हैं। इन दलीलों के आधार पर, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पिछले सिंगल-जज के आदेश को रद्द कर दिया और छात्रों को मिली राहत वापस ले ली थी।
इस बीच, यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट द्वारा एक प्रस्ताव रखा गया था। सिंडिकेट ने 16 में से 12 छात्रों को इस शर्त पर बहाल करने की पेशकश की थी कि उन्हें अपनी गलती के लिए माफीनामा (अपोलॉजी लेटर) जमा करना होगा। लेकिन, छात्रों ने यूनिवर्सिटी के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।
दूसरी ओर, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने यूनिवर्सिटी कैंपस में अपना विरोध और तेज कर दिया है। SFI द्वारा एक विवादास्पद स्ट्रीट स्किट (नाटक) प्रस्तुत किया गया, जिसमें एक नकली अंतिम संस्कार (मॉक फ्यूनरल) का दृश्य दिखाया गया था। इससे पहले अगस्त महीने में इसी तरह के नाटक ने भारी हंगामा खड़ा किया था और वह छात्रों के निलंबन का एक मुख्य कारण बना था।
वर्तमान में SFI यूनियन ने यूनिवर्सिटी द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई और हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में फिर से वही नकली अंतिम संस्कार का नाटक खेला है। SFI नेताओं ने स्पष्ट किया है कि उनका यह आंदोलन जारी रहेगा।
अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर हैं, क्योंकि परीक्षाओं का समय नजदीक होने के कारण अदालत का निर्णय ही तय करेगा कि इन छात्रों को परीक्षा देने का मौका मिलेगा या नहीं।
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