गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कार्यकर्ता प्रणब डोले की एनएसए के तहत हिरासत रद्द की
काजीरंगा नेशनल पार्क के पास होटल प्रोजेक्ट के विरोध प्रदर्शन के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 1:09 · अपडेट दोपहर 1:44 · 3 मिनट का पाठ
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गुवाहाटी हाईकोर्ट की एक पीठ ने शुक्रवार को असम के कार्यकर्ता प्रणब डोले की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत रद्द करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी प्रणब डोले का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों में से एक दीपेश अग्रवाल ने दी। उल्लेखनीय है कि नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत सरकार को किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमे के एक वर्ष तक लंबी अवधि के लिए हिरासत में रखने का अधिकार मिलता है। इस मामले में कोर्ट के फैसले की कॉपी अभी तक उपलब्ध नहीं हुई है।
घटनाक्रम के अनुसार, प्रणब डोले की गिरफ्तारी 12 जुलाई को की गई थी। यह गिरफ्तारी असम में काजीरंगा नेशनल पार्क से सटे ईगल पथार गांव में एक होटल प्रोजेक्ट के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में भाग लेने के कुछ दिनों बाद की गई थी। पुलिस द्वारा उन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस के अनुसार, डोले ने प्रदर्शन के दौरान टी ट्राइब्स म्यूजियम के परिसर में अवैध रूप से प्रवेश किया था और उसके बाद उसी क्षेत्र में स्थित एटीडीसी (असम टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के मौजूदा प्रोजेक्ट में घातक हथियारों के साथ घुसपैठ की थी।
इस मामले में 29 जुलाई को गोलाघाट की सत्र अदालत ने प्रणब डोले को जमानत मंजूर की थी। जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा था कि जांच अधिकारी ने मुख्य गवाहों के बयान पहले ही दर्ज कर लिए हैं और आरोपी द्वारा सबूत छिपाने या उनके साथ छेड़छाड़ करने की कोई संभावना नहीं है। हालांकि, जमानत मिलने के एक दिन बाद ही राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने डोले को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत हिरासत में ले लिया था।
सरकार ने यह नई कार्रवाई करते समय आरोप लगाया था कि डोले ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) के उल्लंघन में संदिग्ध स्रोतों से "संदिग्ध विदेशी लेनदेन" किए थे। इस नई हिरासत के कारण, सत्र अदालत के जमानत आदेश के बावजूद प्रणब डोले जेल से मुक्त नहीं हो सके थे।
इस पूरे घटनाक्रम पर अगस्त महीने में कांग्रेस पार्टी ने तीखे हमले किए थे। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि असम सरकार द्वारा डोले के खिलाफ इस कानून का उपयोग करना भाजपा की एक "बढ़ती प्रवृत्ति" का हिस्सा है, जिसमें विपक्षी दलों और असहमति की आवाजों को दबाने के लिए असाधारण कानूनों का हथियार के रूप में उपयोग किया जाता है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने राज्य सरकार द्वारा डोले पर लगाए गए आरोपों को "अस्पष्ट और अनुमानों पर आधारित" बताया था।
विपक्षी सांसद जयराम रमेश ने आगे कहा कि यह एक ज्ञात तरीका है जिसे नरेंद्र मोदी सरकार अपनाती है। उन्होंने सबूत के तौर पर उल्लेख किया कि अप्रैल महीने में उत्तर प्रदेश में भी कम से कम दो अन्य व्यक्तियों को इसी कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। अब गुवाहाटी हाईकोर्ट के इस निर्णय से प्रणब डोले की एनएसए के तहत हिरासत रद्द हो गई है। स्क्रॉल की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में वकील दीपेश अग्रवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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