संघीय रक्षा क्षमता और वैश्विक भागीदारी बढ़ाने के लिए विस्व-२०२६ का उद्घाटन
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने नई दिल्ली में विस्व-२०२६ का उद्घाटन कर आत्मनिर्भर रक्षा इकोसिस्टम पर जोर दिया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
1 नवंबर 2026, सुबह 6:23 · 5 मिनट का पाठ
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रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने ३० अक्टूबर, २०२६ को नई दिल्ली के मानेकशा सेंटर में विस्व-२०२६ (VISV-2026) का उद्घाटन किया था। यह कार्यक्रम रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा सेंटर फॉर ज्वाइंट वॉरफेयर स्टडीज (CENJOWS) के सहयोग से आयोजित किया गया था। विस्व-२०२६ यानी विजन, इनोवेशन, सिनर्जी और वैल्यूज। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय "रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन, वैश्विक भागीदारी को मजबूत बनाना" रखा गया था।
PIB दिल्ली की रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश की स्वदेशी रक्षा तकनीक क्षमताओं को प्रदर्शित करना और मित्र साझेदार देशों के साथ संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना है। इस मंच के माध्यम से रक्षा अनुसंधान, विकास और उत्पादन में भारत की प्रगति से अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को परिचित कराया जाएगा। साथ ही तकनीक आधारित सहयोग और सामरिक भागीदारी के नए रास्ते तलाशने के लिए रक्षा संस्थाओं, उद्योग, शिक्षा और राजनयिक समुदाय के प्रतिनिधियों को एकसाथ लाने का प्रयास किया गया है।
उद्घाटन अवसर पर संजय सेठ ने विस्व के चार स्तंभों - विजन, इनोवेशन, सिनर्जी और वैल्यूज - को भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विस्तार के लिए मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में पहचाना था। उन्होंने समझाया कि विजन भविष्य की रक्षा जरूरतों का अनुमान लगाने का मार्ग प्रशस्त करता है, जबकि इनोवेशन अनुसंधान को प्रभावी तकनीक और समाधानों में परिवर्तित करता है। सिनर्जी सशस्त्र बलों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को एकसाथ लाती है, और वैल्यूज सहयोग में विश्वास, आपसी सम्मान और जिम्मेदारी को मजबूत बनाती है।
मंत्री ने 'विकसित भारत@२०४७' के लक्ष्य की ओर भारत की यात्रा के दौरान तकनीक रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर रक्षा इकोसिस्टम बनाने के लिए देश की प्रतिबद्धता पर जोर दिया था। उन्होंने स्वदेशी अनुसंधान, डिजाइन, विकास और उत्पादन क्षमताओं को मजबूत बनाने में 'आत्मनिर्भर भारत' की भूमिका के बारे में प्रकाश डाला था और बताया था कि तकनीक आत्मनिर्भरता भारत को अंतरराष्ट्रीय भागीदारी में अधिक सार्थक योगदान देने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने उभरती रक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अनुसंधान और तकनीक प्रगति को प्रभावी समाधानों में बदलने के महत्व पर भी बात की थी।
अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के बीच भारत के रक्षा समाधानों के बारे में अधिक जागरूकता लाने और साझेदार देशों के साथ संपर्क आसान बनाने के लिए श्री संजय सेठ ने अरबी, स्पेनिश और फ्रेंच भाषाओं में DRDO के उत्पादों की विदेशी भाषा संकलन पुस्तिका (Foreign Language Compendium) भी जारी की थी। कार्यक्रम में "साझेदार देशों के लिए DRDO रक्षा समाधान: तकनीक से सामरिक भागीदारी तक" विषय पर एक सेमिनार भी आयोजित हुआ था।
टेक्निकल सत्रों में DRDO की विभिन्न क्षमताओं को शामिल किया गया था, जिसमें एयरोनॉटिकल सिस्टम्स, जमीन और नौका सैन्य प्रणालियां, सेंसिंग और कम्युनिकेशन, मिसाइल सिस्टम, माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटेशनल सॉल्यूशंस और सैनिक सहायता प्रणालियां शामिल हैं। इसके अलावा, एक पैनल चर्चा में भारत और मित्र देशों के बीच संयुक्त सहयोग, क्षमता विकास और आपसी लाभकारी भागीदारी के अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
रक्षा सचिव और DRDO के अध्यक्ष श्री राजेश्वर कुमार सिंह ने भारत की रक्षा सज्जा और वैश्विक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए तकनीक क्षमता और संस्थागत भागीदारी के एकीकरण के महत्व पर जोर दिया था। रक्षा उत्पादन सचिव श्री संजीव कुमार ने बताया था कि भारत पारंपरिक 'खरीददार-विक्रेता' संबंधों से आगे बढ़कर संयुक्त विकास, सह-उत्पादन और उत्पादन भागीदारी की ओर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आगे जोड़ा कि बेंगलुरु में आयोजित होने वाले 'एरो इंडिया २०२७' के लिए अंतरराष्ट्रीय समकक्षों को उच्च स्तरीय आमंत्रण भेजे जा रहे हैं।
विदेश सचिव श्री विक्रम मिस्री ने बदलते भू-राजनीतिक और तकनीक वातावरण में रक्षा कूटनीति के बदलते स्वरूप पर जोर दिया था, जिसमें सामरिक स्वायत्तता, मल्टी-अलाइनमेंट और विश्वास जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है। कार्यक्रम में "संयुक्त सहयोग और भागीदारी के अवसर" विषय पर एक संवादात्मक चर्चा भी हुई थी, जिसमें रक्षा उत्पादन विभाग, DRDO, SIDM, भारतीय उद्योग और रक्षा अताशे के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस चर्चा ने रक्षा निर्यात, टेक्निकल विनिमय, उत्पादन अनुकूलन और सह-विकास जैसे क्षेत्रों में अवसर तलाशने के लिए एक मंच प्रदान किया था।
इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, हेडक्वार्टर IDS, सशस्त्र बलों, DRDO, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM), शिक्षा जगत और भारतीय रक्षा उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ मित्र देशों के रक्षा अताशे और विदेशी राजनयिक मिशन के प्रतिनिधियों ने उपस्थिति दर्ज कराई थी। विस्व-२०२६ के माध्यम से DRDO तकनीक आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय रक्षा भागीदारी को मजबूत करने के प्रयास कर रहा है।
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