न्यूजीलैंड चुनाव परिणामों में कोई स्पष्ट विजेता नहीं, स्थिति जटिल
मुख्य दो दलों के बीच मतों की खींचतान देखी जा रही है और किसी को पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना नहीं
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, रात 9:28 · अपडेट रात 9:38 · 6 मिनट का पाठ
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न्यूजीलैंड में हुए चुनाव की मतगणना के बाद कोई निर्णायक परिणाम नहीं आया है। मुख्य दो दल लोकप्रिय मतों के मामले में लगभग एक समान स्थिति में हैं, जिसके कारण परिणाम 'टू क्लोज टू कॉल' यानी तय न की जा सकने वाली स्थिति में पहुँच गए हैं। स्काई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, रूढ़िवादी गठबंधन मुश्किल से बहुमत पाने की कगार पर है, लेकिन कोई स्पष्ट विजेता उभरकर सामने नहीं आया है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को परिणाम घोषित होने के बाद भी जीत का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र-दक्षिणपंथी झुकाव वाली नेशनल पार्टी के नेतृत्व वाले शासक गठबंधन या केंद्र-वामपंथी झुकाव वाली लेबर पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी समूह, इन दोनों में से किसी को भी सरल बहुमत मिलने की संभावना नहीं है। इस अनिश्चितता के पीछे अंतरराष्ट्रीय झटकों के कारण न्यूजीलैंड की व्यापार-आधारित अर्थव्यवस्था में उत्पन्न आर्थिक समस्याएं और दोनों मुख्य दलों के प्रति मतदाताओं का बढ़ता असंतोष हो सकता है।
न्यूजीलैंड में मतदाता अब वैचारिक रूप से चरम पर रहने वाले राजनेताओं को अधिक समर्थन दे रहे हैं, जो एक वैश्विक रुझान है। यदि परिणाम अस्पष्ट रहते हैं, तो छोटे और लोकलुभावन दलों के पास अधिक सत्ता आ सकती है। प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन दूसरे कार्यकाल के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि इस वर्ष उनके अपने ही सांसदों द्वारा उनके खिलाफ दो विश्वास प्रस्ताव लाए गए थे। दूसरी ओर, लेबर पार्टी के क्रिस हिपकिन्स तीन साल पहले मिली मामूली हार के बाद फिर से सत्ता पाने का प्रयास कर रहे हैं।
बैंकॉक पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह चुनाव अपने इतिहास के सबसे करीबी चुनावों में से एक है। चुनाव प्रचार के दौरान बढ़ती जीवन निर्वाह लागत और आर्थिक चिंताएं मुख्य मुद्दे रहे थे। न्यूजीलैंड के लोग बुनियादी वस्तुओं की ऊंची कीमतों और दशक की सबसे अधिक बेरोजगारी दर से परेशान हैं। मध्य पूर्व के युद्ध और उसके कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में हुई वृद्धि को न्यूजीलैंड की व्यापार-आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन आशा करते हैं कि उनका दक्षिणपंथी झुकाव वाला गठबंधन सत्ता में रहेगा। उन्होंने नए टैक्स न लगाने के वादे किए हैं और AFP को बताया है कि वे खुद को देश के 'सुपर सेल्समैन' के रूप में देखते हैं। उन्होंने प्रतिज्ञा की है कि यदि वे फिर से चुने जाते हैं, तो और अधिक मुक्त व्यापार समझौते करेंगे। दूसरी ओर, पूर्व प्रधानमंत्री क्रिस हिपकिन्स ने जीवन निर्वाह लागत कम करने, मुफ्त डॉक्टर परामर्श, मुफ्त दवाओं और सार्वजनिक परिवहन किराए पर सीमा तय करने के वादे किए हैं। हिपकिन्स ने शुक्रवार को विश्वास व्यक्त किया था कि उनकी लेबर पार्टी 'उम्मीदों से बेहतर' प्रदर्शन करेगी।
न्यूजीलैंड की मिश्रित-सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व (MMP) प्रणाली के तहत, मतदाताओं को दो विकल्प चुनने होते हैं: एक सामान्य पार्टी सूची और दूसरा उनके निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि के लिए उम्मीदवार। संसद में सरकार बनाने के लिए दलों के गठबंधन को आधे से अधिक सीटें प्राप्त करना आवश्यक है। इस स्थिति में छोटे दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। विशेष रूप से केंद्रवादी 'अपॉर्चुनिटी पार्टी' पर ध्यान केंद्रित हुआ है। इस पार्टी के नेता क्यूला वोंग, जो पूर्व KPMG सलाहकार हैं, ने विनम्र राजनीति का वादा किया है और कहा है कि वे दोनों मुख्य दलों के साथ काम कर सकते हैं। विक्टोरिया यूनिवर्सिटी ऑफ वेलिंगटन के प्रोफेसर डेविड केपी ने बताया कि स्थापित दो दलों के प्रति मतदाताओं की थकान वोंग के उदय का कारण बन रही है।
7 नवंबर के करीब के पोल के अनुसार, लेबर या नेशनल कोई भी दल 30% से अधिक मत प्राप्त नहीं कर सका है। बेन थॉमस, जो पूर्व नेशनल गवर्नमेंट के प्रेस सचिव थे, ने कहा कि मतदाताओं में पारंपरिक दो मुख्य दलों के प्रति व्यापक अविश्वास है। यह स्थिति छोटे दलों के लिए फायदेमंद रही है, जिन पर लक्सन या हिपकिन्स को गठबंधन बनाने के लिए निर्भर रहना होगा। लेबर पार्टी को शायद वामपंथी झुकाव वाली ग्रीन पार्टी के साथ गठबंधन करना पड़े, जिसे जीवन निर्वाह लागत के मुद्दे पर रिकॉर्ड तोड़ समर्थन मिला है।
2023 के चुनाव में नेशनल पार्टी ने लोकलुभावन 'न्यूजीलैंड फर्स्ट' और लिबर्टेरियन 'ACT' पार्टी के साथ मिलकर देश की सबसे रूढ़िवादी आधुनिक सरकार बनाई थी। लक्सन, जो एक बिजनेस एग्जीक्यूटिव हैं और 2020 में संसद में आए थे, उनकी राजनीतिक अनुभवहीनता की आलोचना की गई है। विशेष रूप से, छोटे दलों ने स्वदेशी माओरी अधिकारों की कानूनी मान्यता रद्द करने की मांग की थी, जिसका विरोध करने के लिए लगभग 1,00,000 लोग संसद की ओर कूच कर चुके थे। आर्थिक और राजनीतिक विश्लेषक बर्नार्ड हिकी ने बताया कि छोटे दलों ने लक्सन से जो सत्ता प्राप्त की, उससे मतदाताओं के लिए यह आश्चर्यजनक था कि पहली बार छोटे दल मुख्य दलों को नियंत्रित कर रहे थे।
न्यूजीलैंड में एक ही सदन की सरकार है और कोई राज्य नहीं हैं। केंद्र सरकार का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है और वह देश की दिशा तय करने में सर्वोच्च सत्ता रखती है। 2023 में लेबर पार्टी सत्ता से दूर हो गई थी, क्योंकि जेसिंडा अर्डन के इस्तीफे के बाद पार्टी मतदाताओं को प्रेरित करने में विफल रही थी। उनके उत्तराधिकारी हिपकिन्स ने अपनी छवि एक आम आदमी के रूप में पेश की है, जो अपने ड्रेसिंग सेंस और DIY के प्रति प्रेम को लेकर मजाक करते हैं।
क्रिस्टोफर लक्सन 2020 में संसद में दाखिल हुए थे और 2023 के चुनाव में उन्होंने महामारी के बाद की आर्थिक मंदी को दूर करने के वादों के साथ जीत हासिल की थी। हालांकि, आर्थिक रिकवरी धीमी रही है और सितंबर तिमाही में बेरोजगारी 11 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। महंगाई के कारण हर साल हजारों लोग न्यूजीलैंड छोड़कर अपने समृद्ध पड़ोसी देश ऑस्ट्रेलिया में रहने चले जाते हैं।
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