मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं
सर्वोच्च अदालत ने जमानत याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट को ट्रांसफर की, 16 नवंबर को सुनवाई का आदेश
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 1:53 · अपडेट शाम 4:46 · 3 मिनट का पाठ
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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को मनी लॉन्ड्रिंग के एक नए मामले में सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने आजम खान की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने का फैसला किया है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इस याचिका पर 16 नवंबर को डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई करने के लिए निर्देश दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि हाईकोर्ट उसी दिन आजम खान की याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करे।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, आजम खान की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ED द्वारा की गई इस गिरफ्तारी के पीछे दुर्भावनापूर्ण इरादे शामिल हैं। कपिल सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि जब आजम खान जेल से रिहा होने वाले थे, तभी उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने आगे कहा, "वे केवल यही चाहते हैं कि चुनाव के दौरान मैं जेल के अंदर रहूं।"
आजम खान की गिरफ्तारी के घटनाक्रम पर नजर डालें तो, ED ने 31 अक्टूबर को उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हिरासत में लिया था। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में की गई थी जब आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान एक कथित डुअल पैन कार्ड मामले में रामपुर जेल से जमानत पर रिहा हुए थे। इसके बाद, 1 नवंबर को आजम खान को गाजियाबाद की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया। उनके वकील ने स्पष्ट किया था कि यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला जौहर ट्रस्ट से संबंधित है।
78 वर्षीय आजम खान समाजवादी पार्टी के एक दिग्गज नेता के रूप में जाने जाते हैं। वे उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और कई बार विधायक एवं मंत्री के रूप में जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उनके द्वारा स्थापित जौहर ट्रस्ट और उसके संचालन को लेकर भूतकाल में भी कई विवाद और कानूनी प्रक्रियाएं सामने आई थीं। आजम खान के राजनीतिक प्रभाव और उनके खिलाफ विभिन्न मामलों के कारण यह पूरा मामला राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें 16 नवंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां आजम खान की जमानत को लेकर फैसला लिया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट में भेजकर कानूनी प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया है। अब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच इस मामले में क्या रुख अपनाती है और आजम खान को राहत मिलती है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल आजम खान न्यायिक हिरासत में हैं और उनके वकीलों द्वारा दी गई दलीलों को देखते हुए, आगामी सुनवाई के दौरान कानूनी बहस और तेज होने की संभावना है।
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