बिहार में 12 दिनों तक पुलिस लाइन में रहने वाला फर्जी पुलिसकर्मी पकड़ा गया
आरोपी ने डायल 112 का ड्राइवर होने का दावा कर पुलिस बैरक में लिया था शरण
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 12:27 · अपडेट दोपहर 12:37 · 5 मिनट का पाठ
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बिहार के कटिहार जिले में सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाली एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक फर्जी पुलिसकर्मी पिछले 10 से 12 दिनों तक पुलिस लाइन में ही पुलिसकर्मियों के साथ बैरक में रह रहा था। इस व्यक्ति ने अपनी पहचान छिपाकर पुलिस विभाग का कर्मचारी होने का दावा किया था और पुलिस के जरूरी उपकरणों का उपयोग कर अन्य जवानों को धोखा दिया था। इस घटना ने पुलिस लाइन जैसी अत्यंत सुरक्षित जगह की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, पकड़े गए व्यक्ति की पहचान दीपक कुमार उर्फ दिलखुश कुमार के रूप में हुई है। वह मूल रूप से बिहार के सहरसा जिले के डेरार थाना क्षेत्र के बरहड़ा गांव का निवासी है। दीपक कुमार कटिहार पुलिस लाइन के सिपाही बैरक नंबर 100 में रह रहा था। वहां रहने वाले अन्य पुलिस जवानों को उसने विश्वास दिलाया था कि वह पुलिस विभाग में ड्यूटी कर रहा है। वह कभी अपनी पहचान डायल 112 की गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर के रूप में कराता था, तो कभी खुद को सैप (SAP) जवान बताता था। इस तरह वह लगभग 12 दिनों तक पुलिसकर्मियों के बीच बिना किसी संदेह के रह सका।
इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश तब हुआ जब कटिहार जिला बल में तैनात सिपाही सुनील कुमार महतो को दीपक की बातों और उसकी दैनिक गतिविधियों पर संदेह हुआ। सुनील कुमार को लगा कि दीपक जिस ड्यूटी के बारे में बात कर रहा है और जिस तरह से व्यवहार कर रहा है, वह किसी पुलिसकर्मी जैसा नहीं है। इस संदेह के आधार पर सुनील कुमार ने तुरंत पुलिस लाइन की परिवहन शाखा के प्रभारी सार्जेंट को इस बारे में सूचित किया। सार्जेंट ने जब पुलिस विभाग के रिकॉर्ड की जांच की और जरूरी जानकारी जुटाई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि दीपक नाम का कोई भी व्यक्ति डायल 112 की गाड़ी का ड्राइवर नहीं है और न ही उसकी ड्यूटी हाईवे पेट्रोलिंग वाहन में है।
जब अधिकारियों की मौजूदगी में दीपक की तलाशी ली गई, तो उसके पास से पुलिस और सेना जैसे दिखने वाले कई सामान मिले। पुलिस के अनुसार, उसके पास से कैमौफ्लेज (सेना जैसी) वर्दी का एक सेट, टोपी, जूते, फर्जी पहचान पत्र और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है। इसके अलावा, उसके पास वर्दी पहनकर खिंचवाई गई दो तस्वीरें भी मिलीं, जिनका उपयोग वह अपनी पहचान साबित करने के लिए करता था। जांच में उसके पास से पर्स और कुछ कागजात भी मिले हैं, जिनमें बिहार पुलिस और बिहार मिलिट्री पुलिस (BMP) लिखे हुए पर्स शामिल हैं। फिलहाल पुलिस इन सभी फर्जी पहचान पत्रों और कागजातों की बारीकी से जांच कर रही है।
कटिहार सदर के डीएसपी विशाल आनंद ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 4 नवंबर को पुलिस लाइन में एक व्यक्ति फर्जी तरीके से रह रहा होने की सूचना मिली थी। जांच के दौरान पता चला कि वह व्यक्ति पुलिसकर्मी नहीं है, बल्कि खुद को पूर्व सैनिक और डायल 112 का ड्राइवर बता रहा था। इसके बाद उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। डीएसपी ने पुष्टि की कि आरोपी से कैमौफ्लेज वर्दी, जूते, फर्जी आईडी कार्ड, मोबाइल फोन और वर्दी में खिंचवाई गई दो तस्वीरें जब्त की गई हैं। आरोपी के खिलाफ संबंधित सहायक पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
पुलिस विभाग के लिए यह घटना अत्यंत चिंताजनक है क्योंकि पुलिस लाइन कोई सामान्य जगह नहीं है। यहाँ पुलिस के उच्च अधिकारी और जवान रहते हैं। इस परिसर में शस्त्रागार (Armoury) और प्रोटेक्टेड ऑफिस जैसी अत्यंत संवेदनशील जगहें होती हैं, जहाँ पुलिस के महत्वपूर्ण दस्तावेज और हथियार रखे जाते हैं। ऐसे सुरक्षित क्षेत्र में कोई बाहरी व्यक्ति फर्जी पहचान के सहारे 12 दिनों तक बैरक में रह सके, यह सुरक्षा में बड़ी चूक दर्शाता है। पुलिस को संदेह है कि दीपक कुमार शायद शस्त्रागार और प्रोटेक्टेड ऑफिस जैसी महत्वपूर्ण जगहों की रेकी कर रहा था, ताकि वह किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सके।
फिलहाल पुलिस इस मामले में कई सवालों के जवाब खोज रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि दीपक पुलिस लाइन के अंदर प्रवेश कैसे कर सका? क्या प्रवेश द्वार पर उसकी पहचान की जांच नहीं की गई थी, या उसने जवानों का विश्वास जीतकर अंदर प्रवेश पाया था? इसके अलावा, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बैरक में रहने के लिए जगह उसे किसने दी और किन परिस्थितियों में उसे वहां रहने की अनुमति मिली। पुलिस अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि उसने यह फर्जी वर्दी और पहचान पत्र कहाँ से बनवाए थे और क्या वह पहले भी किसी अन्य जगह इस तरह फर्जी पुलिसकर्मी बनकर रहा था या नहीं। दीपक कुमार फिलहाल पुलिस हिरासत में है और पूरे मामले की गहन जांच जारी है।
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