अग्निपथ योजना में बड़ा बदलाव, अग्निवीर सशस्त्र बलों में स्थायी हो सकेंगे
सरकार के कैबिनेट निर्णय के अनुसार अग्निवीर को दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जाएगा और उसके बाद वे जुड़ने में सक्षम बनेंगे।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, दोपहर 3:44 · अपडेट रात 10:31 · 3 मिनट का पाठ
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एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, अग्निपथ योजना में एक बड़ा सरकारी निर्णय लिया गया है। जिसके तहत अग्निपथ योजना के तहत बाकी के बाहर जाने वाले ७५ प्रतिशत अग्निवीर को अब दो वर्ष की अतिरिक्त सगाई अवधि दी जाएगी। उसके बाद जो अग्निवीर इच्छुक होंगे वे सशस्त्र बलों में नियमित सैनिकों के रूप में नाम पंजीकरण करवा सकेंगे। सरकार द्वारा बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह बड़ा निर्णय लिया गया है।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब इसके कुछ ही सप्ताह पहले लगभग १८,००० अग्निवीर सशस्त्र बलों से सेवानिवृत्त होने वाले थे। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमण्यम ने बताया था कि सभी अग्निवीर को सशस्त्र बलों में उनकी सेवा जारी रखने का अवसर प्रदान किया जाएगा। उन्होंने जोड़ा था कि यह सब उनके प्रदर्शन और उसके मूल्यांकन पर आधारित होगा।
शुरुआत से ही यह स्पष्ट किया गया था कि इस योजना की समीक्षा की जाएगी यह बताते हुए जनरल सुब्रमण्यम ने कहा कि हर वर्ष अग्निवीर के प्रदर्शन की समीक्षा की जाती थी और अंत में हम ऐसे निर्णय पर पहुंचे कि दो वर्ष का एक्सटेंशन मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह योजना शुरुआत से ही किसी पत्थर की लकीर समान तय की हुई नहीं थी। यह समीक्षा मात्र आज के दिन ही अचानक नहीं हुई है, बल्कि वह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया रही है।
इस विषय पर पिछले तीन से चार महीनों से चर्चाएं चल रही थीं और आज कैबिनेट द्वारा हमारी सिफारिशों को मंजूरी दी गई है, ऐसा जनरल सुब्रमण्यम ने बताया। उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि अग्निपथ योजना अपने वर्तमान स्वरूप में, यानी पहले चार वर्षों के लिए चालू ही रहेगी। अग्निपथ योजना बंद नहीं की गई है और वह आगे भी चालू ही रहेगी।
दूसरी ओर, दो वर्ष की यह दूसरी सगाई अवधि ऐसे अग्निवीर को लंबा समय सेवा देने का अवसर प्रदान करती है जिनकी पहले चार वर्षों में पसंदगी नहीं हो सकी है। उनके संबंधित अनुभव, योग्यता और कौशलों से संबंधित बातें हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि वे खराब हैं, बल्कि वह सापेक्ष बात है। इसलिए, इन दो वर्षों के दौरान उन्हें सेना में लंबा समय सेवा देने का अवसर मिलता है, जिसमें नियमित सैनिक के रूप में नाम लिखाने का प्रावधान भी शामिल है।
यह योजना दोनों पक्षों के लिए विन-विन सिचुएशन यानी फायदेमंद साबित होगी, ऐसा उन्होंने बताया। उल्लेखनीय है कि अग्निपथ योजना वर्ष २०२२ में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य तीनों सेनाओं की आयु सीमा को नीचा लाना था और इस योजना के तहत कम समय के लिए कर्मचारियों की भर्ती की जाती है। इस योजना के तहत भर्ती पाए जवानों को अग्निवीर के रूप में पहचाना जाता है।
अगाऊ अग्निपथ योजना के तहत सैनिकों की भर्ती चार वर्ष के कार्यकाल के लिए की जाती थी, जिसमें केवल २५ प्रतिशत जवानों को ही नियमित सेवा में बनाए रखने का प्रावधान रखा गया था। यह निर्णय कम समय के कार्यकाल के सामने हुई आलोचनाओं के बीच आया है। इन आलोचनाओं के कारण उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और अन्य कई राज्यों ने पुलिस तथा अन्य सेवाओं में अग्निवीर के लिए आरक्षण के प्रावधान भी किए थे।
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