यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज बेंगलुरु द्वारा तीन नई फसल किस्मों का शुभारंभ होगा
13 नवंबर को आयोजित होने वाले कृषि मेले में सूखा और रोग प्रतिरोधी मक्का, रागी और अमरंथ की किस्में पेश की जाएंगी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 5:13 · अपडेट सुबह 5:23 · 2 मिनट का पाठ
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यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज बेंगलुरु (UAS-B) द्वारा आगामी 13 नवंबर को बेंगलुरु के येलहंका स्थित जीकेवीके (GKVK) कैंपस में आयोजित होने वाले कृषि मेले के अवसर पर तीन नई फसल किस्में जारी की जाएंगी। ये तीनों नई किस्में विश्वविद्यालय द्वारा ही विकसित की गई हैं।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, इन नई किस्मों में मक्के की MAH-20-45, रागी की GPU-101 और ग्रेन अमरंथ की KBGA-18 शामिल हैं। UAS-B के रिसर्च डायरेक्टर मुदलागिरियप्पा ने इन किस्मों की विशेषताओं को समझाते हुए बताया कि MAH-20-45 मक्के की एक उच्च उपज देने वाली हाइब्रिड किस्म है। यह किस्म विभिन्न रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता रखती है और किसानों के विशेष हस्तक्षेप के बिना सूखे की स्थितियों में भी उगाई जा सकती है।
रागी की नई किस्म GPU-101 के बारे में उन्होंने जानकारी दी कि यह किस्म बाजार में वर्तमान में उपलब्ध अन्य किस्मों की तुलना में 18% अधिक उपज देती है। इसके अलावा, रागी में सबसे अधिक देखे जाने वाले 'ब्लास्ट डिजीज' (Blast disease) के प्रति यह किस्म अधिक सहनशील है। वहीं ग्रेन अमरंथ की KBGA-18 किस्म प्रोटीन से भरपूर है। मुदलागिरियप्पा ने सुझाव दिया कि इस अमरंथ को पीसने से पहले रागी के साथ मिलाया जा सकता है और रागी के आटे के साथ मिलाकर इसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
राज्य में वर्तमान में व्याप्त सूखे की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष कृषि मेले के आयोजन में बदलाव किया गया है। पिछले वर्षों में यह मेला तीन दिनों तक चलता था, लेकिन इस वर्ष इसे केवल एक दिन के लिए आयोजित किया जाएगा।
प्रो. मुदलागिरियप्पा ने कार्यक्रम का विवरण देते हुए बताया कि मेले के दिन सुबह 10 बजे सूखा प्रबंधन तकनीकों पर एक कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसके बाद दोपहर 2 बजे प्रतिभागियों, विशेष रूप से किसानों के लिए फील्ड विजिट का आयोजन किया गया है। इस पूरे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अल नीनो (El Niño) के प्रभाव और भविष्य की तैयारियों के संबंध में तकनीकी जानकारी प्रदान करना है। इसके साथ ही सूखे की स्थिति के लिए उपयुक्त फसल किस्मों, पूरक कृषि तकनीकों के साथ-साथ मिट्टी और जल संरक्षण के संबंध में मार्गदर्शन दिया जाएगा।
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