साबर डेयरी के चेयरमैन पद के लिए विपुल पटेल के नाम से भाजपा में असंतोष
आधिकारिक जनादेश से पहले ही नाम तय करने की कवायत और कांग्रेस के पूर्व नेता की पसंद के खिलाफ पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 1:00 · अपडेट सुबह 1:07 · 5 मिनट का पाठ
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उत्तर गुजरात की सहकारी राजनीति में साबर डेयरी के नए चेयरमैन पद के चयन को लेकर भारी गहमागहमी देखी जा रही है। टीवी9 गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, डेयरी के अध्यक्ष पद के लिए विपुल पटेल का नाम आगे होने की चर्चा है, जिसके कारण भाजपा के स्थानीय संगठन और वर्षों से पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। विपुल पटेल मात्र तीन साल पहले ही कांग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। इतना ही नहीं, उन्होंने वर्ष 2014 और 2017 के चुनावों में भाजपा के उम्मीदवारों के खिलाफ ही मैदान में उतरकर चुनाव लड़ा था। ऐसी स्थिति में, कांग्रेस की विचारधारा रखने वाले और हाल ही में पार्टी में शामिल हुए नेता को साबर डेयरी जैसी महत्वपूर्ण सहकारी संस्था की कमान सौंपने की तैयारी के खिलाफ पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं में रोष है।
साबर डेयरी में कुल 18 निदेशक हैं, जिनमें से 17 निदेशकों के मूल रूप से भाजपा से जुड़े होने की बात कही गई है। 17 मूल भाजपा निदेशकों और विशेष रूप से 13 निदेशकों की उपलब्धता के बावजूद, विपुल पटेल के नाम को प्राथमिकता दिए जाने पर कई सवाल खड़े हुए हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसी चर्चा है कि जो नेता 30 वर्ष से अधिक समय से पार्टी की विचारधारा के लिए काम कर रहे हैं और महत्वपूर्ण पद की आशा रख रहे हैं, उन्हें नजरअंदाज कर नए शामिल हुए व्यक्ति को महत्व देने से कार्यकर्ताओं के मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विपुल पटेल के कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ अच्छे संबंधों की बातें भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
दूसरी ओर, टीवी9 गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा द्वारा आधिकारिक जनादेश घोषित किए जाने से पहले ही विपुल पटेल को चेयरमैन बनाने की कवायत शुरू होने की चर्चा है। इस पूरी प्रक्रिया में बाबू बरदान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और विवादास्पद हो गई है। सूत्रों के अनुसार, बाबू बरदान द्वारा विपुल पटेल के नाम को आगे बढ़ाकर निदेशकों को एकजुट करने का कार्य किया गया है। ऐसी भी चर्चा है कि कल शाम से गांधीनगर के एक होटल में 8 से 10 निदेशकों को ठहराया गया था, ताकि विपुल पटेल को चेयरमैन बनाने के लिए राजनीतिक रणनीति तैयार की जा सके। पिछले कार्यकाल में शामल पटेल के खिलाफ भी इसी तरह की रणनीति अपनाई गई होने की चर्चा रही थी, और अब फिर से निदेशकों को गुप्त स्थान पर ले जाकर नए चेहरे को चेयरमैन बनाने की रणनीति अपनाई जा रही होने की बात सामने आई है।
भाजपा की सेंस प्रक्रिया के दौरान भी कई राजनीतिक समीकरण देखे गए थे। कुछ विधायक और सांसद इस प्रक्रिया से दूर रहे, जबकि कुछ विधायकों ने पर्यवेक्षकों के समक्ष अपनी बात रखी। पर्यवेक्षकों ने भी संगठन के शीर्ष नेतृत्व को स्थानीय नाराजगी और वर्तमान राजनीतिक स्थिति के बारे में सूचित किया था। सूत्रों के अनुसार, सेंस प्रक्रिया के बाद कुछ निदेशकों से विपुल पटेल के समर्थन में शपथ पत्र (एफिडेविट) भी लिए गए होने की चर्चा है। अब दावा किया जा रहा है कि केवल आधिकारिक मुहर बाकी है। सुमुल, तापी, वडोदरा और लोधिका डेयरी में पहले हुई घटनाओं के बाद, साबर डेयरी में भाजपा का आधिकारिक जनादेश कितना प्रभावी रहेगा, यह प्रदेश नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
इस विवाद के बीच कृषि और सहकार मंत्री जीतू वाघाणी की चुप्पी भी चर्चा में है। टीवी9 द्वारा पूछे गए चेयरमैन पद के नाम और डेयरी में भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित सवालों के जवाब देने से उन्होंने परहेज किया। साबर डेयरी में वर्तमान में कथित अनियमितताओं, ठेकेदारों के वर्चस्व और साबरदान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पशुपालकों में पशुओं को दिए जाने वाले दाने की गुणवत्ता को लेकर नाराजगी है और आरोप लगे हैं कि दाने के कारण पशु बीमार पड़ रहे हैं, हालांकि लैब टेस्टिंग में इसके प्रमाण नहीं मिले होने की बात भी चर्चा में है। ऐसे हालातों में नए नेतृत्व का चयन और अधिक विवादास्पद हो गया है।
वर्तमान में शामल पटेल और विपुल पटेल के बीच राजनीतिक खींचतान चरम पर है। इस पूरे मामले में अब भाजपा प्रदेश नेतृत्व हरकत में आया है। साबर डेयरी के निदेशकों को भाजपा हाईकमान की ओर से बैठक के लिए बुलावा भेजा गया है। जानकारी के अनुसार, आज शाम 5 बजे मंत्री रमण सोलंकी के निवास स्थान पर एक बैठक होने वाली है, जिसमें भाजपा के महासचिव अजय ब्रह्मभट्ट निदेशकों के साथ चर्चा करेंगे। इस बैठक में चेयरमैन पद के उम्मीदवार के संबंध में अंतिम चर्चा होने की संभावना है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा के नेतृत्व में अंतिम निर्णय लिया जाएगा या स्थानीय स्तर पर तैयार की गई रणनीति सफल होगी। सहकारी क्षेत्र के नेताओं का विधानसभा और लोकसभा चुनाव में महत्वपूर्ण योगदान होने के कारण यह निर्णय राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हो गया है। प्रदेश भाजपा स्थानीय दबाव के आगे झुकेगी या अपना जनादेश लागू करेगी, यह आगामी चुनाव के बाद ही स्पष्ट होगा।
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