FICCI ने बजट 2027-28 के लिए टैक्स में राहत और सुधारों की मांग की
संस्था ने सरकार को सूचीबद्ध शेयरों पर LTCG छूट और TDS नियमों में राहत देने की सिफारिश की है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 3:40 · अपडेट शाम 4:12 · 3 मिनट का पाठ
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फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) ने आगामी बजट 2027-28 के लिए वित्त मंत्री को महत्वपूर्ण सिफारिशें भेजी हैं। इस विषय पर 'द इकोनॉमिक टाइम्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार, FICCI ने मुख्य रूप से कराधान प्रणाली में बदलाव और निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण बनाने पर जोर दिया है।
FICCI ने सूचीबद्ध शेयरों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में छूट को पुन: बहाल करने की विशेष मांग की है। संस्था ने सरकार का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित किया है कि कैपिटल गेन्स टैक्स के प्रभाव के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) वापस लिए जा रहे हैं। FICCI ने कहा कि चूंकि यह स्थिति निवेश के माहौल को प्रभावित कर सकती है, इसलिए LTCG छूट को फिर से लागू करना आवश्यक है।
कराधान के अन्य पहलुओं पर चर्चा करते हुए, FICCI ने TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) के नियमों में राहत देने का अनुरोध किया है। संस्था ने सुझाव दिया है कि सरकार द्वारा TDS के नियमों को अधिक हल्का (lighter) किया जाना चाहिए, ताकि व्यवसायों और निवेशकों पर बोझ कम हो सके और वित्तीय प्रक्रियाएं अधिक सरल हो सकें।
इसके अलावा, FICCI ने टैक्स अपील की प्रक्रिया में होने वाले विलंब पर चिंता व्यक्त की है। संस्था ने सरकार से टैक्स अपील के लंबित मामलों (backlog issues) को तेजी से सुलझाने के लिए कदम उठाने को कहा है। टैक्स विवादों के त्वरित निपटारे से व्यापारिक जगत में स्पष्टता आएगी और कानूनी जटिलताएं कम होंगी।
FICCI ने अपने प्रस्ताव में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि दीर्घकालिक निवेशकों को निश्चितता (certainty) प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है। जब निवेशक लंबी अवधि के लिए पूंजी लगाते हैं, तो टैक्स नियमों में स्थिरता और पूर्वानुमेयता होनी चाहिए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ भारतीय बाजार में निवेश कर सकें।
संस्था ने ये सभी सिफारिशें वित्त मंत्री को भेजकर आशा व्यक्त की है कि बजट 2027-28 में इन मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा। FICCI का मानना है कि यदि LTCG छूट, TDS में राहत और अपील प्रक्रिया में तेजी लाई जाती है, तो इससे देश के आर्थिक विकास को गति मिलेगी और विदेशी निवेशकों को फिर से आकर्षित किया जा सकेगा।
इन सिफारिशों का मुख्य उद्देश्य टैक्स के बोझ को कम करके निवेश बढ़ाना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक कुशल बनाना है। विशेष रूप से शेयर बाजार और विदेशी निवेश के संदर्भ में FICCI ने जो मुद्दे उठाए हैं, उन्हें बाजार की गतिशीलता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
FICCI भारत की एक प्रमुख उद्योग संस्था है जो विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगपतियों और व्यापारियों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है और आर्थिक नीतियां बनाने में सरकार की सहायता करती है।
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