KPTCL पावर सेक्टर के लेनदेन के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाएगा
ऊर्जा उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण प्रक्रियाओं को पारदर्शी और तेज़ बनाने के लिए KPTCL-GTD प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, सुबह 6:23 · 3 मिनट का पाठ
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कर्नाटक के पावर सेक्टर को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह, सटीक और तेज़ बनाने के उद्देश्य से, कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KPTCL) एक व्यापक और केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बना रही है। इस प्लेटफॉर्म को KPTCL-GTD (जेनरेशन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन) नाम दिया गया है, जो ऊर्जा उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण प्रक्रियाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के तहत लाएगा।
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, KPTCL के मैनेजिंग डायरेक्टर वी. राम प्रसाद मनोहर के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म का विकास किया जा रहा है और विभिन्न विभागों तथा संस्थानों के बीच डेटा और वर्कफ्लो को एकीकृत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पावर जनरेशन कंपनियों, KPTCL, इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनियों (Escoms) और अन्य हितधारकों से जुड़े बड़े लेनदेन को KPTCL-GTD प्लेटफॉर्म पर लाना है।
पहले जो प्रक्रियाएं अलग से संचालित की जाती थीं और जिनमें महत्वपूर्ण मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता होती थी, उन्हें अब डिजिटाइज़ और स्वचालित किया जाएगा। इन प्रक्रियाओं में बिजली की खरीद और बिक्री, बिलिंग, एनर्जी रिकॉन्सिलिएशन, बैंकिंग, ओपन एक्सेस और वित्तीय निपटान शामिल हैं। मनोहर के अनुसार, इससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और पावर-सेक्टर के लेनदेन में पारदर्शिता, सटीकता, जवाबदेही और गति बढ़ेगी। पावर लेनदेन, बिलिंग, एनर्जी रिकॉन्सिलिएशन और वित्तीय निपटान से संबंधित सभी डेटा रियल-टाइम व्यूइंग और मॉनिटरिंग के लिए उपलब्ध होंगे।
इस प्रणाली से बिलिंग में विसंगतियों, अकाउंट रिकॉन्सिलिएशन में देरी और डेटा की विसंगतियों को कम करने में मदद मिलेगी, साथ ही यह तेज़ लेनदेन और वित्तीय निपटान को सक्षम बनाएगी। KPTCL-GTD के माध्यम से पावर उत्पादक, पावर खरीदार, ट्रांसमिशन यूटिलिटीज और इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनियां एक सामान्य डिजिटल सिस्टम के माध्यम से संबंधित डेटा और लेनदेन का प्रबंधन कर सकेंगी।
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मीटर रीडिंग इंटरफेस (MRI) को भी एकीकृत करने का लक्ष्य है। इससे मीटर डेटा सीधे प्राप्त करना संभव होगा, जिसमें 15-मिनट के ब्लॉक-लेवल डेटा और इंटरफेस-पॉइंट जानकारी शामिल होगी। इस सुविधा से मैनुअल डेटा एंट्री और गणनाओं पर निर्भरता कम होगी। इसके अलावा, बिल और संबंधित दस्तावेजों के लिए डिजिटल सिग्नेचर और डिजिटल अप्रूवल सिस्टम का भी प्रस्ताव है, ताकि कागजी और मैनुअल प्रक्रियाओं को और कम किया जा सके।
मनोहर ने बताया कि सिस्टम लागू होने के बाद, यह पावर सेक्टर की समग्र दक्षता में सुधार करेगा, प्रक्रियात्मक और व्यावसायिक नुकसान को कम करेगा और राजस्व वसूली को अधिक प्रभावी बनाएगा। ऊर्जा और पर्यटन मंत्री के.जे. जॉर्ज ने इस बारे में कहा कि पावर सेक्टर में उत्पादन से लेकर वितरण तक कई संस्थान और प्रक्रियाएं शामिल हैं। हमारा उद्देश्य उन्नत तकनीक का उपयोग करके पहले अलग से और मैनुअल रूप से संचालित की जाने वाली मुख्य प्रक्रियाओं को एक सिंगल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना है। इससे पावर उत्पादकों, खरीदारों, ट्रांसमिशन यूटिलिटीज और वितरण कंपनियों सहित सभी हितधारकों के लिए लेनदेन पारदर्शी, तेज़ और निर्बाध बनेंगे।
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