पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण के आरोपों के बाद केरल में पेट्रोल पंपों की जांच के आदेश
कर्नाटक के दावों के बाद केरल सरकार ने चार मुख्य जिलों में पेट्रोल के नमूने लेने का आदेश दिया है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, रात 8:09 · अपडेट रात 9:31 · 4 मिनट का पाठ
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पड़ोसी राज्य कर्नाटक में पेट्रोल में निर्धारित मात्रा से अधिक इथेनॉल मिलाए जाने के गंभीर आरोपों के बाद, केरल सरकार ने एहतियाती कदम के रूप में राज्य के चार मुख्य जिलों में स्थित पेट्रोल पंपों के औचक निरीक्षण का सख्त आदेश दिया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, तिरुवनंतपुरम सहित अन्य क्षेत्रों में पेट्रोल की शुद्धता को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसके कारण केरल के नागरिक आपूर्ति मंत्री अनूप जैकब ने इस व्यापक जांच के आदेश जारी किए हैं।
केरल सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण कर्नाटक राज्य से उठा विवाद है। कर्नाटक सरकार द्वारा यह दावा किया गया था कि वहां पेट्रोल के मिश्रण में इथेनॉल की मात्रा निर्धारित सीमा से काफी अधिक है। हालांकि, केरल सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब तक राज्य के भीतर पेट्रोल के मिश्रण में निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल होने का कोई पुख्ता या सबूतों के साथ मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद, दूसरे राज्य में चल रहे इस विवाद को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
इस जांच अभियान के तहत तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम, कोझिकोड और कन्नूर जिलों के विभिन्न पेट्रोल पंपों से पेट्रोल के नमूने एकत्र किए जाएंगे। नमूने लिए जाने के बाद, उन्हें तत्काल परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता को मिलने वाले ईंधन की गुणवत्ता सभी निर्धारित मानकों और मानदंडों के अनुरूप है या नहीं। मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि इस जांच के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता या मिलावट पाई जाती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस प्रशासनिक कार्रवाई के लिए वर्ष 2014 के एक पुराने सरकारी अधिसूचना का सहारा लिया जा रहा है, जो 'सेंट्रल मोटर स्पिरिट एंड हाई स्पीड डीजल ऑर्डर, 2005' के तहत जारी किया गया था। इस कानूनी व्यवस्था के तहत नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले आयुक्त से लेकर तालुका आपूर्ति अधिकारी तक सभी जिम्मेदार अधिकारियों को किसी भी पेट्रोल पंप का औचक निरीक्षण और जांच करने का अधिकार दिया गया है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब कर्नाटक सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिज़वान अरशद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चौंकाने वाला दावा किया। रिज़वान अरशद के अनुसार, कर्नाटक में पेट्रोल के मिश्रण में इथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत की सीमा से काफी अधिक, यानी लगभग 31.2 प्रतिशत पाई गई है। इस दावे के कारण ईंधन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
दूसरी ओर, देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने कर्नाटक के इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि उनके द्वारा आपूर्ति किया जाने वाला ईंधन सभी निर्धारित मानकों और कानूनी प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन करता है। केरल के मंत्री अनूप जैकब ने आगे कहा कि यदि जांच के दौरान नियमों का कोई उल्लंघन या मिलावट पकड़ी जाती है, तो दोषियों के खिलाफ बिना किसी ढील के सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
वर्तमान में तिरुवनंतपुरम और अन्य जिलों में पेट्रोल की शुद्धता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सरकार की इस त्वरित कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं के विश्वास को बनाए रखना और यह देखना है कि ईंधन की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न हो। प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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