चित्तौड़गढ़ में पंचायत चुनाव के नतीजों के बाद हिंसा, 150 लोगों ने किया पथराव
मतगणना केंद्र पर हमले में दो पुलिसकर्मी घायल और वाहनों में तोड़फोड़ की गई
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 2:41 · 4 मिनट का पाठ
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राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में सरपंच पद के चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद भारी हंगामा हुआ। चुनाव के नतीजे आते ही गांव में पथराव शुरू हो गया और 150 से अधिक लोगों ने तांडव मचाया। इस हिंसक घटना के कारण मतगणना केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों को अपनी जान बचाने के लिए कमरों में छिपना पड़ा। यह पूरी घटना चित्तौड़गढ़ जिले की नेतावल पाछली ग्राम पंचायत की है।
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार रात नेतावल पाछली स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में सरपंच पद के चुनाव के लिए मतगणना चल रही थी। जब नतीजे घोषित हुए तो रामेश्वर लाल धाकड़ ने 456 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। रामेश्वर लाल धाकड़ को विजयी घोषित किया गया, लेकिन नतीजे आते ही चुनावी माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। विजयी उम्मीदवार को उनके घर छोड़ने के कुछ ही देर बाद मतगणना केंद्र के बाहर लोगों की भीड़ जमा होने लगी थी।
चुनाव में अपने उम्मीदवारों की हार से नाराज कुछ ग्रामीणों ने मतदान में गड़बड़ी और फर्जी मतदान के आरोप लगाने शुरू कर दिए। शुरुआत में यह विरोध सिर्फ नारेबाजी और प्रतिषेध तक सीमित था, लेकिन जल्द ही यह विवाद पथराव में बदल गया। देखते ही देखते 150 से अधिक लोग घटनास्थल पर जमा हो गए और उन्होंने मतगणना केंद्र को निशाना बनाकर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए।
अचानक हुए इस हमले से वहां मौजूद मतदान कर्मियों और अन्य स्टाफ में भारी अफरा-तफरी मच गई। स्थिति को बिगड़ता देख कर्मचारियों ने बाहर निकलने के बजाय कमरों के अंदर शरण ली, क्योंकि उन्हें डर था कि बाहर निकलते ही वे पत्थरों का शिकार हो सकते हैं। पुलिसकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन उपद्रवी तत्वों का उत्पात लगातार बढ़ता रहा।
भीड़ द्वारा केंद्र परिसर के बाहर खड़े वाहनों पर भी हमला किया गया। वहां खड़ी एक बस और जोनल मजिस्ट्रेट की बोलेरो गाड़ी के शीशे तोड़ दिए गए। पथराव और तोड़फोड़ के कारण दोनों वाहनों को काफी नुकसान हुआ। इतना ही नहीं, इलाके की स्ट्रीट लाइटें भी तोड़ दी गईं, जिससे आसपास के इलाके में अंधेरा छा गया।
इस हंगामे के दौरान भीड़ को काबू में करने की कोशिश कर रहे दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। यह हिंसक गतिविधि लगभग आधे घंटे तक जारी रही। घटना की जानकारी मिलते ही चित्तौड़गढ़ के एसपी धर्मेंद्र सिंह को अतिरिक्त पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचना पड़ा। पुलिस के उच्च अधिकारियों और भारी पुलिस बल द्वारा भीड़ को खदेड़ने के बाद ही स्थिति को बमुश्किल नियंत्रण में लाया जा सका।
चुनाव नतीजों के बाद पैदा हुए तनाव को देखते हुए पुलिस ने किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती। एहतियात के तौर पर देर रात लगभग 2 बजे तक मतगणना केंद्र पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस की निरंतर उपस्थिति में स्थिति पर नजर रखी गई ताकि दोबारा कोई अप्रिय घटना न घटे।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे का मुख्य कारण चुनाव नतीजों के बाद लगाए गए फर्जी मतदान के आरोप बताए गए हैं। हालांकि, सिर्फ आरोप लगाने से मतदान में गड़बड़ी साबित नहीं होती। अब इस मामले में आरोपों की जांच और पुलिस की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। जिस स्कूल में कुछ घंटे पहले शांतिपूर्वक मतों की गिनती हो रही थी, वहीं पथराव और तोड़फोड़ के माहौल के कारण पूरे इलाके में चर्चा शुरू हो गई है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हार-जीत सामान्य है, लेकिन नतीजों के बाद हुई इस हिंसा ने गांव में तनाव बढ़ा दिया है।
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