भारतीय ऑटो पार्ट्स निर्माताओं को अमेरिका से टैरिफ राहत मिलने की संभावना नगण्य
डेमोक्रेट्स द्वारा कांग्रेस पर नियंत्रण पाने के बाद भी उद्योग जगत आशान्वित नहीं
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 4:39 · 3 मिनट का पाठ
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अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा कांग्रेस में बड़ी जीत हासिल करने के बावजूद, भारतीय ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं के लिए अल्पकाल में ऊंचे टैरिफ से राहत मिलने की संभावनाएं बहुत कम नजर आ रही हैं। अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े टैरिफ के कारण भारतीय ऑटो पार्ट्स निर्माता वर्तमान में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक बदलाव के बावजूद इस स्थिति में सुधार की संभावना कम है।
द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ऑटो पार्ट्स निर्माताओं का मानना है कि अमेरिका की व्यापार नीतियों में तत्काल कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। हालांकि डेमोक्रेट्स का अब कांग्रेस पर नियंत्रण है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास उनकी व्यापार नीतियों को चुनौती देने वाले किसी भी विधायी प्रयास पर वीटो (नकारने की शक्ति) करने की क्षमता है। यह एक बड़ी कानूनी बाधा है जो राहत की प्रक्रिया को रोक सकती है।
अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था के अनुसार, यदि राष्ट्रपति किसी कानून पर वीटो करते हैं, तो उस वीटो को पलटने के लिए कांग्रेस के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। इतनी बड़ी बहुमत प्राप्त करना अत्यंत कठिन होता है, जिसके कारण कांग्रेस द्वारा पारित किया गया कोई भी राहत देने वाला कानून राष्ट्रपति द्वारा खारिज किया जा सकता है। इसी कारण से, उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कांग्रेस में सत्ता परिवर्तन से टैरिफ में कमी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
इस स्थिति में, ऑटो पार्ट्स उद्योग के प्रमुख अधिकारियों और कार्यकारियों का मानना है कि अब केवल द्विपक्षीय व्यापार वार्ता (bilateral trade talks) के माध्यम से ही कोई समाधान निकल सकता है। भारत और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत और समझौता ही वह कुंजी है जिसके माध्यम से टैरिफ के बोझ को कम किया जा सकता है। उद्योग जगत अब उम्मीद कर रहा है कि दोनों देशों के बीच राजनयिक और वाणिज्यिक संबंधों में प्रगति हो, ताकि भारतीय निर्माताओं को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिल सकें।
भारतीय ऑटो पार्ट्स निर्माताओं के लिए अमेरिका एक महत्वपूर्ण बाजार है, लेकिन ऊंचे टैरिफ के कारण उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है। डेमोक्रेट्स के नियंत्रण वाली कांग्रेस शायद व्यापार नीतियों में बदलाव करना चाहती हो, लेकिन राष्ट्रपति की शक्ति और वीटो की प्रक्रिया इस मार्ग में एक बड़ा अवरोध बनी हुई है। परिणामस्वरूप, उद्योग जगत अब विधायी रास्तों के बजाय सीधी बातचीत पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।
कुल मिलाकर, अमेरिका की आंतरिक राजनीतिक गतिविधियों और राष्ट्रपति की शक्ति के समीकरणों के कारण भारतीय ऑटो पार्ट्स निर्माताओं के लिए राहत का मार्ग फिलहाल कठिन नजर आता है। उद्योग के प्रतिनिधियों का मानना है कि जब तक द्विपक्षीय स्तर पर कोई ठोस समझौता नहीं होता, तब तक टैरिफ के दबाव में काम करना होगा। इसलिए, आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच होने वाली व्यापार वार्ता पर पूरे उद्योग की नजर रहेगी।
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