गाज़ा में नरसंहार जारी होने पर संयुक्त राष्ट्र के जांच आयोग की गंभीर रिपोर्ट
यूएन कमीशन के अनुसार, युद्धविराम के बाद भी इजरायली बलों द्वारा फिलिस्तीनियों के खिलाफ युद्ध अपराध और मानवता विरोधी कृत्य जारी हैं।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, रात 10:44 · अपडेट रात 10:53 · 4 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
संयुक्त राष्ट्र के 'इंडिपेंडेंट इंटरनेशनल कमीशन ऑफ इंक्वायरी ऑन द ऑक्युपाइड फिलिस्तीनी टेरिटरी' द्वारा प्रस्तुत एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गाज़ा में नरसंहार की प्रक्रिया अभी भी जारी है। 14 अक्टूबर, 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश की गई इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि गाज़ा में कथित युद्धविराम समझौते के बाद भी इजरायली अधिकारियों और सुरक्षा बलों द्वारा युद्ध अपराध, मानवता विरोधी अपराध और नरसंहार जैसी गंभीर घटनाएं की जा रही हैं।
यह रिपोर्ट अक्टूबर 2023 से शुरू होकर अब तक की स्थिति का विश्लेषण करती है। सांख्यिकीय जानकारी के अनुसार, 7 अक्टूबर, 2023 से 9 अक्टूबर, 2025 की अवधि के दौरान गाज़ा में 72,600 से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत हुई थी, जबकि वेस्ट बैंक में 1,000 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इसके बाद, 10 अक्टूबर, 2025 से 30 सितंबर, 2026 की अवधि के दौरान गाज़ा में 1,431 और वेस्ट बैंक में 137 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। आयोग ने नोट किया है कि इजरायली सैनिकों द्वारा निर्दोष फिलिस्तीनियों की जानबूझकर हत्या की जा रही है, भले ही वे किसी भी प्रकार का खतरा पैदा न कर रहे हों।
रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली अधिकारी फिलिस्तीनी आबादी को अपने लिए खतरा मानते हैं और उनकी आबादी कम करने की नीति रखते हैं। इस मानसिकता के कारण इजरायली सैनिकों में एक ऐसी संस्कृति विकसित हो गई है जहाँ वे बिना किसी आदेश के भी फिलिस्तीनियों को निशाना बनाते हैं। इसके अलावा, इजरायली बलों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्वायत्त हथियार प्रणालियों का उपयोग किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 28 मई, 2026 को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाज़ा के 70% क्षेत्र पर कब्जा करने का आदेश दिया था, जो उनके क्षेत्रीय विस्तार की नीति को दर्शाता है।
आयोग ने अपनी जांच में ऐसे सबूत भी जुटाए हैं कि इजरायली बलों द्वारा की जाने वाली हत्याओं और हिंसा में यौन और लिंग-आधारित हिंसा भी शामिल है। वेस्ट बैंक में इजरायली सुरक्षाकर्मी यहूदी नागरिकों पर घातक बल का प्रयोग नहीं करते हैं, लेकिन फिलिस्तीनियों के लिए अलग और भेदभावपूर्ण नियम लागू किए जाते हैं। अक्टूबर 2023 से वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों की हत्याओं में 95% और घायलों में 82% की जिम्मेदारी इजरायली बलों की रही है।
दूसरी ओर, इस रिपोर्ट में फिलिस्तीनी प्राधिकरण के कामकाज पर भी सवाल उठाए गए हैं। फिलिस्तीनी सुरक्षा बलों द्वारा भी अपने ही नागरिकों, विशेष रूप से पत्रकारों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों के खिलाफ दमनकारी नीतियां अपनाई जा रही हैं। अक्टूबर 2023 से अक्टूबर 2025 के दौरान फिलिस्तीनी सुरक्षा बलों द्वारा कम से कम 14 फिलिस्तीनियों की हत्या की गई है। 'ऑपरेशन प्रोटेक्ट द होमलैंड' के दौरान विरोध प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस छोड़ने और मारपीट करने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं।
आयोग ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के अभियोजक से इस मामले में जांच जारी रखने और नरसंहार तथा युद्ध अपराधों के लिए गिरफ्तारी वारंट में सुधार करने या नए वारंट जारी करने का अनुरोध किया है। रिपोर्ट में इजरायल को तत्काल कब्जा छोड़ने, नरसंहार रोकने और फिलिस्तीनी प्राधिकरण को मानवाधिकारों के उल्लंघन की स्वतंत्र जांच करने की सिफारिश की गई है।
उल्लेखनीय है कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण की स्थापना सितंबर 1993 में ओस्लो समझौते और मई 1994 में गाज़ा-जेरिको समझौते के तहत की गई थी। इस संस्था का उद्देश्य वेस्ट बैंक और गाज़ा के कुछ हिस्सों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालना था। हालांकि, समय के साथ इस संस्था पर विरोधी आवाजों को दबाने और नागरिक अधिकारों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
यूक्रेन ने रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों में गोला-बारूद डिपो पर सटीक हमले किए
ज़पोरीज़िया और डोनेट्स्क ओब्लास्ट में रूसी सेना के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाकर यूक्रेन ने सप्लाई चेन बाधित की
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद तेहरान में उग्र विरोध
ईरानियों ने डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के विशाल पोस्टरों को जलाकर बदले की मांग की
हांगकांग के लोकतंत्र कार्यकर्ता जोशुआ वोंग को विदेशी मिलीभगत के लिए 10 साल की जेल
नेशनल सिक्योरिटी लॉ के तहत दूसरी बार दोषी ठहराए गए 30 वर्षीय कार्यकर्ता को सजा