फिल्म निर्माण की चुनौतियों और कमाई पर उद्योग के दिग्गजों ने की चर्चा
कंटेंट की मजबूती और बदलती दर्शक रुचि वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, शाम 6:08 · 4 मिनट का पाठ
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फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कमाई कैसे होती है और वर्तमान समय में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इस विषय पर एक विशेष चर्चा आयोजित की गई। बीबीसी गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, इस चर्चा में एक्सेल एंटरटेनमेंट के सीईओ विशाल रामचंद्रनी, सनशाइन पिक्चर्स के विपुल अमृतलाल शाह, पूजा फिल्म्स के जैकी भगनानी और दक्षिण भारतीय फिल्म निर्माता दिल राजू ने भाग लिया। इन सभी निर्माताओं ने डॉन फ्रैंचाइजी, द केरला स्टोरी और कुली नंबर 1 जैसी सफल फिल्में दी हैं। दिल राजू के आगामी प्रोजेक्ट्स में अक्षय कुमार की SVC60 और सलमान खान-नयनतारा की SVC63 फिल्म शामिल हैं।
एक्सेल एंटरटेनमेंट के सीईओ विशाल रामचंद्रनी ने बताया कि फिल्मों के निर्माण के लिए यह समय रोमांचक है। उन्होंने इस धारणा को गलत बताया कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने दर्शकों को सिनेमाघरों से दूर कर दिया है। रामचंद्रनी के अनुसार, विभिन्न भाषाओं, बजट और शैलियों की फिल्मों को थिएटरों में दर्शक मिल रहे हैं। हालांकि, उन्होंने जोड़ा कि अब केवल प्री-सेल्स के आधार पर काम नहीं चल सकता, बल्कि निर्माता को अपनी सामग्री और कहानी में अधिक विश्वास रखना होगा। यदि फिल्म देखने लायक होगी, तो दर्शक निश्चित रूप से आएंगे।
सनशाइन पिक्चर्स के विपुल अमृतलाल शाह के अनुसार, फिल्म बनाना हमेशा से कठिन रहा है क्योंकि दर्शकों की पसंद के लिए कोई निश्चित फॉर्मूला नहीं होता है, इसलिए लगातार नई कहानियों की खोज करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि सनशाइन पिक्चर्स के लिए चुनौती अधिक है क्योंकि वे एक ही शैली में काम करने के बजाय नए विषयों पर काम करते हैं। ओटीटी के कारण मनोरंजन के विकल्प बढ़े हैं, इसलिए अब ऐसी कहानियाँ खोजना आवश्यक है जिनसे दर्शक खुद को जोड़ सकें।
दक्षिण भारतीय फिल्म निर्माता दिल राजू ने बताया कि वर्तमान समय में चुनौतियाँ बहुत बढ़ गई हैं। फिल्मों के बजट में वृद्धि हुई है और ओटीटी जैसे विकल्प उपलब्ध हैं, जिसके कारण लोगों को दो घंटे से अधिक समय के लिए थिएटर में लाना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए फिल्म का कंटेंट इतना मजबूत होना चाहिए कि वह दर्शकों को थिएटर की ओर खींच सके और अंत तक बांधे रखे।
निर्माता जैकी भगनानी ने बताया कि दर्शकों की रुचि लगातार बदल रही है और मार्केटिंग खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे बजट पर दबाव पड़ता है। उनके अनुसार, एक निर्माता के लिए केवल अच्छी फिल्म बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही कहानी का चयन, उसकी प्रस्तुति, खर्च पर नियंत्रण और फिल्म का सही दर्शकों तक पहुँचना मुख्य चुनौतियाँ हैं।
कमाई और बिजनेस मॉडल के बारे में बात करते हुए विशाल रामचंद्रनी ने बताया कि उनका मुख्य व्यवसाय कंटेंट बनाने पर आधारित है, जिसमें फीचर फिल्में और वेब सीरीज शामिल हैं। उनका लक्ष्य हर साल तीन फीचर फिल्में और दो सीरीज बनाना है। वे अब म्यूजिक लेबल, बौद्धिक संपदा (आईपी), मर्चेंडाइजिंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे नए अवसरों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने 'मिर्जापुर: द मूवी' को अपनी हालिया बड़ी सफलता बताया।
विपुल शाह के अनुसार, वे फिल्म शुरू करने से पहले गहन शोध और तैयारी करते हैं। वे विभिन्न वित्तीय मॉडलों की समीक्षा करते हैं और सभी डेटा सही होने पर ही निर्माण शुरू करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि फिल्म निर्माण एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें स्पॉट बॉय से लेकर लेखक, निर्देशक और अभिनेता तक की पूरी टीम एक यूनिट के रूप में काम करती है, तभी एक अच्छी फिल्म बनती है।
अपनी प्रोडक्शन कंपनी श्री वेंकटेश्वर क्रिएशन्स के बिजनेस मॉडल के बारे में समझाते हुए दिल राजू ने कहा कि उनकी सफलता सही कहानी और निर्देशक के चयन, बजट पर सख्त नियंत्रण और फिल्म की उचित प्रस्तुति पर आधारित है।
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